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Maharashtra: गुजरात से असम ही क्यों गए शिवसेना के बागी विधायक?, ये है बड़ी वजह

अब एकनाथ शिंदे के सामने उद्धव ठाकरे पूरी तरह से घुटने टेक चुके हैं. उद्धव के बाद संजय राउत ने भी कहा कि यदि सभी विधायक चाहते हैं, तो MVA गठबंधन को तोड़ दिया जाएगा. महाराष्ट्र का सियासी पारा सातवें आसमान पर है, तो वहीं शिंदे के साथ 42 विधायक असम में ठंडी-ठंडी हवाओं का आनंद ले रहे हैं.

Shiv Sena Rebel MLAs
(File Photo: ANI)

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सोमवार शाम से शुरू हुआ राजनीतिक ड्रामा अभी भी जारी है. एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की बगावत से उद्धव के नेतृत्व में चल रही महाविकास अघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) गठबंधन की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. वहीं अब शिंदे के सामने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पूरी तरह से घुटने टेक चुके हैं. उद्धव के बाद संजय राउत ने भी कहा कि यदि सभी विधायक चाहते हैं, तो MVA गठबंधन को तोड़ दिया जाएगा. महाराष्ट्र का सियासी पारा सातवें आसमान पर है, तो वहीं शिंदे के साथ 42 विधायक असम में ठंडी-ठंडी हवाओं का आनंद ले रहे हैं. वे वहीं से सत्ता परिवर्तन की पूरी पटकथा लिखने में लगे हैं.

इस खबर में ये है खास

  • शिंदे ने उद्धव को करवा दिया शीर्षासन
  • गुजरात से क्यों हटाए गए बागी विधायक?
  • बागी विधायक असम ही क्यों गए?

शिंदे ने उद्धव को करवा दिया शीर्षासन

21 जून यानी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के दिन ही एकनाथ शिंदे अपने साथ 30 से ज्यादा विधायकों के लेकर गुजरात के सूरत के निकल लिए. इसके बाद 22 जून को देररात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास पर महाविकास अघाड़ी की बैठक बुलाई गई और सभी शिवसेना विधायकों को वर्ली के एक होटल में शिफ्ट कर दिया गया. शिंदे ने उद्धव को शीर्षासन करने पर मजबूर कर दिया है. गुजरात में दो दिन रहने के बाद बुधवार की सुबह शिंदे सभी विधायकों को लेकर असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंच गए. अब सवाल ये है कि शिवसेना के बागी विधायकों को गुजरात से असम क्यों शिफ्ट किया गया है.

गुजरात से क्यों हटाए गए बागी विधायक?

  • सीमावर्ती राज्य- गुजरात से बागी विधायकों को हटाने के कई कारण हैं. सबसे पहला कारण तो ये है कि गुजरात के पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र और राजस्थान हैं. यहां बागी विधायकों तक पहुंच बनाना बड़ा आसान था. शिंदे ग्रुप से दो विधायकों के वापस मुंबई जाने के बाद ही बीजेपी को ये बात समझ में आ गई थी.
  • गहलोत से खतरा- गुजरात का पड़ोसी राज्य राजस्थान है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हमेशा बीजेपी को मात दी है. महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी गठबंधन की सरकार बनाने के लिए यदि गहलोत को जिम्मेदारी दे देती, तो बीजेपी की मुसीबत बढ़ सकती थी.
  • चुनावी राज्य- गुजरात में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. कांग्रेस पार्टी वैसे आने वाले चुनाव में इसे मुद्दा बना सकती थी. बीजेपी पिछले 25 साल से सत्ता में हैं, इसलिए उसके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी भी ज्यादा होगी. ऐसे में बीजेपी कोई खतरा नहीं लेना चाहती है.

बागी विधायक असम ही क्यों गए?

  • भगवामय पूर्वोत्तर- असम में शिवसेना का कोई अस्तित्व नहीं है. कांग्रेस का अस्तित्व भी खत्म हो चुका है. वहीं पूरे पूर्वोत्तर भारत में इस वक्त भगवा लहरा रहा है. यूपी की तरह असम में बीजेपी का झंडा काफी ऊंचा हो चुका है. हिंदुत्व के मुद्दे पर शिवसेना में बगावत करने वाले विधायकों को ठहराने के लिए इससे बेहतर राज्य नहीं मिल सकता था.
  • हेमंत बिस्व सरमा- असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा कभी कांग्रेसी हुआ करते थे, लेकिन बीजेपी ज्वाइन करने के बाद उनका कद काफी बढ़ा है. वे इस समय बीजेपी के फायर ब्रांड नेताओं में शामिल हैं. हिंदुत्व के मुद्दों में वे सीएम योगी को टक्कर देते हैं. बागियों के लिए बीजेपी के पास हेमंत बिस्व सरमा से अच्छा उदाहरण नहीं है.

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