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Raksha Bandhan 2022: Sawan के आखिरी जानें कब है रक्षाबंधन और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त में भले ही राखी न भी बांध पाएं लेकिन इस दिन एक ऐसा मुहूर्त भी आता है जब राखी नहीं बांधनी चाहिए और इस समय को कहते हैं भद्राकाल

Raksha Bandhan
भाई रक्षाबंधन पर बहनों को दे सकते हैं ये प्यार भरा तोहफा (PTI)

14 जुलाई से सावन महीना शुरू हो रहा है और इसके साथ ही शुरू हो जाएगा 4 महीने तक चलने वाले ढेर सारे व्रत और त्‍योहार का सिलसिला….और  सबसे पहले आएगा भाई-बहन के पवित्र रिश्‍ते को मजबूत करने वाला हिंदू धर्म का बेहद महत्वपूर्ण त्योहार रक्षाबंधन। इस दिन बहनें अपने भाई को राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. वहीं भाई अपनी बहन को रक्षा  का वचन देते हैं। तो चलिए बताते हैं इस साल रक्षाबंधन का ये पावन त्योहार कब है।  रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और इस साल ये तिथि 11 अगस्‍त को पड़ रही है। शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि गुरुवार, 11 अगस्त को सुबह 10:38 पर प्रारंभ होगी और शुक्रवार, 12 अगस्त को सुबह 07:05 मिनट पर समाप्त होगी और उदयातिथि में त्योहार मनाने के नियमानुसार, रक्षाबंधन का पर्व 11 अगस्त के दिन मनाया जाएगा.  

रक्षाबंधन पर बहने अपने भाई को राखी बांधने के लिए जितनी उत्साहित होती है उतना ही उन्हें इंतजार होता है राखी बांधने के शुभ मुहूर्त का… माना जाता है कि रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त में भाई को राखी बांधने से बहन और भाई दोनों को शुभ फल मिलते हैं। तो आइए बताते हैं राखी बांधने का शुभ मुहूर्त। 

रक्षा बंधन पर अबूझ मुहूर्त को ध्यान में रखकर राखी बांधना शुभ माना जाता है. इस बार राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 09 बजकर 28 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. इस दिन सुबह 05 बजकर 48 मिनट से 06 बजकर 53 मिनट तक रवि योग रहेगा. जबकि शाम 06 बजकर 55 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक अमृत योग रहेगा. 

ये तो रही बात राखी बांधने के शुभ मुहूर्त की लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त में भले ही राखी न भी बांध पाएं लेकिन इस दिन एक ऐसा मुहूर्त भी आता है जब राखी नहीं बांधनी चाहिए और इस समय को कहते हैं भद्राकाल… शास्त्रों के मुताबिक, भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए. ऐसा क्यों हैं आइए आपको बताते हैं।  

भद्राकाल में क्‍यों नहीं बांधते राखी?  

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भद्राकाल में राखी ना बांधने के पीछे एक पौराणिक कहानी है। कहा जाता है कि लंकापति रावण को उसकी बहन ने भद्राकाल में ही राखी बांधी थी और रावण का प्रभु श्रीराम के हाथों वध हुआ था. इसके अलावा ये भी मान्‍यता है कि भद्राकाल में शिव जी तांडव करते हैं. इन दोनों कारणों से भद्राकाल में राखी बांधने या अन्‍य कोई शुभ काम करने की मनाही होती है.इस साल भद्रा काल शाम 05:17 से रात 08:00 बजे तक रहेगा. 

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