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76th Independence Day: पीएम मोदी ने लालकिले से 9वीं बार फहराया तिरंगा, पढ़ें उनके संबोधन की बड़ी बातें

PM Modi
लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी (Photo: YouTube)

आजादी के अमृत महोत्सव में आज का दिन काफी बड़ा है. 75 साल पहले आज के ही दिन हमारा देश आजाद हुआ था. 76वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से तिरंगा फहराया. पीएम मोदी (PM Modi) ने लगातार 9वीं बार लालकिले से राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद देशवासियों को 76वें स्वतंत्रता दिवस (76th Independence Day) की बधाई दी. इस दौरान पीएम मोदी ने देश को संबोधित भी किया. पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें पढ़िए…

पीएम ने स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया

लाल किले से पीएम मोदी ने कहा कि कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले बापू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबासाहेब अम्बेडकर, वीर सावरकर के प्रति नागरिक आभारी हैं. कार्तव्य पथ ही उनका जीवन पथ रहा. पीएम मोदी ने कहा कि यह देश मंगल पांडे, तात्या टोपे, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकउल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल और ब्रिटिश शासन की नींव हिलाने वाले हमारे असंख्य क्रांतिकारियों का आभारी है. पीएम मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान का कोई कोना, कोई काल ऐसा नहीं था, जब देशवासियों ने सैंकड़ों सालों तक गुलामी के खिलाफ जंग न की हो, जीवन न खपाया हो, यातनाएं न झेली हो, आहुति न दी हो.

गांधी के सपने को पूरा करने के लिए खुद को खपाया

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के बाद देश ने मुझे सेवा करने का मौका दिया. मैं पहला व्यक्ति था, जिसे लाल किले से देशवासियों के गौरवगान करने का मौका मिला था. जितना आपसे सीखा है, आपको जान पाया हूं. आपके सुख-दुख को जान पाया हूं. उसे लेकर मैंने पूरा कालखंड उन लोगों के लिए खंपाया है. महात्मा गांधी का जो सपना था, आखिरी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का. मैंने अपने महात्मा गांधी के सपने को पूरा करने के लिए खुद को समर्पित किया. देशवासियों मैं आज का सबसे बड़ा सौभाग्य देख रहा हूं, भारत का जनमन आकांक्षी जनमन हैं. आज समाज के हर तबक में आकांक्षाएं ऊफान पर है. देश का हर नागरिक गति-प्रगति चाहता है, वो अपने सपने पूरा करने के लिए लालायित है.

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भारत में सामुहिक चेतना का पुनर्जागरण हुआ

पीएम मोदी ने कहा कि हमने एक और ताकत का अनुभव किया है. भारत में सामुहिक चेतना का पुनर्जागरण हुआ है. आजादी के इतने संघर्ष में जो अमृत था वो संजोया जा रहा है, पुरुषार्थ की पराकाष्ठा जुड़ रही है और सिद्धी का मार्ग नजर आ रहा है. ये पुनर्जागरण हमारी सबसे बड़ी अमानत है. कोरोना के कालखंड में दुनिया वैक्सीन की उलझन में जी रहा था. उस वक्त हमारे देश ने 200 करोड़ वैक्सीन की डोज लेकर दुनिया को चौंकाने का काम किया. यही सामुहिक चेतना का पुनर्जागरण है. पूरे विश्व का भारत की तरफ देखने का नजरिया बदल चुका है. समस्याओं का समाधान भारत की धरती पर दुनिया खोजने लगी है. विश्व का ये बदलाव, विश्व की सोच में ये परिवर्तन 75 साल की हमारी यात्रा का परिणाम है.

सभी महापुरुषों को याद करने का प्रयास किया

पीएम मोदी ने कहा कि आज जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो पिछले 75 साल में देश के लिए जीने-मरने वाले, देश की सुरक्षा करने वाले, देश के संकल्पों को पूरा करने वाले चाहे सेना के जवान हों, पुलिसकर्मी हों, जन प्रतिनिधि हों, स्थानीय स्वराज की संस्थाओं के प्रशासक रहे हों. आजादी के अमृत महोत्सव में हिंदुस्तान के हर कोने में उन सभी महापुरुषों को याद करने का प्रयास किया गया, जिनको किसी न किसी कारणवश इतिहास में जगह न मिली, या उनकों भुला दिया गया था. आज देश ने खोज खोज कर ऐसे वीरों, महापुरुषों, बलिदानियों, सत्याग्रहियों को याद किया, नमन किया. चाहे स्वच्छता का अभियान हो या गरीबों के कल्याण का काम हो, देश आज पूरी शक्ति से आगे बढ़ रहा है. गांव-गांव से लोग जुड़ रहे हैं, कार्यसेवा कर रहे हैं.

अपनी पीठ धपधपाने से सपने दूर हो जाएंगे

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हमारी 75 साल की यात्रा का गौरवगान करते रहेंगे, अपनी ही पीठ थपथपाते रहेंगे तो हमारे सपने कहीं दूर चले जाएंगे. 75 साल का कालखंड कितना ही शानदार रहा हो, कितने ही संकटों और चुनौतियों वाला रहा हो. कितने ही सपने अधूरे दिखते हों. उसके बावजूद भी अगले 25 वर्ष हमारे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. आने वाले 25 साल के लिए हमें 5 प्रण पर अपनी शक्ति को केंद्रित करना होगा. पहला प्रण- विकसित भारत. दूसरा प्रण- गुलामी का एक भी अंश ना हो. तीसरा प्रण- विरासत पर गर्व. चौथा प्रण- एकता और एकजुटता. पांचवां प्रण- कर्तव्य पालन.

पीएम मोदी के देशवासियों को 5 प्रण दिलाए

पीएम मोदी ने लालकिले की प्राचीर से भविष्य की रूपरेखा तय की. पीएम मोदी ने आने वाले 25 सालों में विकसित भारत के लिए देशवासियों को 5 प्रण दिलाए. पीएम मोदी ने कहा कि अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा. इसके लिए 5 संकल्प लेकर चलना होगा. पहला बड़ा संकल्प है विकसित भारत और उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए. दूसरा प्रण है किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर अगर गुलामी का एक भी अंश हो उसे किसी भी हालत में बचने नहीं देना. तीसरी प्रण शक्ति- हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए. चौथा प्रण है- एकता और एकजुटता… पांचवां प्रण है- नागरिकों का कर्तव्य, इसमें प्रधानमंत्री भी बाहर नहीं होता है, राष्ट्रपति भी बाहर नहीं है. आने वाले 25 साल के लिए हमें उन पंच प्राण पर अपनी शक्ति को केंद्रित करना होगा. 2047 जब आज़ादी के 100 साल होंगे, आज़ादी के दिवानों के सारे सपने पूरे करने का जिम्मा उठाकर चलना होगा.

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