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राष्ट्रपति बनने से चूके वेंकैया नायडू लेकिन दोबारा उपराष्ट्रपति पद पर हो सकते हैं आसीन

माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को उनके पद पर रिटेन किया जा सकता है और उपराष्ट्रपति पद के लिए शायद ही बीजेपी किसी दूसरे नाम पर विचार करे.

M. Venkaiah Naidu
राष्ट्रपति बनने से चूके वेंकैया नायडू लेकिन दोबारा उपराष्ट्रपति पद पर हो सकते हैं आसीन (ANI)

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मिले थे, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें शुरू हो गई थीं. हालांकि उसी दिन देर रात बीजेपी ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था. लेकिन अब माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को उनके पद पर रिटेन किया जा सकता है और उपराष्ट्रपति पद के लिए शायद ही बीजेपी किसी दूसरे नाम पर विचार करे. यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से इसी सिलसिले में मुलाकात की थी.

खबर में खास
  • पूरब से राष्ट्रपति तो दक्षिण से हो सकते हैं उपराष्ट्रपति
  • कर्नाटक छोड़ और कहीं पैर नहीं जमा पाई है बीजेपी
  • तेलुगु प्राइड के नाम पर मिल सकता है व्यापक समर्थन
पूरब से राष्ट्रपति तो दक्षिण से हो सकते हैं उपराष्ट्रपति

वेंकैया नायडू के पक्ष में तर्क यह दिया जा रहा है कि राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार इस बार पूरब से बनाई गई हैं. द्रौपदी मुर्मू दरअसल ओडिशा से आती हैं, जो देश का पूर्वी इलाका है. इसलिए अब दक्षिण से उपराष्ट्रपति होने की बात कही जा रही है. वेंकैया नायडू के पक्ष में यह बात सटीक बैठती है. वह दक्षिण भारत से आते हैं और उपराष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल भी शानदार रहा है. राज्यसभा के सभापति के रूप में भी उनकी छवि एकदम कड़क प्रशासक के रूप में उभरकर सामने आई है. कई बार उन्होंने हंगामा करने वाले सांसदों को दंडित भी किया है. और सबसे बड़ी बात यह कि तेलुगु प्राइड के नाम पर दक्षिण भारत के अधिकांश दलों का समर्थन भी उन्हें हासिल हो जाएगा. एक बात और कि उनकी अभी रिटायर होने की भी उम्र नहीं है.

कर्नाटक छोड़ और कहीं पैर नहीं जमा पाई है बीजेपी

दक्षिण भारत से दोबारा उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी साउथ की सियासत को नया संदेश देना चाहती है. दरअसल, आज भी कर्नाटक के अलावा और किसी दक्षिण भारतीय राज्य में अब तक कमल नहीं खिल पाया है. वहीं हाल के दिनों में बीजेपी के लिए आंध्र प्रदेश ओर तेलंगाना में संभावनाएं जगी हैं, लेकिन तमिलनाडु और केरल में पार्टी अब भी संघर्ष ही कर रही है. बीजेपी वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति बनाकर दक्षिण भारतीय लोगों में खुद के प्रति विश्वास बहाल करना चाहती है.

तेलुगु प्राइड के नाम पर मिल सकता है व्यापक समर्थन

तेलुगु प्राइड के नाम पर वेंकैया नायडू को आंध्र प्रदेश में जगनमोहन की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस, के. चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति और तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का समर्थन हासिल हो सकता है. हालांकि उपराष्ट्रपति पद के ​चुनाव के लिए एनडीए के पास पर्याप्त बहुमत है लेकिन अपने उम्मीदवार को ज्यादा से ज्यादा मतों से जिताकर बीजेपी विरोधी दलों के खिलाफ मानसिक बढ़त हासिल करना चाहती है. उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के प्रतिनिधि ही मतदान करते हैं और संसद में बीजेपी के पास पर्याप्त बहुमत है.

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