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दिल्ली की तीनों नगर निगम 22 मई को होंगे एक, गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना

इस विधेयक पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी के तीनों नगर निगमों के साथ ‘सौतेली मां’ जैसा व्यवहार कर रही है, जिसके कारण इसका एकीकरण जरूरी हो गया है.

दिल्ली की तीनों नगर निगम 22 मई को होंगे एक, गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना

नई दिल्ली. मोदी सरकार ने दिल्ली के तीनों नगर निगम (Delhi MC) को एक करने के लिए अधिसूचना जारी कर दिया है. 22 मई 2022 को दिल्ली की तीनों नगर निगमों का एकीकरण होगा. बुधवार को गृह मंत्रालय (MHA) की एक अधिसूचना में इस बात का उल्लेख किया गया है. इस कदम के साथ, दिल्ली के तीन वर्तमान नगर निगमों को 22 मई से दिल्ली के एक नगर निगम के रूप में माना जाएगा. लोकसभा ने 30 मार्च और राज्य सभा ने 5 अप्रैल को इस विधेयक को मंजूरी दी थी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 18 अप्रैल को इसे अपनी मंजूरी दी थी.

इस खबर में ये है खास-

  • 2011 में Delhi MCD हुई थी अलग
  • AAP ने MCD को एक करने पर किया विरोध
  • अमित शाह का केजरीवाल पर निशाना

2011 में Delhi MCD हुई थी अलग

एक अन्य अधिसूचना में कहा गया, ‘‘दिल्ली नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, 2022 (2022 के 10) की धारा तीन की उप-धारा (एक) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार दिल्ली नगर निगम के गठन के लिए 22 मई 2022 का दिन निर्धारित करती है.’’ दिल्ली नगर निगम को 2011 में तीन भागों में विभाजित किया गया था. उस समय केंद्र में कांग्रेस शासित यूपीए की सरकार थी और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थी.

AAP ने MCD को एक करने पर किया विरोध

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, दिल्ली के तीन नगर निगमों के एकीकरण क उद्देश्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग, समन्वय एवं रणनीतिक योजना सुनिश्चित करना है. आम आदमी पार्टी (आप) समेत कई विपक्षी दलों ने एमसीडी के एकीकरण संबंधी विधेयक का सदन में विरोध किया था. इस विधेयक पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी के तीनों नगर निगमों के साथ ‘सौतेली मां’ जैसा व्यवहार कर रही है, जिसके कारण इसका एकीकरण जरूरी हो गया है.

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अमित शाह का केजरीवाल पर निशाना

उन्होंने कहा था कि यह विधेयक संविधान के तहत प्रदत्त अधिकार के माध्यम से लाया गया है जिसमें कहा गया है कि संसद को दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश से जुड़े किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है. उन्होंने कहा था, ‘‘यह विधेयक किसी भी तरीके से संघीय ढांचे पर हमला नहीं है.’’ शाह ने कहा था कि दिल्ली एक पूर्ण राज्य नहीं, बल्कि एक केंद्रशासित प्रदेश है. संसद के पास दिल्ली के लिए कानून बनाने का अधिकार हैं.

इस कानून में कहा गया है कि निगम में पार्षदों की कुल संख्या और अनुसूचित जाति समुदायों के लिये आरक्षित सीटों की संख्या का निर्धारण निगम के गठन के समय केंद्र सरकार द्वारा किया जायेगा और सीट की संख्या 250 से अधिक नहीं होंगी. विधेयक में कहा गया है, ‘‘निगम की स्थापना के बाद प्रत्येक जनगणना के पूरा होने पर, सीट की संख्या उस जनगणना में निर्धारित दिल्ली की जनसंख्या के आधार पर होगी और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाएगी ….’’

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