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नीतीश कुमार ने कैसे आसान कर दी PM मोदी की राह? 3 प्वाइंट्स में समझिए समीकरण

नीतीश कुमार ने पहली बार बीजेपी से नाता नहीं तोड़ा है. वे इससे पहले 2013 में भी एनडीए से बाहर हो गए थे. उन्होंने उस वक्त भी नरेंद्र मोदी के कारण रिश्ता तोड़ा था. इसके बाद भी बीजेपी ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी.

PM Modi-Nitish Kumar
नीतीश कुमार ने पीएम मोदी की राह आसान कर दी? (File Photo: ANI)

2024 से पहले बिहार के समीकरण एक बार फिर से पूरी तरह से बदल चुके हैं. अभी तक बीजेपी के खेमे में खड़े नीतीश कुमार ने एक बार फिर से पाला बदल लिया है. तेजस्वी के साथ हाथ मिलाकर 8वीं बार सीएम पद की शपथ लेने के बाद नीतीश ने बीजेपी के खिलाफ जमकर शब्दों के बाण चलाए. उन्होंने पीएम मोदी का नाम लिए बिना ही हमला करते हुए कहा कि हम रहें या ना रहें, वो 2024 में नहीं रह जाएंगे. बता दें कि नीतीश कुमार ने पहली बार बीजेपी से नाता नहीं तोड़ा है. वे इससे पहले 2013 में भी एनडीए से बाहर हो गए थे. उन्होंने उस वक्त भी नरेंद्र मोदी के कारण रिश्ता तोड़ा था. इसके बाद भी बीजेपी ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी.

इस खबर में ये है खास

  • अब हम भी विपक्ष में आ गए- नीतीश
  • नीतीश ने मोदी की राह आसान कर दी?
  • बीजेपी को कितना नुकसान हुआ?
  • नीतीश साबित होंगे अगले स्वामी प्रसाद?

अब हम भी विपक्ष में आ गए- नीतीश

महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही नीतीश कुमार ने बीजेपी पर हमला किया. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि विपक्ष खत्म हो जाएगा. हम भी तो विपक्ष में ही आ गए हैं. विपक्षी एकता के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा कि हम आगे सब कुछ करेंगे. हम चाहेंगे कि पूरा विपक्ष एक होकर आगे बढ़े और प्लान तैयार करे. इन लोगों को 2014 में बहुमत मिला था, लेकिन अब तो 2024 आ रहा है.

नीतीश ने मोदी की राह आसान कर दी?

नीतीश के एनडीए छोड़ते ही विपक्ष और मजबूत हो गया है. हालांकि पीएम मोदी की राह अब और आसान हो गई है. दरअसल बीजेपी ने 2024 में भी पीएम मोदी के नेतृत्व में ही चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान किया है. एनडीए में शामिल सभी दलों को बीजेपी के निर्णय को मानना ही पड़ेगा. वहीं विपक्षी खेमे में कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष केसीआर भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं. अब इसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम भी जुड़ गया है.

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‘हम रहें या ना रहें…’, PM मोदी को झुकाने के लिए नीतीश ने अपना सबकुछ दांव पर लगाया, तेजस्वी की लगी लॉटरी

बीजेपी को कितना नुकसान हुआ?

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़कर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है. वे अपना सबकुछ दांव पर लगा चुके हैं. 2020 के चुनाव को देखें तो नीतीश कुमार को हर रैली में जनता के विरोध का सामना करना पड़ा था. नीतीश से ही राजनीति का ककहरा सीखने वाले तेजस्वी यादव ने नीतीश के छक्के छुड़ा दिए थे. आखिरी मौके पर पीएम मोदी ने मैदान नहीं संभाला होता तो NDA की हार तय थीं. पूरे प्रदेश में नीतीश से ज्यादा पीएम मोदी के पोस्टर लगाए गए. 2024 का चुनाव में तो सीधे पीएम मोदी ही मैदान में होंगे.

नीतीश साबित होंगे अगले स्वामी प्रसाद?

महागठबंधन में नीतीश कुमार के शामिल होते ही उनका वोट शेयर 80 फीसदी हो जाता है. वहीं बीजेपी के पास सिर्फ 20 प्रतिशत बचता है. वोट शेयर के हिसाब से ये बहुत बड़ा गैप नजर आएगा. हालांकि ये वोट शेयर उस वक्त हासिल हुआ था, बीजेपी जब जदयू के साथ थी. इस लिहाज से कई सीटें ऐसी होंगी, जहां एक-दूसरे के वोटरों की अदला-बदली हुई होगी. अब यदि वोटबैंक के हिसाब से देखें तो राजद के पास मुस्लिम-यादव कोर वोटर है. तो वहीं भूमिहार और महिला वोटरों पर नीतीश का हक माना जाता है. हालांकि नीतीश का वोटर ही पीएम मोदी का भी कोर वोटर है. इस लिहाज से पीएम मोदी को नीतीश से कोई खास नुकसान नहीं होगा.

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