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शाहनवाज हुसैन के खिलाफ दर्ज होगा बलात्कार का केस, दिल्ली HC का आदेश

Shahnawaz Hussain
Shahnawaz Hussain

भारतीय जनता पार्टी के नेता शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) ने 2018 के बलात्कार मामले में दिल्ली हाई होर्ट (Delhi High Court) ने केस दर्ज करने का आदेश दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ गुरुवार को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का जिक्र किया गया था. साथ ही केस को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की गई थी. शहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) के वकील ने कहा, तत्काल लिस्टिंग की आवश्यकता है क्योंकि सुनवाई में किसी भी तरह की देरी किसी उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है. CJI बेंच ने आश्वासन दिया कि मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध किया जाएगा.

खबर में खास

  • दिल्ली HC का आदेश
  • आदेशों में कोई गड़बड़ी नहीं
  • क्या है पूरा मामला जानिए

दिल्ली HC का आदेश

दिल्ली हाई होर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार को निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें उसने 2018 बलात्कार मामले के संबंध में बीजेपी (BJP) नेता शहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. अदालत ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली शहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) की याचिका में कोई दम नहीं पाया और इस तरह इसे खारिज करने का फैसला किया. इसमें कहा गया है, एफआईआर तुरंत दर्ज की जाए. जांच पूरी की जाए और सीआरपीसी की धारा 173 के तहत एक विस्तृत रिपोर्ट तीन महीने के भीतर एमएम के समक्ष पेश की जाए.

आदेशों में कोई गड़बड़ी नहीं

न्यायमूर्ति आशा मेनन की खंडपीठ ने एक आदेश में कहा, महानगर मजिस्ट्रेट (एमएम) के प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश के आदेशों में कोई गड़बड़ी नहीं है. विशेष न्यायाधीश के फैसले में भी कोई त्रुटि नहीं है कि जांच रिपोर्ट है. प्रकृति में प्रारंभिक होने के कारण रद्दीकरण रिपोर्ट के रूप में नहीं माना जा सकता है. अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने और पूरी जांच करने के बाद निर्धारित प्रारूप में सीआरपीसी की धारा 173 के तहत रिपोर्ट जमा करनी होगी.

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एमएम निश्चित रूप से कानून के अनुसार आगे बढ़ेगा. ये निर्धारित करने के लिए कि क्या अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करना है या तो संज्ञान लेकर मामले को आगे बढ़ाना है या यह मानते हुए कि किसी मामले का खुलासा नहीं किया गया था और शिकायतकर्ता को सुनवाई देने के बाद प्राथमिकी रद्द कर दी गई थी.

क्या है पूरा मामला जानिए

साल 2018 में एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया और बीजेपी नेता शाहनवाज शहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की. सात जुलाई 2018 को साकेत कोर्ट के एमएम ने आरोपी व्यक्ति के खिलाफ रेप की प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. एमएम के फैसले को शाहनवाज ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली और एमएम के आदेश पर स्टे दे दिया गया. इसके बाद शाहनवाज ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

दिल्ली हाई होर्ट (Delhi High Court) ने 13 जुलाई 2018 को मामले की विस्तार से जांच करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी. शाहनवाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने प्रस्तुत किया था कि पुलिस द्वारा की गई जांच ने शिकायतकर्ता के मामले को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है कि वह और याचिकाकर्ता छतरपुर फार्म में एक साथ थे जहां याचिकाकर्ता ने उसे नशीला पदार्थ दिया और उसके साथ बलात्कार किया.

यह प्रस्तुत किया गया था कि याचिकाकर्ता रात 9.15 बजे के बाद अपने आवास से नहीं गया था और इसलिए, अभियोजन पक्ष के आरोप के अनुसार रात 10.30 बजे छतरपुर में नहीं हो सकता था. इसके अलावा रोशन टेंट हाउस के गवाह, जहां अभियोक्ता ने दावा किया था कि वह याचिकाकर्ता से मिला था, ने न तो इस तथ्य की पुष्टि की और न ही सीसीटीवी फुटेज ने उसके दावे का समर्थन किया.

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इसके अलावा फार्महाउस के गवाहों ने उसके इस दावे का भी खंडन किया है कि वह और आरोपी 12 अप्रैल, 2018 को फार्महाउस गए थे, जैसा कि उनके द्वारा आरोप लगाया गया था, शहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) के वकील ने तर्क दिया. यह प्रस्तुत किया गया था कि अभियोक्ता के सीडीआर ने यह भी खुलासा किया कि उसके पास था. रात 10.45 बजे तक द्वारका में रहे. इस प्रकार उसके पूरे मामले को जांच द्वारा गलत ठहराया गया है और इसलिए, एमएम और विशेष न्यायाधीश ने प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने में गलती की थी और ये आदेश रद्द किए जाने के लिए उत्तरदायी थे और प्राथमिकी के साथ-साथ शिकायत मामले और सभी वकील ने कहा कि इससे उत्पन्न होने वाली कार्यवाही को रद्द किया जाना चाहिए.

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