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लखीमपुर खीरी हिंसा: बढ़ सकती हैं आशीष मिश्रा की मुश्किलें

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे एवं मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन करेगा.

Ashish Mishra
Ashish Mishra: ANI

नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे एवं मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन करेगा. बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे.

खबर में खास

  • प्रशांत भूषण की दलील
  • मामले की सुनवाई के लिए पीठ का गठन
  • किसानों के परिवारों ने दायर की थी याचिका
  • तीन अक्टूबर को 2021 की घटना

प्रशांत भूषण की दलील
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने किसानों का पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि मुख्य गवाहों में से एक पर हमला किया गया था. भूषण ने कहा कि गवाह पर हमला करने वाले लोगों ने कहा, ‘अब भाजपा जीत गई है,वे उसका ख्याल रखेंगे.’

मामले की सुनवाई के लिए पीठ का गठन
प्रशांत भूषण की दलीलों को सुनने का बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह मामले की सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन करेंगे, जिसने पहले भी इससे जुड़े मामले पर सुनवाई की है. इसके बाद उन्होंने याचिका को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया. बता दें कि प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने इससे पहले इस घटना से मारे गए
लोगों से संबंधित एक मामले की सुनवाई की थी और जांच की निगरानी के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त किया था.

किसानों के परिवारों ने दायर की थी याचिका

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लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए किसानों के परिवारों के तीन सदस्यों ने मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिये जाने को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की थी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 10 फरवरी को मिश्रा को मामले में जमानत दे दी थी. इससे पहले वह चार महीने तक हिरासत में रहे थे.

शीर्ष अदालत ने स्वत: लिया था संज्ञान

अधिवक्ता शिव कुमार त्रिपाठी और सी. एस. पांडा ने हाल में आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की मांग करते हुए एक और याचिका दायर की थी, जिनके पत्र पर शीर्ष अदालत ने घटना का स्वत: संज्ञान लिया था.

तीन अक्टूबर को 2021 की घटना

लखीमपुर खीरी हिंसा तीन अक्टूबर को तब हुई थी जब किसानों का एक समूह उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था. इसी दौरान लखीमपुर खीरी में एक एसयूवी (कार) ने चार किसानों को कथित तौर पर कुचल दिया था. जिससे गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के दो कार्यकर्ताओं और एक चालक को पीट-पीट कर मार डाला था. इस हिंसा में एक स्थानीय पत्रकार की भी मौत हो गई थी. किसान नेताओं ने दावा किया है कि उस वाहन में आशीष मिश्रा थे. जाँच के लिए गठित एसआईटी ने भी आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपी माना था.

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