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ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी 28 प्रतिशत, ऑनलाइन बाजार सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

आज का विश्व डिजिटल आधार पर खड़ा है. आने वाले समय में डिजिटल काम-काज पर और अधिक निर्भरता बढ़ेगी. विश्व के अधिकांश विकसित देशों के पास डिजिटल बाजार और व्यापार आर्थिक स्रोत का बड़ा जरिया बन रहा है.

Online GAming-GST
ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी 28 प्रतिशत, ऑनलाइन बाजार सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

आज का विश्व डिजिटल आधार पर खड़ा है. आने वाले समय में डिजिटल काम-काज पर और अधिक निर्भरता बढ़ेगी. विश्व के अधिकांश विकसित देशों के पास डिजिटल बाजार और व्यापार आर्थिक स्रोत का बड़ा जरिया बन रहा है. ऐसे में भारत को विश्व के विकसित देशों के समक्ष नए रूप में प्रस्तुत करने को लेकर वर्तमान सरकार लगातार अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर रही है. इसके लिए सरकार की ओर से भारत के भीतर और बाहर दोनों स्तर पर विकास की अनेकानेक संभावनाओं पर लगातार सकारात्मक प्रयास होता हुआ दिख रहा है. फिलहाल इस दृष्टि से तीन महत्वपूर्ण निर्णय सरकार की ओर से लिए गए हैं. पहला ऑनलाइन गेमिंग पर जीएसटी स्लेब को बढ़ाने का, दूसरा सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी की कानूनी स्थिति को लेकर राज्यों को स्वतंत्र कानून बनाने का अधिकार देने की बात की है तथा तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण निर्णय ऑनलाइन फ्राड को रोकने तथा जनता के भरोसे को बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है जो सरकार की सजगता की ओर संकेत कर रहा है.

खबर में खास
  • कसीनो, घुड़दौड़, ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत टैक्स को संस्तुति
  • जीएसटी काउन्सिल की अगली बैठक में पारित हो सकता है प्रस्ताव
  • ऑनलाइन सुरक्षा, जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार का उद्देश्य
  • साइबर सुरक्षा आज बड़ी चुनौती, छोटी सी चूक बहुत बड़ी बाधा
  • केंद्र और राज्यों के पास जीएसटी पर कानून बनाने का समान अधिकार
  • जनता का भरोसा डिजिटल की ओर बढ़ाया जाए, सरकार की प्रतिबद्धता
कसीनो, घुड़दौड़, ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत टैक्स को संस्तुति

पिछले दिनों ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मेघालय के मुख्यमंत्री  कोनराड संगमा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें इस दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया. इस बैठक में ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी (माल और सेवा कर)  लगाने का निर्णय लिया गया. इस विषय पर समीक्षा के लिए गठित मंत्रियों की समिति ने अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है. इस बैठक में कसीनो, घुड़दौड़, ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत टैक्स को अंतिम संस्तुति दी गई है. अभी कसीनो, घुड़दौड़ और ऑनलाइन गेमिंग पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है. मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की अगुवाई में मंत्रियों के समूहों ने इस महीने की शुरुआत में अपनी पिछली बैठक में सर्वसम्मति से इन सेवाओं पर कर की दर को बढ़ाकर 28 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था.

जीएसटी काउन्सिल की अगली बैठक में पारित हो सकता है प्रस्ताव

इस रिपोर्ट को जीएसटी काउन्सिल की आगामी बैठक में पारित किया जा सकता है. मंत्री समूह के इस निर्णय को वित्त मंत्रालय को भेजा जा चुका है. यहाँ समझना यह है कि आखिर ऐसा निर्णय क्यों लिया गया? इससे सरकर को क्या फायदा होगा? इस संदर्भ में हमें समझना चाहिए कि जैसे–जैसे डिजिटल दुनिया का विस्तार हो रहा है उसी तरह से इसमें पूंजी निवेश के अवसर और लाभ के अवसर भी बढ़ रहे हैं. विश्व के कई देश ऑनलाइन गेमिंग को अपनी कमाई का बड़ा जरिया बना रहे हैं, साथ ही भारत जैसे बड़ी आबादी के देश पर उनकी पैनी नजर है. भारत की युवा आबादी और डिजिटल प्लेटफार्म की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए विश्व की कंपनियाँ भारत से अच्छी कमाई का रास्ता देख रही हैं, साथ ही इस समय ऑनलाइन गेमिंग की मांग भी बढ़ रही है. इन सभी मुद्दों को ध्यान  में रखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है.

