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Mig-21 Crash: पाकिस्तान को हमेशा धूल चटाई, F-16 को मार गिराया, गलती को माफ नहीं करता है ‘मिग-21’

इस लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना में 1960 के दशक की शुरुआत में शामिल किया गया था. यानी वायुसेना में इसको सेवा देते हुए 60 साल से ज्यादा हो चुके हैं. इन 62 सालों में ‘मिग-21’ से करीब 200 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. हालांकि इसके सामने पाकिस्तानी हमेशा दुम दबाकर भागे हैं.

Mig-21 Fighter Jet
'मिग-21' को कहते हैं 'फ्लाइंग कॉफिन' ? (File Photo: ANI)

राजस्‍थान के बाड़मेर में भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान मिग-21 गुरुवार रात को हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में इस लड़ाकू विमान के दोनों पायलटों ने अपनी जान गंवा दी. इस हादसे के बाद एक बार फिर से ‘फ्लाइंग कॉफिन’ के नाम से बदनाम ‘मिग-21’ को रिटायर करने की मांग तेज हो गई है. इस लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना में 1960 के दशक की शुरुआत में शामिल किया गया था. यानी वायुसेना में इसको सेवा देते हुए 60 साल से ज्यादा हो चुके हैं. इन 62 सालों में ‘मिग-21’ से करीब 200 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. हालांकि इसके सामने पाकिस्तानी हमेशा दुम दबाकर भागे हैं.

इस खबर में ये है खास

  • पाक सेना बुलाती है 'जल्लाद'
  • क्यों रिटायर नहीं कर रही वायुसेना
  • F-16 किलर का हासिल किया रुतबा
  • एक जमाने में अमेरिका भी खौफ खाता था

पाक सेना बुलाती है ‘जल्लाद’

किसी जमाने में भारतीय वायुसेना की ताकत रहे मिग-21 लड़ाकू एयरक्राफ्ट को अब कई तरह के अपशब्दों का सामना करना पड़ रहा है. आज हम बताते हैं कि आखिर इस पुराने लड़ाकू जहाज को भारतीय वायुसेना रिटायर क्यों नहीं कर रही है, जबकि दुनिया के अधिकांश देश इससे किनारा कर चुके हैं. दरअसल भारत की सुरक्षा में इस जंगी जहाज ने सीमा पर अपना काम पूरी इमानदारी के साथ निभाया है. जंग के मैदान में मिग-21 के सामने पाकिस्तानी सेना हमेशा दुम दबाकर भागी है. आलम ये है कि पाकिस्तानी सेना इसे आज भी ‘जल्लाद’ कहकर बुलाती है.

क्यों रिटायर नहीं कर रही वायुसेना

पाकिस्तान ने हमसे आजतक जितनी भी जंग लड़ी, सभी में हार का सामना करना पड़ा. 1962 में चीन से मिले धोखे में भारतीय सेना को हार का सामना करना पड़ा था. हमारे सैनिकों का मनोबल टूटा समझ कर 1965 में पाकिस्तान ने युद्ध छेड़ दिया. उसे अंदाजा भी नहीं था कि हार से पनपा गुस्सा भारतीय जवानों के अंदर उबाल मार रहा था. 65 की जंग में हमारे जवानों ने चीन का पूरा गुस्सा पाकिस्तान से निकाल लिया. 1965 की जंग हो या 1971 की या फिर कारगिल युद्ध, ‘मिग-21’ के सामने पाकिस्तानियों को मुंह की खानी पड़ी है. जम्मू-कश्मीर की पहाडियों में ‘मिग-21’ दुश्मन के लिए मौत बनकर सामने आता है.

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F-16 किलर का हासिल किया रुतबा

मिग-21 बाइसन वही लड़ाकू विमान है, जिसके जरिए बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तानी एफ-16 को मार गिराया था. इसके बाद से भारतीय एयरफोर्स इसे F-16 किलर भी कहने लगी है. हालांकि पाकिस्तान की ओर से F-16 के मारे जाने की बात स्वीकार नहीं की गई. इसका सबसे बड़ा कारण है कि F-16 अमेरिका का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है. पाकिस्तानी एयरफोर्स की रीढ़ की हड्डी माना जाता है. लेकिन अभिनंदन के कारनामे से अमेरिका भी चौंक गया था.

एक जमाने में अमेरिका भी खौफ खाता था

1959 में बना मिग-21 अपने समय में सबसे तेज गति से उड़ान भरने वाले पहले सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों में से एक है. इसकी स्पीड के कारण ही तत्कालीन सोवियत संघ के इस लड़ाकू विमान से अमेरिका भी डरता था. यह इकलौता ऐसा विमान है जिसका प्रयोग दुनियाभर के करीब 60 देशों ने किया है. इस लड़ाकू विमान की स्पीड 2229 किलोमीटर प्रति घंटा की है. इसकी रेंज 644 किलोमीटर के आसपास थी, हालांकि भारत का बाइसन अपग्रेडेड वर्जन लगभग 1000 किमी तक उड़ान भर सकता है.

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