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स्वतंत्रता संग्राम के समय क्या कर रहे थे डॉ. हेडगेवार? देखिए RSS के बारे कितना सच बोलते हैं राहुल गांधी?

RSS पर हमला करते हुए राहुल हमेशा भाषा की सारी मर्यादा को लांघ जाते हैं. संघ पर वे देशद्रोही संगठन तक के आरोप लगा चुके हैं. उनके मुताबिक आजादी की लड़ाई में स्वयंसेवकों की कोई भूमिका नहीं थी. आज हम आपको बताने वाले हैं कि राहुल गांधी की बातों में कितनी सच्चाई है और आजादी की लड़ाई के दौरान RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार क्या कर रहे थे?

Rahul Gandhi on RSS
RSS को लेकर कितना सच बोलते हैं राहुल गांधी?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को आपने अक्सर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर हमला करते देखा-सुना होगा. RSS पर हमला करते हुए राहुल हमेशा भाषा की सारी मर्यादा को लांघ जाते हैं. संघ पर वे देशद्रोही संगठन तक के आरोप लगा चुके हैं. उनके मुताबिक आजादी की लड़ाई में स्वयंसेवकों की कोई भूमिका नहीं थी. आज हम आपको बताने वाले हैं कि राहुल गांधी की बातों में कितनी सच्चाई है और आजादी की लड़ाई के दौरान RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (Dr. KB Hedgewar) क्या कर रहे थे?

इस खबर में ये है खास

  • राहुल ने RSS को बताया देशद्रोही संगठन
  • राहुल के आरोपों में कितनी सच्चाई?
  • आजादी की लड़ाई में कितना योगदान रहा?
  • क्या डॉ. हेडगेवार कभी जेल नहीं गए?
  • आजादी की लड़ाई में स्वयंसेवकों का बलिदान

राहुल ने RSS को बताया देशद्रोही संगठन

राहुल गांधी ने पीएम मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर हमला करते हुए संघ को देशद्रोही संगठन तक कह दिया. राहुल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर घर तिरंगा अभियान चलाने वाले, उस देशद्रोही संगठन से निकले हैं, जिन्होंने 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराया. बता दें कि आजादी के 75 साल पूरे होने पर देशभर में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. इसी कड़ी में पीएम मोदी की ओर से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत की गई है. हालांकि इस पर भी राजनीति जारी है.

राहुल के आरोपों में कितनी सच्चाई?

राहुल गांधी ने संघ पर इस तरह के आरोप पहली बार नहीं लगाए हैं. कांग्रेसी और वामपंथी हमेशा ही ऐसे आरोप लगाते रहते हैं. हालांकि इन आरोपों में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है. गुलाम भारत में निकलने वाले अखबारों में RSS के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की राष्ट्रभक्ति वाले किस्से छाए रहते थे. सन् 1897 में महज 8 साल की उम्र में हेडगेवार ने रानी विक्टोरिया के सम्मान में अंग्रेजों की मिठाई को स्कूल के कूड़ेदान में फेंक दिया था. साल 1907 में महज 18 साल की उम्र में स्कूल में ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगाने पर उन्हें निष्काषित कर दिया गया था.

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आजादी की लड़ाई में कितना योगदान रहा?

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल की तरह डॉ. हेडगेवार भी स्वतंत्रता संग्राम अपना योगदान दे रहे थे. इतना ही नहीं वे कांग्रेस के सदस्य भी रहे हैं. संघ की स्थापना के बाद भी वे आजादी की लड़ाई से जुड़े रहे. कांग्रेस के पूर्ण स्वराज की मांग से वे काफी खुश हुए थे. डॉ. हेडगेवार ने 26 जनवरी 1930 को सभी शाखाओं में भगवा ध्वज फहराने का आदेश दिया और पूर्ण स्वराज दिवस मनाने पर सभी स्वयंसेवकों की ओर से कांग्रेस को धन्यवाद दिया था. इसके अलावा गांधी जी के नमक सत्याग्रह को बिना शर्त पूर्ण समर्थन दिया था. डॉ. हेडगेवार ने अंग्रेजी सरकार के कानून भारतीय वन अधिनियम 1927 का पुरजोर विरोध किया. इसमें जंगलों में घास काटना और पशु चराने पर पाबंदी लगाई गई थी.

क्या डॉ. हेडगेवार कभी जेल नहीं गए?

कांग्रेसियों का कहना रहता है कि कोई संघी आजादी की लड़ाई में जेल नहीं गया. वीर सावरकर का उदाहरण देकर राहुल कहते हैं कि संघियों ने अंग्रेजों से माफी मांगी है. वहीं डॉ. हेडगेवार कई बार जेल गए थे. भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत अंग्रेजों ने बिना लाइसेंस जंगलों में घास काटना और पशु चराने पर पाबंदी लगा दी. इससे किसान परेशान हो गए. इस कानून के खिलाफ हेडगेवार ने ‘जंगल सत्याग्रह’ शुरू किया था. जिसके चलते उन्हें 9 महीने का सश्रम कारावास हुआ था.

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आजादी की लड़ाई में स्वयंसेवकों का बलिदान

कांग्रेसियों और वामपंथियों का कहना है कि अंग्रेजों की गोली से कोई स्वयंसेवक नहीं मरा. हालांकि इसमें बिल्कुल सच्चाई नहीं है. 8 अगस्त, 1942 को गाँधीजी ने ‘अंग्रेजों, भारत छोड़ो’ की घोषणा की. चिमूर में आंदोलन का नेतृत्व संघ अधिकारी दादा नाईक, बाबूराव बेगडे, अण्णाजी सिरास आदि ने किया. इस आन्दोलन में अंग्रेजों की गोली से एकमात्र मृत्यु बालाजी रायपुरकर की हुई जो संघ के स्वयंसेवक थे.

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