Connect with us

Hi, what are you looking for?

[t4b-ticker]

देश

यूपीए में 60% से एनडीए में 95% तक: CBI के जाल में विपक्षी नेताओं की हिस्सेदारी में उछाल

सीबीआई ने सोहराबुद्दीन शेख मामले में एक विशेष अदालत द्वारा अमित शाह को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर नहीं की, जबकि एजेंसी ने शारदा चिटफंड घोटाले में असम के तत्कालीन कांग्रेस नेता हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े परिसरों पर छापा मारा और उनसे पूछताछ की. भाजपा में शामिल होने के बाद सरमा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. सरमा अब असम के मुख्यमंत्री हैं और पूर्वोत्तर में भाजपा के प्रमुख नेता हैं.

CBI Raids
UPA में 60% से NDA में 95% तक: CBI के जाल में विपक्षी नेताओं की हिस्सेदारी में उछाल (File Photo: ANI)

नई दिल्ली. “कांग्रेस ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन” और “पिंजरे के तोते” से लेकर और न जाने कितने व्यंगनुमा नामों से अलंकृत सीबीआई (CBI) को लेकर एक रिपोर्ट सार्वजानिक हुई है, जिसे लेकर राजनीति के हलकों में फिर से घमासान मच सकता है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक पिछले 18 वर्षों में, कांग्रेस और भाजपा की सरकारों में, करीब 200 प्रमुख राजनेताओं पर सीबीआई ने मामला दर्ज किया है, गिरफ्तार किया है, छापे मारे हैं या फिर पूछताछ की है. इनमें 80 प्रतिशत से अधिक विपक्ष के नेता शामिल हैं. 2014 में एनडीए सरकार के आने के बाद विपक्षी नेताओं के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई 60% से बढ़कर 95% हो गई है.

इस खबर में ये है खास-

  • NDA में 118 विपक्षी नेताओं पर CBI का शिकंजा
  • भाजपा के केवल छह नेता सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं.
  • विपक्ष के प्रमुख नेताओं का पार्टीवार ब्रेक-अप
  • UPA से अलग होने पर DMK पर शिकंजा
  • कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह पर राजशेखर रेड्डी की खिलाफ जांच
  • NDA में सत्तारूढ के नेताओं के मामले में नरमी का आरोप

NDA में 118 विपक्षी नेताओं पर CBI का शिकंजा

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के 10 वर्षों (2004-2014) के दौरान, कम से कम 72 राजनीतिक नेता सीबीआई जांच के दायरे में आए और उनमें से 43 (60 प्रतिशत) विपक्ष से थे. भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए-1 और एनडीए-2 के आठ वर्षों के शासन में कम से कम 124 प्रमुख नेताओं को सीबीआई जांच का सामना करना पड़ा है और उनमें से 118 विपक्ष से हैं – यानी 95 प्रतिशत. एनडीए सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि जैसे ही कोई नेता UPA से पाला बदलता है और NDA की शरण में जाता है तो उसके खिलाफ सीबीआई का मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है.

यूपीए और एनडीए सरकारों के दौरान सीबीआई जांच के दायरे में विपक्षी नेताओं की बढ़ती संख्या को लेकर सीबीआई के एक अधिकारी ने केवल संयोग कहा और इस बात से इनकार किया कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है. यूपीए शासन के कई घोटालों के साथ, 2-जी स्पेक्ट्रम मामले से लेकर राष्ट्रमंडल खेलों और कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों तक, सीबीआई ने 2004 से 2014 तक जिन 72 प्रमुख नेताओं की जांच की, उनमें से 29 कांग्रेस या उसके सहयोगियों के थे.

भाजपा के केवल छह नेता सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं.

Advertisement. Scroll to continue reading.

यूपीए के दौरान सीबीआई द्वारा जांच के तहत 43 विपक्षी नेताओं में से, भाजपा के पास सबसे बड़ा हिस्सा था, जिसमें उसके 12 नेताओं से पूछताछ की गई, छापे मारे गए या गिरफ्तार किए गए. इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे, जो गुजरात के तत्कालीन मंत्री थे, जिन्हें एजेंसी ने सोहराबुद्दीन शेख की कथित मुठभेड़ में हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. जांच के दायरे में एनडीए के अन्य प्रमुख नेताओं में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा; बेल्लारी के खनन कारोबारी गली जनार्दन रेड्डी और पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस आदि शामिल रहे. सीबीआई ने प्रमोद महाजन की मृत्यु के बाद भी उनके खिलाफ अपनी जांच जारी रखी, जब 2012 में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन जांच से संबंधित चार्जशीट में उनका नाम लिया गया.

2014 की शुरुआत में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ सीबीआई जांच ने गति पकड़ी. जांच के दायरे में 118 प्रमुख विपक्षी राजनेताओं में से, सूची में सबसे ऊपर टीएमसी (30) और कांग्रेस (26) हैं. इसके अलावा, सीबीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे प्रमुख कांग्रेस नेताओं के करीबी रिश्तेदारों की जांच की. टीएमसी के लिए, सारदा चिटफंड मामले और नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले ने सीबीआई जांच के मामले में इसे सबसे बड़ी पार्टी बना दिया है. पिछले दो महीनों में, टीएमसी मंत्री पार्थ चटर्जी को “नकदी के लिए स्कूल की नौकरी” मामले में उनकी कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किया गया था और पार्टी नेता अनुब्रत मंडल को सीमा पार पशु-तस्करी रैकेट में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था. इन के बाद जांच के तहत सबसे अधिक गैर-एनडीए राजनेताओं की संख्या राजद और बीजद से थी- 10-10. संयोग से, ये दोनों विपक्षी दल क्रमशः बिहार और ओडिशा में सत्ता में हैं.

