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पहले परीक्षा परिणाम में देरी और अब वीजा का इंतजार, नहीं खत्म हो रहीं छात्रों की परेशानियां

Indian Students From Ukraine
Indian Students /PTI

नई दिल्ली. भारत में इस साल 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद विदेश में पढ़ाई की चाह रखने वालों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई, फिर बोर्ड परीक्षाओं और उनके परिणामों में देरी, वीजा का इंतजार और अब हवाई यात्रा के लिए टिकट किराया दरों में वृद्धि के कारण छात्र एक के बाद एक कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं. कोविड के दौरान विदेश जाकर पढ़ाई करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के परिजनों का कहना है कि महामारी के कारण स्कूल बंद होना इस “तनावपूर्ण” चरण की शुरुआत थी, जिस पर अब उनका करियर टिका हुआ है. पहले छात्रों को दो साल तक घर में रहकर पढ़ाई करनी पड़ी.

इस खबर में ये है खास-

  • परीक्षा परिणाम में देरी से मुसीबत
  • वीजा न मिलने से मुसीबत में छात्र
  • दो चरणों में हुई थी परीक्षा

परीक्षा परिणाम में देरी से मुसीबत

फिर बोर्ड परीक्षाओं को दो चरण में विभाजित किया गया, जो इस प्रकार का पहला प्रयोग था. परिणामों की गणना कैसे की जाएगी, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी. दूसरे चरण की परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम की तुलना में देरी से हुई और फिर परिणाम में देरी ने हमें मुश्किल में डाल दिया.” ओसन कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करना चाहती हैं. उन्होंने कहा, “फिर परिणाम की घोषणा के बावजूद बोर्ड की ओर से प्रमाण पत्र मिलने में कई हफ्ते लग गए. इस दौरान, हम वीजा, अंतिम समय में उड़ान दरों में वृद्धि, ऋण का इंतजाम इन सबने मुश्किलों में इजाफा किया.

शुक्र है कि हमारे पास अब सब कुछ है लेकिन मेरे जाने में सिर्फ दो सप्ताह बचे हैं और मुझे यूबीसी से अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है. जाने से कम से कम दो सप्ताह पहले सारी तैयारी नहीं होना बहुत तनावपूर्ण है.” सिडनी में न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय (यूएनएसडब्ल्यू) में कंप्यूटर विज्ञान की योजना बना रहे 19 वर्षीय अखिलेश कौशिक की तैयारी अभी पूरी नहीं हुई है. उन्होंने कहा, “मैं यात्रा की व्यवस्था नहीं कर पाया और वीजा के लिए देर से आवेदन किया क्योंकि बोर्ड परीक्षा के परिणाम कब घोषित किए जाएंगे, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी.

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वीजा न मिलने से मुसीबत में छात्र

परीक्षा परिणाम विश्वविद्यालय के लिए एक पूर्व-आवश्यकता थी. जब परिणाम में देरी हुई, तो मैंने अंततः वीजा के लिए आवेदन किया और उड़ान बुक की. टिकट तब तक महंगे हो गए थे. मेरे पास अभी तक वीजा नहीं है और यह स्पष्ट नहीं है कि मैं योजना के अनुसार अगस्त के अंत में सेमेस्टर में शामिल हो पाऊंगा या नहीं. ” वर्ष 2021 में, भारत से 13.24 लाख से अधिक छात्र उच्च अध्ययन के लिए विदेश गए थे, जिनमें से सबसे अधिक अमेरिका (4.65 लाख), उसके बाद कनाडा (1.83 लाख), संयुक्त अरब अमीरात (1.64 लाख) और ऑस्ट्रेलिया (1.09 लाख) गए.

दो चरणों में हुई थी परीक्षा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और भारतीय विद्यालयी परीक्षा प्रमाण पत्र परिषद (सीआईएससीई) ने 2021-22 बोर्ड परीक्षा के शैक्षणिक सत्र को दो चरणों में विभाजित किया था. पहले चरण की परीक्षा पिछले साल नवंबर-दिसंबर में आयोजित की गई थी जबकि दूसरा चरण इस साल मई-जून में आयोजित किया गया था. सीबीएसई और सीआईएससीई के नतीजे क्रमश: 22 और 24 जुलाई को घोषित किए गए थे. आमतौर पर बोर्ड परीक्षा हर साल फरवरी-मार्च में आयोजित की जाती है और परिणाम मई तक घोषित कर दिए जाते हैं.

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