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Nikhat Zareen: मोदी-योगी से लेकर कोहली तक हर कोई हुआ मुरीद, जानें निकहत जरीन की कहानी

Nikhat Zareen/ @KKRiders (twitter)

Nikhat Zareen: भारतीय मुक्केबाज निकहत जरीन ने तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप के फाइनल में 52 किग्रा वर्ग में थाईलैंड की खिलाड़ी जिटपॉन्ग जुटामास को 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीता है. निकहत जरीन अब बॉक्सिंग की नई विश्व चैंपियन है. जरीन भारत की पाँचवी खिलाड़ी हैं जिसने बॉक्सिंग में विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है. जरीन से पूर्व मैरीकॉम, सरिता देवी, जेनी आर एल और लेखा केसी भी यह कारनामा कर चुकी हैं. विश्व चैंपियन बनने के बाद जरीन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने उन्हें बधाई देते हुए भारत का गर्व बताया है. विश्व चैंपियन बनने के बाद निकहत रातों रात भारत में स्टार बनने के साथ साथ करोड़ों युवाओं जो किसी न किसी कारण से अपने सपनों को पूरा करने में असमर्थ हो जाते हैं उनके लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं क्योंकि निकहत के विश्व चैंपियन बनने के पीछे एक लंबा संघर्ष रहा है जिसमें उन्होंने उपेक्षा, बंदीशे, मेहनत और अभाव सबका सामना किया है.

खबर में खास

  • पिता के सपने को पूरा किया
  • रुढ़िवादिता को पंच
  • तीन साल पहले हुई थी ट्रोल

पिता के सपने को पूरा किया
25 वर्षीय निकहत जरीन तेलंगाना के निजामाबाद से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता मोहम्मद जमील एक फुटबॉल और क्रिकेट खिलाड़ी रहे हैं. मोहम्मद जमील की चार बेटियां हैं इसलिए उनकी इच्छा थी कि उनकी कोई एक बेटी खेल की दुनिया में नाम करे और इसके लिए उन्होंने निकहत को चुना. निकहत ने शुरुआत तो एथलेटिक्स से की थी लेकिन 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने बॉक्सिंग रिंग में कदम रखा और उसके बाद से वे बॉक्सिंग की दुनिया में नित नए कीर्तिमान स्थापित करती रहीं है. बता दें कि जरीन पूर्व जूनियर यूथ वर्ल्ड चैंपियन भी रह चुकी हैं.

रुढ़िवादिता को पंच

निकहत के पिता मोहम्मद जमील का कहना है कि निकहत ने अपने लिए बॉक्सिंग चुनी जिसमें हमने उसे पूरा समर्थन दिया और अपने स्तर से सारी सुविधा उपलब्ध कराई लेकिन निकहत की सफलता में उसकी अपनी दृढ़ इच्छा और कड़ी मेहनत का बहुत बड़ा योगदान रहा है. मोहम्मद जमील का कहना था कि एक वक्त था जब हमारे रिश्तेदार निकहत के बॉक्सिंग करने के खिलाफ थे. उनका कहना था कि बॉक्सिंग में उसे छोटे कपड़े पहनने पड़ेंगे जो सामाजिक रुप से ठीक नहीं है लिकन हमने किसी की बात नहीं सुनी और आज निकहत ने अपने पंच से न सिर्फ गोल्ड मेडल जीता है बल्कि समाज की तमाम रुढि़वादी सोंच के भी तोड़ते हुए नए लड़के लड़कियों को बाधाओं के बावजूद अपनी मंजिल से पीछे न हटने की राह दिखाई है. निकहत की माँ ने अपनी बेटी के ओलंपिक पदक जीतने की उम्मीद भी जताई है. बता दें कि निकहत की दो बड़ी बहने डॉक्टर हैं जबकि छोटी बहन बैंडमिंटन खिलाड़ी है.

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तीन साल पहले हुई थी ट्रोल

निकहत जरीन ने तीन साल पहले तत्कालिन खेल मंत्री किरोन रिजीजू को पत्र लिखकर चयन में पारदर्शिता बरतने की अपील की थी जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया था उस समय विश्व चैंपियन मुक्केबाज मैरिकॉम ने भी पहचानने से इनकार कर दिया था लेकिन अब कहानी बदल चुकी है. निकहत जरीन विश्व चैंपियन है और उन्होंने अपने पंच से न सिर्फ अपने विरोधियों को खामोश किया है बल्कि यह भी साबित किया है भारत जैसे देश में जहाँ आज भी रुढ़िवादिता लगभग हर धर्म में हावी है उसे त्याग कर अगर लड़कियों को उनके सपनों को पूरा करने का मौका दिया जाए तो वे भी भारत का झंड़ा पूरे विश्व में लहराने में पूरी तरह सक्षम हैं.

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