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मोदी सरकार के मंत्री को मुश्किल में डाल सकते हैं नीतीश कुमार, खुद का भी कर सकते हैं नुकसान?

बिहार में बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच कुछ दिनों से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. इफ्तार पार्टी के बहाने वहां की राजनीतिक शतरंज की बिसात पर जो शह मात का खेल चल रहा है, उसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है.

Modi-RCP-Nitish
Rajya Sabha Election 2022: नीतीश की चुप्पी, प्रधान का गुपचुप दौरा और आरसीपी का ट्विटर बायो, कहानी राज्यसभा चुनाव की

बिहार में बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच कुछ दिनों से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. इफ्तार पार्टी के बहाने वहां की राजनीतिक शतरंज की बिसात पर जो शह मात का खेल चल रहा है, उसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है. काफी दिनों से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर हमलावर तेजस्वी यादव (Tejashwi Tadav) के सुर बदले हुए हैं और पिछले एक महीनों में दोनों की कई बार मुलाकात भी हुई है. इसके उलट मोदी सरकार में जनता दल यूनाइटेड कोटे से एकमात्र मंत्री आरसीपी सिंह (RCP Singh) की बीजेपी से नजदीकी बढ़ी है. आरसीपी सिंह की बीजेपी से यही नजदीकी उनके लिए खतरा बन सकती है. दरअसल, आरसीपी सिंह राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं और अगर जनता दल यूनाइटेड उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाती है तो उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है. जनता दल यूनाइटेड दो लोगों को राज्यसभा भेज सकती है और एक उम्मीदवार अनिल हेगड़े (Anil Hegde) के नाम का ऐलान हो गया है. दूसरी ओर, आरसीपी सिंह की उम्मीदवार को लेकर पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह और सीएम नीतीश कुमार कुछ भी पत्ते नहीं खोल रहे हैं, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 मई तक ही है. देखना होगा कि अंतिम समय में दोनों मिलकर आरसीपी को उम्मीदवार बनाते हैं या नहीं.

खबर में खास
  • पंडित नेहरू के खिलाफ बोलकर आरसीपी ने जताया इरादा
  • राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर सवालों से बच रहे आरसीपी
  • आरसीपी कहीं बीजेपी का दामन थामने की तैयारी में तो नहीं
  • ऐसे नीतीश कुमार के संपर्क में आए आरसीपी, बन गए खास
  • बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 10 जून को
पंडित नेहरू के खिलाफ बोलकर आरसीपी ने जताया इरादा

जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का मानना है कि आरसीपी सिंह मोदी सरकार में मंत्री रहते बीजेपी के ज्यादा करीब चले गए हैं. पार्टी लाइन से अलग आरसीपी सिंह ने हाल ही देश के पहले पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ बयान भी दिया था. दूसरी ओर, नीतीश कुमार का रुख जवाहर लाल नेहरू के प्रति नरम रहा है और कई बार वे नेहरू की तारीफ भी कर चुके हैं. आरसीपी सिंह ने कहा था कि कांग्रेस संगठन में कम समर्थन होने के बाद भी पंडित नेहरूत को पीएम पद मिला, जो देश की गलती थी. उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के चलते पंडित नेहरू को पीएम पद मिला. जाहिर है नीतीश कुमार को आरसीपी सिंह का बयान पसंद नहीं आया होगा.

राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर सवालों से बच रहे आरसीपी

एक समय था जब आरसीपी सिंह मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हुआ करते थे, लेकिन गुरुवार को जब अनिल हेगड़े बतौर जनता दल यूनाइटेड उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर रहे थे, तब आरसीपी सिंह पटना में नहीं थे. बुधवार को पत्रकारों ने जब उनसे राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया. पत्रकारों ने पूछा कि क्या पार्टी दोबारा उनको राज्यसभा भेज रही है तो उन्होंने कहा कि ये सब कहने की चीज होती है. हमको क्या पता है कि जा रहे हैं या नहीं जा रहे हैं. पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या सीएम से आपकी इस बारे में बात हुई है तो उन्होंने झल्लाते हुए कहा— आपको इससे क्या मतलब? एक और सवाल के जवाब में आरसीपी सिंह ने कहा, आपलोग अपने एजेंडा में सफल नहीं हो पाओगे. नीतीश कुमार से क्या बातचीत हुई, वो क्यों बताएंगे. उनके जवाबों से यह जाहिर हो गया कि वे राज्यसभा उम्मीदवारी के सवालों से बचना चाह रहे हैं.

आरसीपी कहीं बीजेपी का दामन थामने की तैयारी में तो नहीं

अगर नीतीश कुमार और जद यू आरसीपी को उम्मीदवार नहीं बनाती है तो क्या होगा? क्या आरसीपी मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देंगे? क्या आरसीपी बीजेपी के लिए दूसरे सुरेश प्रभु साबित होंगे? फिर बिहार में बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के बीच जो गठबंधन है, उसका क्या होगा? क्या बिहार में बीजेपी और जद यू का गठबंधन टूटेगा? अगर टूटेगा तो फिर क्या होगा? क्या फिर से नीतीश कुमार राजद के साथ मिलकर महागठबंधन बनाएंगे? क्या एनडीए के कुनबे में से एक और दल की एग्जिट होने वाली है? क्या नीतीश कुमार और आरसीपी के संबंधों में दरार डाल चुकी है बीजेपी? ऐसे कई सवाल हैं और आगे भी कई सवाल आएंगे, क्योंकि पटना से लेकर दिल्ली तक हलचल मची है कि आरसीपी जल्द ही जनता दल यूनाइटेड को छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो नीतीश कुमार शायद ही इसे आसानी से पचा पाएं.

ऐसे नीतीश कुमार के संपर्क में आए आरसीपी, बन गए खास

आरसीपी सिंह के राजनीति में आने की कहानी ऐसे शुरू होती है. 1996 में बेनी प्रसाद वर्मा केंद्रीय दूरसंचार मंत्री थे और आरसीपी उनके निजी सचिव हुआ करते थे. बेनी ने ही आरसीपी की मुलाकात नीतीश कुमार से कराई थी. जब नीतीश कुमार वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री बने तो आरसीपी को अपना निजी सचिव बना दिया. दोनों बिहार के नालंदा जिले से और कुर्मी समाज से आते हैं. नीतीश कुमार जब तक केंद्र में मंत्री रहे, आरसीपी का कद बढ़ता रहा. 2005 में नीतीश कुमार बिहार के सीएम बने तो यूपी कैडर के अधिकारी को अपने राज्य में पदस्थापित कराने के लिए पूरी ताकत लगा दी. आरसीपी प्रधान सचिन बनकर पटना चले गए और फिर नीतीश कुमार की ताकत बन गए. शासन में प्रभावी होने के साथ ही वे जनता दल यूनाइटेड में भी ताकतवर होते चले गए. उन्होंने वीआरएस ले लिया और फिर जनता दल यूनाइटेड ज्वाइन कर ली. नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी और राज्यसभा भेजने के साथ पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना दिया.

बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 10 जून को

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं और उसके लिए 10 जून को चुनाव होने वाला है. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 मई रखी गई है. बिहार के जिन नेताओं की राज्यसभा सदस्यता खत्म हो रही है, उनमें आरसीपी सिंह, मीसा भारती, सतीश दूबे, गोपाल नारायण सिंह और शरद यादव शामिल हैं. इनकी सदस्यता 21 जून 2022 से 1 अगस्त 2022 के बीच खत्म हो रही है.

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