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Freebies: क्या बीजेपी नहीं बांटती ‘मुफ्त की रेवड़ियां’? रेवड़ी कल्चर और वेलफेयर स्कीम का अंतर समझिए

11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा. वहीं चुनाव आयोग द्वारा हलफनामा नहीं दायर न करने पर शीर्ष अदालत ने फटकार लगाई. शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है. जन कल्याणकारी योजनाएं और ‘मुफ्त की रेवड़ी’ के बीच अंतर किए जाने की जरूरत है.

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खतरनाक है रेवड़ी कल्चर

श्रीलंका के कंगाल होने के बाद देश में इन दिनों राजनीतिक दलों द्वारा बांटी जाने वाली ‘मुफ्त की योजनाओं’ की काफी चर्चा हो रही है. ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त हो गया है. 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा. वहीं चुनाव आयोग द्वारा हलफनामा नहीं दायर न करने पर शीर्ष अदालत ने फटकार लगाई. शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है. जन कल्याणकारी योजनाएं और ‘मुफ्त की रेवड़ी’ के बीच अंतर किए जाने की जरूरत है. अब सवाल ये है कि क्या बीजेपी ‘मुफ्त की रेवड़ियां’ नहीं बांटती है?

इस खबर में ये है खास

  • SC मे 17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
  • बीजेपी नहीं बांटती है 'मुफ्त की रेवड़ियां'?
  • रेवड़ी कल्चर और वेलफेयर स्कीम में अंतर

SC मे 17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

बीजेपी नेता और वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने ‘मुफ्त की रेवड़ी’ के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को इस पर एक नीति तैयार करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि ये गंभीर विषय है. हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से इसका विरोध किया गया है. आप पार्टी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं को मुफ्तखोरी का नाम दिया जा रहा है. कोर्ट अब 17 अगस्त को अगली सुनवाई करेगी.

बीजेपी नहीं बांटती है ‘मुफ्त की रेवड़ियां’?

‘मुफ्त की रेवड़ियां’ बांटने में बीजेपी भी पीछे नहीं है. यूपी चुनाव से पहले जारी बीजेपी का घोषणापत्र देखेंगे तो उससे ये बात बिल्कुल साफ पता चलती है. यूपी चुनाव में बीजेपी ने भी बिजली, गैस सिलेंडर और स्कूटी जैसी चीजें मुफ्त देने का वादा किया है. बीजेपी ने सभी किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बजली, उज्ज्वला योजना के तहत सभी लाभार्थियों को होली-दीपावली पर 2 मुफ्त LPG सिलेंडर देने, 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था करने और कॉलेज जाने वाली मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने का वादा किया था.

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रेवड़ी कल्चर और वेलफेयर स्कीम में अंतर

मुफ्त को रेवड़ियों (freebies) पर बहस तेज हो गई है. विपक्ष और बीजेपी आमने-सामने हैं. रेवड़ी कल्चर पर विवाद बढ़ने पर आदमी पार्टी ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को प्रतिवर्ष दिए जाने वाले 6 हजार रुपये पर भी सवाल उठाए. जिस पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केजरीवाल को फटकार लगाते हुए रेवड़ी कल्चर और वेलफेयर स्कीम के बीच का अंतर समझाया. वित्तमंत्री ने कहा कि हेल्थ और एजुकेशन को कभी भी रेवड़ी नहीं समझा गया. वहीं बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी रेवड़ी मॉडल का मतलब समझाते हुए कहा कि केजरीवाल द्वारा 500 स्कूलों और 20 कॉलेज का वादा करके इनमें से एक भी नहीं बनाया गया. इसे ही रेवड़ी कल्चर कहते हैं.

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