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“चुनाव आयुक्त की नियुक्ति बिजली की गति से हुई,” जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की ऐसी टिप्पणी

अरूण गोयल ने 18 नवंबर को अपनी पिछली पोस्टिंग से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और 19 नवंबर को उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया और 21 नवंबर को कार्यभार संभाला. शीर्ष अदालत ने 1985 बैच के आईएएस अधिकारी गोयल को एक ही दिन में नियुक्त करने पर केंद्र सरकार से सवाल किया.

Supreme Court
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को पूर्व आईएएस अधिकारी अरुण गोयल (EC Arun Goel) की नए चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति पर प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया है. कोर्ट ने केंद्र से सवाल करते हुए कहा कि प्रक्रिया 24 घंटे के भीतर पूरी की गई थी. जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने चुनाव आयुक्त के रूप में गोयल की नियुक्ति पर केंद्र द्वारा लाई गई मूल फाइलों का अवलोकन किया. कोर्ट ने सवाल पूछा कि प्रक्रिया को इस तरीके से शुरू करने के लिए सरकार पर क्या दबाव था? जस्टिस जोसेफ ने अटॉर्नी जनरल (AG) से कहा, “18 नवंबर को… हमें अरुण गोयल की नियुक्ति की फाइल उस दिन मिली.

इस खबर में ये है खास-

  • नियुक्ति प्रक्रिया पर SC ने उठाए सवाल
  • अरूण गोयल चुनाव आयुक्त नियुक्ति
  • SC ने केंद्र से नियुक्ति पर पूछा सवाल
  • चुनाव आयोग को यस मैन नहीं होना चाहिए

नियुक्ति प्रक्रिया पर SC ने उठाए सवाल

पीठ ने कहा, “उसी दिन की प्रक्रिया, उसी दिन आवेदन, उसी दिन स्वीकृति और उसी दिन नियुक्ति. फाइल 24 घंटे तक नहीं चली जैसे कि बिजली की गति है. यह किस तरह का मूल्यांकन है? सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह अरुण गोयल की नियुक्त प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है. कल, पीठ ने केंद्र से नए चुनाव आयुक्त के रूप में गोयल (Arun Goel) की नियुक्ति से संबंधित फाइल पेश करने को कहा. इस बीच, शीर्ष अदालत ने चुनाव आयुक्तों (EC) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली की मांग करने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

अरूण गोयल चुनाव आयुक्त नियुक्ति

अरूण गोयल ने 18 नवंबर को अपनी पिछली पोस्टिंग से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और 19 नवंबर को उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया और 21 नवंबर को कार्यभार संभाला. शीर्ष अदालत ने 1985 बैच के आईएएस अधिकारी गोयल को एक ही दिन में नियुक्त करने पर केंद्र सरकार से सवाल किया. जस्टिस अजय रस्तोगी ने पूछा, “आपके पहले पन्ने के मुताबिक यह वैकेंसी 15 मई से थी. क्या आप हमें दिखा सकते हैं कि मई से नवंबर तक ऐसा क्या था जो सरकार पर भारी पड़ा कि नवंबर में सब कुछ सुपरफास्ट किया जाए.”

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SC ने केंद्र से नियुक्ति पर पूछा सवाल

शीर्ष अदालत ने 1985 बैच के आईएएस अधिकारी गोयल को एक ही दिन में नियुक्त करने पर केंद्र सरकार से सवाल किया. जस्टिस अजय रस्तोगी ने पूछा, “आपके पहले पन्ने के मुताबिक यह वैकेंसी 15 मई से थी. क्या आप हमें दिखा सकते हैं कि मई से नवंबर तक ऐसा क्या था जो सरकार पर भारी पड़ा कि नवंबर में सब कुछ सुपरफास्ट किया जाए.” फाइल पर गौर करते हुए शीर्ष अदालत ने पूछा कि कानून और न्याय मंत्रालय ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए चार नामों को कैसे शॉर्टलिस्ट किया. शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र को ऐसे लोगों को चुनना होगा जिन्हें चुनाव आयुक्त के रूप में छह साल मिलना चाहिए.

चुनाव आयोग को यस मैन नहीं होना चाहिए

चुनाव आयोग अधिनियम, 1991 के तहत एक चुनाव आयुक्त का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, हो सकता है. कल सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग को सरकार का “यस मैन” नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा होना चाहिए, जो स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकता है.” पिछली सुनवाई में पीठ ने “निष्पक्ष और पारदर्शी तंत्र” पर जोर दिया था ताकि सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को सीईसी के रूप में नियुक्त किया जा सके. शीर्ष अदालत सीईसी और ईसी की वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी और तर्क दिया कि नियुक्तियां कार्यपालिका की सनक और कल्पना के अनुसार की जा रही हैं,

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