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Virat Kohli: बेरहम किस्मत! हाथ आया, पर मुंह न लगा, ‘एंग्री मैन’ को कब तक ढोएगी टीम इंडिया

Virat Kohli's

Virat Kohli- Bad Luck!: ”इसी होनी को तो क़िस्मत का लिखा कहते हैं जीतने का जहां मौका था वहीं मात हुई”. इंग्लैंड और भारत (IND vs ENG) के बीच खेले गए एजबेस्टन टेस्ट के बाद तो शायद आप समझ ही गए होंगे की हमने ये शायरी किसको डेडिकेट की है. टीम इंडिया (Team India) का हाल.., फिलहाल कुछ ऐसा है कि अपना गम बताए तो बताए किसको. क्योंकि आलम ये है कि ना तो टीम की प्लेइंग-11 स्टेबल है और ना हीं कई बड़े खिलाड़ी फॉर्म में है और तो और कप्तान को लेकर टीम लगातार एक्सपेरिमेंट कर रही है. जिसका असर टीम के परफॉर्मेंस पर हो रहा है. लेकिन इस बार इंग्लैंड से मिली हार से हाहाकार मच गया. टीम तो छोड़िए कोच राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. मगर इस बीच अगर किसी खिलाड़ी की मुश्किलें बढ़नें वाली है तो वो है रन मशीन विराट कोहली (Virat Kohli) जिनके रनों का सूखा खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या अब विराट कोहली टीम इंडिया के लिए बोझ बन गए हैं..?

खबर में खास
  • 3 साल से फ्लॉप फिर भी टीम में कोहली
  • कोहली के प्रदर्शन पर एक नजर…
  • 2019 के बाद विराट का प्रदर्शन
  • कोहली से बड़ा सवाल
Virat Kohli
Virat Kohli

3 साल से फ्लॉप फिर भी टीम में कोहली

बतौर बल्लेबाज कोहली का औदा इतना बड़ा है कि उन्हें टीम से बाहर करना आसान नहीं है. लेकिन लगातार फ्लॉप शो के कारण भी टीम में जगह देना ये भी एक बड़ा सवाल है क्योंकि अंत में नाम नहीं काम चाहिए जिसमें विराट बार बार फेल हो रहे हैं और ऐसा हम नहीं आंकड़े बता रहे हैं.

कोहली के प्रदर्शन पर एक नजर…

सबसे पहले इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की सीरीज में कोहली का परफॉर्मेंस कैसा रहा, वो देखिए.

  • मैच- 5
  • रन- 249
  • औसत- 27.66

2019 के बाद विराट का प्रदर्शन

  • साल 2020 2021 2022
  • मैच 3 11 4
  • रन 116 536 220
  • औसत 19.33 28.21 31.42

सवाल: क्या कोहली खुद कप्तान होते तो ऐसे बल्लेबाज को प्लेइंग-11 मौका दे देते ?

पिछले तीन साल के खराब परफॉर्मेंस के बाद दुनियाभर में विराट सबसे ज्यादा टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में टॉप-30 में भी नहीं है. ऐसे प्रदर्शन के बाद भी उनके नाम और औदे के कारण उन्हें लगातार मौका मिल रहा है जिसमें वो अब तक सफल नहीं हुए हैं. सवाल

सवाल ये है कि क्या अगर कोहली खुद कप्तान होते तो क्या वो ऐसे साधारण खेल दिखाने वाले बल्लेबाज को इतने मौके देते जिसकी गवाही उनके कप्तानी के दौरान तय किए मायने नहीं देते क्योंकि उन्होंने बतौर कप्तान 68 टेस्ट मैचों में 64 मैचों में टीम की प्लेइंग-11 में बड़े बदलाव किए हैं.

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ये भी पढ़ें: IND Vs ENG: बुमराह का बड़ा बयान, बोले अगर-मगर नहीं ये है हार की असली वजह!

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