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पैंगोंग में चीन के दूसरे पुल पर विदेश मंत्रालय ने कहा, ये 60 साल से चीन के अवैध कब्जे में है

अरिंदम बागची (फाइल फोटो): ANI

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास चीन के दूसरा पुल बनाने की खबरें आने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा, जिस स्थान पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह क्षेत्र दशकों से उस देश के कब्जे में है और भारत ऐसे घटनाक्रम पर नज़र रखता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा मार्च में की गई टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें केन्द्रीय मंत्री ने कहा था कि अप्रैल 2020 से चीन की तैनाती के बाद से पैदा तनाव और संघर्ष सामान्य संबंधों के माध्यम से दूर नहीं हो सकता है.

खबर में खास

  • इन घटनाक्रमों पर नजर रखते हैं
  • 60 साल से चीन के अवैध कब्जे में
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा

इन घटनाक्रमों पर नजर रखते हैं

बागची ने कहा, हमने पुल से जुड़ी खबरें देखी हैं. यह सेना से जुड़ा मुद्दा है… हम इसे (चीन के) कब्जे वाला क्षेत्र मानते हैं. रक्षा मंत्रालय इस संबंध में विस्तार से टिप्पणी कर सकेगा. उन्होंने कहा, जिस क्षेत्र की बात हो रही है… हमें हमेशा लगा कि वह (चीन के) कब्जे वाला क्षेत्र है और हमें दशकों से (उसके वापस मिलने) की आशा है. उन्होंने कहा, हम इन घटनाक्रमों पर नजर रखते हैं.

60 साल से चीन के अवैध कब्जे में

बागची ने कहा कि अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्षेत्र में दूसरे पुल का निर्माण किया जा रहा है या फिर पहले पुल में ही विस्तार किया जा रहा है. जनवरी में जब चीन द्वारा पैंगोंग सो क्षेत्र में पहले पुल के निर्माण की खबर आयी थी तो विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह क्षेत्र पिछले 60 साल से चीन के अवैध कब्जे में है. उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों और सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, नया पुल दूसरे पुल के सामने बनाया जा रहा है.

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प्रवक्ता ने बताया कि जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मार्च में उनकी नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस सैन्य गतिरोध पर भारत के रुख से अवगत कराया था. उन्होंने कहा, आपको भी पता है कि विदेश मंत्री वांग यी इस साल मार्च में यहां आए थे और विदेश मंत्री ने उन्हें हमारी आकांक्षाओं से अवगत कराया था. बागची ने कहा कि भारत ने चीनी पक्ष के साथ राजनयिक एवं सैन्य स्तर पर कई दौर की वार्ता की है और आगे भी यह जारी रहेगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री जयशंकर ने बाद में मीडिया से कहा था कि अप्रैल 2020 में चीनी पक्ष द्वारा तैनाती के कारण उत्पन्न तनाव एवं संघर्ष के बीच दोनों देशों में सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो सकती. बागची ने कहा, इसलिए हम चीनी पक्ष के साथ राजनयिक एवं सैन्य स्तर पर संवाद जारी रखेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोनों मंत्रियों के निर्देशों का पूरी तरह से अनुपालन हो.

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