विपक्ष के प्रमुख नेताओं का पार्टीवार ब्रेक-अप

  • टीएमसी (30)
  • कांग्रेस (26)
  • राजद (10)
  • बीजद (10)
  • वाईएसआरसीपी (6)
  • बसपा (5)
  • टीडीपी (5)
  • आप (4 )
  • एसपी (4)
  • अन्नाद्रमुक (4)
  • सीपीएम (4)
  • एनसीपी (3)
  • एनसी (2)
  • डीएमके (2)
  • पीडीपी (1)
  • टीआरएस (1)
  • निर्दलीय (1)

UPA से अलग होने पर DMK पर शिकंजा

2013 में, DMK के UPA से बाहर निकलने के दो दिन बाद CBI ने चेन्नई में पार्टी के नेता और वर्तमान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के घर पर लग्जरी कारों के आयात से संबंधित एक मामले में छापा मारा. उस समय के अधिकारियों के अनुसार, राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई) ने छापे से एक महीने पहले सीबीआई को 33 कारों से जुड़े मामले की जानकारी दी थी, लेकिन एजेंसी ने मामला तब दर्ज किया जब द्रमुक ने कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया. इसी तरह, पिछले महीने सीबीआई ने राजद नेताओं से जुड़े कई परिसरों पर छापा मारा, जिसमें एक कथित रूप से बिहार के वर्तमान डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से जुड़ा हुआ था, जिस दिन नई जद (यू)-राजद सरकार विधानसभा में विश्वास मत का सामना कर रही थी. कुछ दिन पहले जदयू ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था.

कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह पर राजशेखर रेड्डी की खिलाफ जांच

Advertisement. Scroll to continue reading.

फिर, यूपीए शासन के दौरान, सत्तारूढ़ गठबंधन पर संभावित सहयोगियों को धमकाने के लिए सीबीआई का “दुरुपयोग” करने का आरोप लगाया गया था. 2007 में, कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में सपा नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार के खिलाफ एक प्रारंभिक जांच (पीई) की गई थी. एक साल बाद, अमेरिका के परमाणु समझौते से वामपंथियों के हटने के बाद सपा ने गठबंधन को बनाए रखने में मदद की थी. आय से अधिक संपत्ति का मामला 2013 में बंद कर दिया गया था. इसी तरह, सीबीआई ने आंध्र प्रदेश में वाईएस राजशेखर रेड्डी की सरकार के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच शुरू की, जब उनके बेटे वाईएस जगन रेड्डी ने 2009 में अपने पिता की मृत्यु के बाद कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह कर दिया.

2015 में दिल्ली की सत्ताधारी AAP ने भ्रष्टाचार के एक मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालयों पर रेड की आलोचना की थी. 2017 में पंजाब के चुनावों से पहले, एजेंसी ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन सहित आप नेताओं के खिलाफ कई जांच शुरू की. पिछले महीने, सीबीआई ने दिल्ली की शराब नीति से संबंधित कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में सिसोदिया के आवास पर छापेमारी की.

NDA में सत्तारूढ के नेताओं के मामले में नरमी का आरोप

एनडीए के शासनकाल में सीबीआई पर सत्तारूढ़ सरकार के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ पिछले मामलों में नरम होने का भी आरोप लगाया गया है. सीबीआई ने सोहराबुद्दीन शेख मामले में एक विशेष अदालत द्वारा अमित शाह को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर नहीं की, जबकि एजेंसी ने शारदा चिटफंड घोटाले में असम के तत्कालीन कांग्रेस नेता हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े परिसरों पर छापा मारा और उनसे पूछताछ की. भाजपा में शामिल होने के बाद सरमा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. सरमा अब असम के मुख्यमंत्री हैं और पूर्वोत्तर में भाजपा के प्रमुख नेता हैं.

Advertisement. Scroll to continue reading.

मई 2021 में, सीबीआई ने नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में चार्जशीट दायर की, लेकिन पश्चिम बंगाल के नेताओं सुवेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय को टीएमसी नेताओं के साथ आरोपी के रूप में नामित नहीं किया. इसके अलावा, मामले में अभियोजन की मंजूरी के लिए एजेंसी द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को भेजी गई सूची में रॉय का नाम नहीं था. तब तक, रॉय और अधिकारी भाजपा में शामिल हो गए थे. रॉय बाद में टीएमसी में लौट आए थे.

You May Also Like

बॉलीवुड

मॉडल ने पंखे से लटक कर अपनी जान दे दी. मौके से एक सुसाइड नोट मिला है. सुसाइड नोट में लिखा है, मौत के...

बॉलीवुड

मुंबई के अंधेरी इलाके में 30 साल की मॉडल आकांक्षा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या से पहले आकांक्षा ने सुसाइट नोट में...

देश

नई दिल्लीः भारत में आज शुक्रवार को कोरोना के मामलों में गिरावट देखने को मिली है. पिछले 24 घंटे में कोविड-19 (India Coronavirus Case) के...

बॉलीवुड

खबरों की मानें त ऋचा के हाथ में सजी मेहंदी राजस्थान से आई है. इसके साथ ही मेहंदी सेरेमनी के लिए 5 ऑर्टिस्ट्स को...

Advertisement