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राज्यसभा पहुँची उड़नपड़ी, पीएम मोदी ने दी पीटी उषा को बधाई

PT Usha/@rajbhavan_tn

PT Usha nominated for Rajya Sabha:उड़न परी के नाम से मशहूर भारत की स्टार एथलीट पीटी उषा (PT Usha) अब राज्यसभा की सदस्य बन गई हैं. केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पीटी उषा को राज्यसभा के लिए मनोनित किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने पीटी उषा को राज्यसभा का सदस्य मनोनित होने पर बधाई देते हुए ट्वीट किया है और खेलों में उनके योगदान को प्रेरणादायी बताया है. बता दें कि पीटी उषा एक ऐसी खिलाड़ी रही हैं जिन्होंने भारत नें महिलाओं को खेल में आने के लिए प्रोत्साहित किया है. पीटी उषा ने 1984 ओलंपिक खेलों में चौथा स्थान हासिल किया था जिसके बाद से वो पूरे देश में लोकप्रिय हो गईं.

खबर में खास

  • बचपन से ही दौड़ने का शौक
  • कोच नांबियार ने तराशा
  • 16 साल की उम्र में बनी ओलंपिक का हिस्सा
  • सिओल एशियाई खेलों की गोल्डन गर्ल
  • अवार्ड

बचपन से ही दौड़ने का शौक
27 जून 1964 को केरल के पाय्योली में जन्मी पीटी उषा को बचपन से ही दौड़ने का शौक था. पीटी उषा जब चौथी कक्षा में पढ़ती थीं, तब उन्होंने दौड़ना शुरू किया था और चौथी कक्षा में ही अपने जिला चैंपियन को हरा दिया था. उषा का फॉर्मल रुप से बतौर धावक करियर 13 वर्ष की उम्र में शुरु हुआ था जब उन्होंने केरल सरकार द्वारा लड़कियों के लिए शुरू किए गए स्पोर्ट्स डिविजन में हिस्सा लिया था. उषा में दौड़ने का जुनून इतना था कि वे कई बार एक धूल भरे रास्तों या समुद्र के किनारे दौड़ लगाया करती थी.

कोच नांबियार ने तराशा
पीटी उषा को एक सफल एथलिट बनाने में उनके कोच ओएम नांबियार का बड़ा योगदान रहा है. नांबियार से पीटी उषा की मुलाकात राज्य सरकार द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविर हुई थी. नांबियार ने उषा की प्रतिभा को पहचानते हुए बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें प्रशिक्षण देकर एक जबरदस्त एथलीट के रूप में तैयार किया.

16 साल की उम्र में बनी ओलंपिक का हिस्सा

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पीटी उषा सिर्फ 16 साल की उम्र में 1980 में पहली बार मॉस्को ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में शामिल हुई थी. 1984 में वो किसी ओलंपिक खेल के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनी. हालांकि मामूली फासले से उषा ओलंपिक का मेडल जीतने से चूक गई थीं. उषा के अनुसार, ‘मेरा पांव आगे था, लेकिन मैं अपने सीने को आगे नहीं झुका पाने के कारण मेडल नहीं जीत पाई. पीटी उषा का स्थान उस रेस में चौथा रहा था.’

सिओल एशियाई खेलों की गोल्डन गर्ल
1984 ओलपिंक में के बाद पीटी उषा आलोचना का शिकार भी बनी थी लेकिन 1986 के सिओल एशियाई खेलों में उन्होंने 400 मीटर की बाधा दौड़, 400 मीटर की रेस, 200 मीटर और 4 गुणा 400 की रेस में उषा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. इस सफलता के बाद वे पूरे भारत में उड़नपड़ी के नाम से विख्यात हुई. पीटी उषा ने भारत के लिए 103 अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते हैं.
अवार्ड
पीटी उषा को 1983 में अर्जुन अवॉर्ड और 1985 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. उड़नपड़ी ने 1997 में खोलों की दुनिया को अलविदा कहा था.

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