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देशभर के कांग्रेसियों में मची है बीजेपी में जाने की होड़, बंगाल में बीजेपी नेता जा रहे टीएमसी की ओर

कांग्रेस कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं है. लिहाजा ममता बनर्जी जरूर इसका बदला ले रही हैं.

Modi-Mamta
देशभर के कांग्रेसियों में मची है बीजेपी में जाने की होड़, बंगाल में बीजेपी नेता जा रहे टीएमसी की ओर

आए दिन कांग्रेस (Congress) का कोई न कोई बड़ा नेता बीजेपी (BJP) में शामिल हो रहा है. यह सिलसिला 2014 के बाद से जारी है और ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के बीजेपी में जाने के बाद इसमें तेजी आई है. 2014 के बाद से बीजेपी के 2 बड़े नेता शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughna Sinha), कीर्ति आजाद (Kirti Azad) और नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) बीजेपी में शामिल हुए, लेकिन कांग्रेस से बीजेपी में जाने वालों की संख्या इससे कई गुना अधिक है. कांग्रेस कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं है. लिहाजा ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) जरूर इसका बदला ले रही हैं. पिछले साल विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2021) जीतने के बाद से ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी (West Bengal BJP) को झकझोरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. जैसे कांग्रेस का कोई न कोई नेता बीजेपी में जाने को तैयार रहता है, यही हाल पश्चिम बंगाल में है. वहां भी बीजेपी का कोई न कोई नेता टीएमसी में जाने को तैयार बैठा रहता है. हाल में सांसद अर्जुन सिंह ने टीएमसी का दामन थामा है. आलम यह है कि पिछले 11 महीनों में 5 बड़े नेताओं ने बीजेपी को छोड़कर टीएमसी ज्वाइन कर ली है. यही नहीं बीजेपी के विधायकों की संख्या 77 से घटकर 70 तक रह गई है.

खबर में खास
  • ममता की नजर 2024 पर, लोकप्रिय नेताओं पर डाल रहीं डोरे
  • बीजेपी से कौन कौन नेता तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का हुआ था उभार
  • राज्य नेतृत्व में बदलाव के बाद बीजेपी में तेज हुई आंतरिक कलह
  • बंगाल में लगातार घटती जा रही है बीजेपी विधायकों की संख्या
ममता की नजर 2024 पर, लोकप्रिय नेताओं पर डाल रहीं डोरे

विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की नजर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों पर है. ममता बनर्जी लोकसभा चुनाव में किसी भी कीमत पर बीजेपी को बढ़त हासिल करते नहीं देखना चाहतीं. लिहाजा बीजेपी के जनाधार वाले नेताओं पर वह लगातार डोरे डाल रही हैं और समय आने पर अपनी पार्टी में शामिल करा रही हैं. ममता बनर्जी जानती हैं 2024 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की कुर्सी हिलाना आसान नहीं है और इसी लिहाज से वह पश्चिम बंगाल में बीजेपी की खाई खोदने में लगी हुई हैं. इसके अलावा वह अपनी जमीन मजबूत कर केंद्र की सत्ता के लिए खुद को तैयार करने में भी जुटी हुई हैं.

बीजेपी से कौन कौन नेता तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए

सबसे पहले पिछले साल जून में मुकुल रॉय ने बीजेपी छोड़ी. उनके बाद राजीव बनर्जी, बाबुल सुप्रियो, विश्वजीत दास जैसे नेताओं ने भी बीजेपी को अलविदा कह दिया. अब इस कड़ी में सांसद अर्जुन सिंह का नाम भी जुड़ गया है. वे चार बार के विधायक हैं और अभी बैरकपुर से सांसद हैं. 2019 में वे बीजेपी में शामिल हुए थे और दिनेश त्रिवेदी जैसे दिग्गज नेता को हराकर सांसद बने थे. 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले दिनेश त्रिवेदी बीजेपी में शामिल हो गए थे. इस तरह बैरकपुर में तृणमूल कांग्रेस के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं था, जो पार्टी को बूस्ट कर सके. इन पांच नेताओं के जनाधार को देखते ही ममता बनर्जी ने बिना लाग लपेट के इनकी घरवापसी कराई.

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का हुआ था उभार

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पश्चिम बंगाल में बड़ी कामयाबी हासिल हुई थी और पार्टी ने 18 सीटें जीती थीं, जबकि 2014 में बीजेपी को बंगाल में केवल 2 सीटें हासिल हुई थीं. जानकार मानते हैं कि ममता बनर्जी पूरे देश में खुद को तभी स्थापित कर पाएंगी, जब बंगाल में उनकी सत्ता सुरक्षित होगी. इसलिए पहले से मजबूत अपनी पार्टी को वे और अधिक मजबूत करने पर फोकस कर रही हैं. ममता बनर्जी का फोकस धूमधड़ाके से अलग हटकर रणनीति के तहत नरेंद्र मोदी का विकल्प बनने को लेकर है, ताकि 2024 में वे अपनी स्वीकार्यता बढ़ा सकें. ममता बनर्जी बंगाल की सभी सीटों पर क्लीन स्वीप की तैयारी में जुटी हुई हैं, ताकि विपक्ष में सबसे बड़े दल के नेता की मान्यता भी उन्हें मिले.

राज्य नेतृत्व में बदलाव के बाद बीजेपी में तेज हुई आंतरिक कलह

पश्चिम बंगाल बीजेपी में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है. इसी असंतोष को थामने के लिए पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया था. उनके दौरे के समय ही एक बीजेपी कार्यकर्ता पर हमला हुआ था. हाल ही में मुर्शिदाबाद के विधायक गौरशंकर घोष ने पार्टी छोड़ दी थी. विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी ने राज्य ईकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष को हटाकर सुकांत मजूमदार को कमान सौंपी थी लेकिन उसके बाद से पार्टी में आंतरिक कलह और विधायकों का दलबदल तेज हो गया है.

बंगाल में लगातार घटती जा रही है बीजेपी विधायकों की संख्या

विधानसभा चुनावों के बाद बंगाल में जो भी चुनाव हुए हैं, उसमें बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. यही कारण है कि विधानसभा में बीजेपी के 77 विधायक पहुंचे थे लेकिन अब उनकी संख्या घटकर 70 हो गई है. बीजेपी जहां नेताओं के बीच संतुलन नहीं बना पा रही है, वहीं ममता बनर्जी एक कदम आगे जाकर बीजेपी नेताओं को तोड़ने में कोई हिचक नहीं दिखा रही हैं. फिलहाल ममता बनर्जी अपनी रणनीति में कामयाब दिख रही हैं. बीजेपी के चाणक्य यानी अमित शाह ने जल्द ही कोई करिश्मा नहीं दिखाया तो लोकसभा चुनाव 2024 में बंगाल से उसे निराशा हाथ लग सकती है.

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