ऑनलाइन सुरक्षा, जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार का उद्देश्य

इसी से जुड़ा हुआ दूसरा निर्णय भी है. एक ओर ऑनलाइन गेम बढ़ रहे हैं तो दूसरी ओर बहुत तेजी से ऑनलाइन लेन-देन का भी विस्तार हो रहा है. इस सदर्भ में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सरकार की मंशा को स्पष्ट करते हुए कहा है कि ऑनलाइन सुरक्षा, विश्वास और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार के महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं. भारत सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी, उपकरण और साइबर स्वच्छता केंद्रों के लिए वर्ष 2022-23 के लिए 515 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. इस दृष्टि केंद्र सरकार ने सुरक्षा और भरोसे का माहौल तैयार करने तथा साइबर सुरक्षा के मामलों के ऑनलाइन समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पिछले दिनों साइबर सुरक्षा निर्देशों के बारे में अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्नों पर विधिवत दस्तावेज जारी किया. इस सन्दर्भ में उन्‍होंने कहा कि साइबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए 2019 से 2020 के बीच 809 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की गई. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का मुख्‍य उद्देश्‍य ऑनलाइन सुरक्षा, विश्वास और जवाबदेही सुनिश्चित करना है.

साइबर सुरक्षा आज बड़ी चुनौती, छोटी सी चूक बहुत बड़ी बाधा

साइबर सुरक्षा आज विश्व के सामने बहुत बड़ी चुनौती की तरह है। एक छोटी सी चूक बहुत बड़ी बाधा बन सकती है. इसलिए इसके प्रति सजग रहना सरकार का लक्ष्य है. डिजिटल लेन-देन आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है. वहीं फुटकर लेन-देन में भी इसका बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है. यदि सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर आम जन का भरोसा नहीं जीत पाती है तो यह आज के समय की बहुत बड़ी विफलता सिद्ध होगा, साथ ही बहुत बड़े स्तर पर सरकार को आर्थिक नुकसान भी उठना पड़ सकता है. इसीलिए इस मामले को सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता सूची में रखा हुआ है.

केंद्र और राज्यों के पास जीएसटी पर कानून बनाने का समान अधिकार

इसी से जुड़ा हुआ एक मुद्दा पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में भी आया. यह राज्यों और केंद्र के बीच जीएसटी का मामला था. सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी पर एक अहम फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्यों के पास जीएसटी पर कानून बनाने का समान अधिकार है. इसलिए जीएसटी काउंसिल को केंद्र और राज्यों के बीच व्यावहारिक समाधान देने के लिए सामंजस्य का रास्ता अपनाना चाहिए. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि जीएसटी परिषद की सिफारिशें सहयोगात्मक होनी चाहिए तथा इसे सामूहिक चर्चा से लिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश के मद्देनजर आया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है. इस फैसले का सीधा प्रभाव जीएसटी के मौजूदा स्वरूप और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पड़ेगा. दरअसल गुजरात हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि समुद्री माल ढुलाई पर एकीकृत जीएसटी असंवैधानिक है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि संसद और राज्य विधानसभा दोनों के पास जीएसटी पर कानून बनाने की शक्ति है और परिषद की सिफारिशें केंद्र और राज्यों के बीच एक सहयोगी संवाद का परिणाम हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को हम इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि जीएसटी परिषद को सिर्फ अप्रत्यक्ष कर प्रणाली तक सीमित एक संवैधानिक निकाय की तरह नहीं मानना चाहिए, बल्कि लोकतंत्र और संघवाद को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए. इस सन्दर्भ में न्यायालय ने उल्लिखित किया कि अनुच्छेद 246ए के तहत संसद और राज्य विधायिका के पास कराधान के मामलों पर कानून बनाने की एक समान शक्तियां प्राप्त हैं. अनुच्छेद 246ए के तहत केंद्र और राज्य के साथ एक समान व्यवहार किया गया है, वहीं अनुच्छेद 279 कहता है कि केंद्र और राज्य एक-दूसरे से स्वतंत्र रहते हुए काम नहीं कर सकते. हालाँकि ‘एक राष्ट्र-एक कर’ व्यवस्था में बदलाव की संभावना फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है. यह फैसला केवल वर्तमान कानून का एक तरह से दोहराव जैसा ही है, जो राज्यों को कराधान पर परिषद की सिफारिश को स्वीकार करने या खारिज करने का एक सामान्य अधिकार प्रदान करता है.

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जनता का भरोसा डिजिटल की ओर बढ़ाया जाए, सरकार की प्रतिबद्धता

इस प्रकार सरकार की प्रतिबद्धता यही है कि आम जन का भरोसा डिजिटल की ओर बढ़ाया जाय, साथ ही उन्हें डिजिटल माध्यम से होने वाले आर्थिक अपराधों पर भी सुरक्षा प्रदान किया जाए. वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में जिस बात पर जोर है वह सामूहिकता की भावना है जो राष्ट्र को एकसूत्र में बांधकर आगे बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक है.

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