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भारत ने दिखाई लोकतंत्र की वास्तविक तस्वीर, राष्ट्र के नाम संबोधन में बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

उन्होंने कहा, ‘‘हम भारतीयों ने संदेह जताने वाले लोगों को गलत साबित किया. इस मिट्टी में न केवल लोकतंत्र की जड़ें बढ़ीं, बल्कि समृद्ध भी हुईं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास जो कुछ भी है वह हमारी मातृभूमि का दिया हुआ है. इसलिए हमें अपने देश की सुरक्षा, प्रगति और समृद्धि के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर देने का संकल्प लेना चाहिए.’

President Droupadi Murmu
Droupadi Murmu

नई दिल्ली. देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अपना पहला राष्ट्र के नाम संबोधन दिया है. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को 76वें स्वतंत्रता दिवस (75th independence day) की पूर्व संध्या पर देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को हार्दिक बधाई दी. राष्ट्रपति ने 1947 के विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वालों को भी श्रद्धांजलि दी. इस बार देश 14 अगस्त को विभाजन भयावह स्मरण दिवस मना रहा है. जिसकी घोषणा पिछले साल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि भारत ने दुनिया को लोकतंत्र की वास्तविक क्षमता का पता लगाने में मदद की है.

इस खबर में ये है खास-

  • देशवासियों को मुर्मू ने दी बधाई
  • भारतीयों ने संदेह जताने वाले गलत साबित किया
  • द्रौपदी मुर्मू ने पहली बार किया राष्ट्र को संबोधित

देशवासियों को मुर्मू ने दी बधाई

राष्ट्रपति ने कहा कि कहा कि देश में आज संवेदनशीलता एवं करुणा के जीवन-मूल्यों को प्रमुखता दी जा रही है और इन जीवन-मूल्यों का मुख्य उद्देश्य वंचित, जरूरतमंद तथा समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों के कल्याण के वास्ते कार्य करना है. भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में 75 वर्ष पूरे कर रहा है. राष्ट्रपति मुर्मू ने संबोधन में कहा कि 76वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को मेरी हार्दिक बधाई. मुझे इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपको संबोधित करते हुए खुशी हो रही है.

भारतीयों ने संदेह जताने वाले गलत साबित किया

प्रेसिडेंट मुर्मू ने कहा कि जब भारत को स्वतंत्रता मिली, तो दुनिया के कई नेता और विशेषज्ञ थे, जिन्हें उस समय गरीबी और निरक्षरता के कारण भारत में सरकार के लोकतांत्रिक स्वरूप की सफलता के बारे में संशय था. उन्होंने कहा, ‘‘हम भारतीयों ने संदेह जताने वाले लोगों को गलत साबित किया. इस मिट्टी में न केवल लोकतंत्र की जड़ें बढ़ीं, बल्कि समृद्ध भी हुईं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास जो कुछ भी है वह हमारी मातृभूमि का दिया हुआ है. इसलिए हमें अपने देश की सुरक्षा, प्रगति और समृद्धि के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर देने का संकल्प लेना चाहिए.’

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द्रौपदी मुर्मू ने पहली बार किया राष्ट्र को संबोधित

मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि जैसा कि हम सभी उस की वर्षगांठ मनाते हैं, आज हम उन सभी पुरुषों और महिलाओं को नमन करते हैं जिन्होंने हमारे लिए एक स्वतंत्र भारत में रहना संभव बनाने के लिए भारी बलिदान दिया. राष्ट्रपति भवन के एक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू 76वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को राष्ट्र के नाम अपना पहला संबोधन दिया है. ओडिशा की रहने वाली 64 वर्षीय मुर्मू ने 25 जुलाई को 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. वह शीर्ष संवैधानिक पद संभालने वाली सबसे कम उम्र की और पहली आदिवासी हैं. वह आजादी के बाद पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति हैं.

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