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आजम खान ने कहा कुछ नहीं, लेकिन जब कहेंगे तो सपा के लिए आ जाएगी कयामत!

आजम खान (Azam Khan) जेल से निकले और शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने उनका वेलकम किया. यह काम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) भी कर सकते थे लेकिन उन्होंने नहीं किया.

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आजम खान ने कहा कुछ भी नहीं, लेकिन जब कहेंगे तो सपा के लिए आ जाएगी कयामत! (PTI)

आजम खान (Azam Khan) जेल से निकले और शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने उनका वेलकम किया. यह काम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) भी कर सकते थे लेकिन उन्होंने नहीं किया. हालांकि एक ट्वीट कर अखिलेश यादव ने आजम खान की रिहाई का स्वागत किया लेकिन इसमें वो बात कहां. खैर, सीतापुर जेल से बाहर निकले आजम खान के कंधे पर शिवपाल सिंह यादव का हाथ कैमरों की नजरों में कैद हो गया और कैद हो गई समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की आजम खान के प्रति बेकदरी भी, क्योंकि पार्टी का कोई बड़ा नेता आजम खान के स्वागत को नहीं पहुंचा था. पहले से ही टीस में जल रहे आजम खान को यह बात शूल जैसा चूभा होगा. हालांकि उन्होंने कहा कुछ भी नहीं और जल्दी कहेंगे भी नहीं लेकिन जब कहेंगे तो सपा और उत्तर प्रदेश की राजनीति में कयामत आ जाएगी, इतना तय है. रही सही कसर शिवपाल सिंह यादव के साथ मंत्रणा में तय हो जाएगी.

खबर में खास
  • अखिलेश यादव क्यों नही आए, उन्हीं से पूछिए
  • शनिवार को विधायकों की बैठक, क्या करेंगे आजम
  • सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नाराज हैं आजम खान
  • अखिलेश के लिए आजम को जोड़े रखने की चुनौती
  • आजम के लिए हाथ-पांव मार रहे कांग्रेस-बसपा
अखिलेश यादव क्यों नही आए, उन्हीं से पूछिए

यूपी चुनाव खत्म होने के बाद भी प्रदेश का राजनीतिक पारा शिवपाल सिंह यादव और आजम खान ने गरमा रखा है. अब चूंकि आजम खान जेल से बाहर निकल आए हैं तो देखना यह है कि वे सपा के साथ सियासी पारी जारी रखते हैं या फिर नई राजनीतिक सफर पर निकल जाएंगे. आजम खान के जेल से बाहर निकलने के बाद शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि हम समाजवादी लोग हैं और सुख दुख में साथ रहना और कोई साथी संकट में हैं तो उसका साथ निभाना अच्छी तरह जानते हैं. जब उनसे पूछा गया कि आजम खान को रिसीव करने अखिलेश यादव क्यों नहीं आए तो शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि यह आप उन्हीं से पूछिए. उन्होंने कहा कि आजम भाई हमारे साथी हैं. हमारी आज भी बात हुई और आगे भी होती रहेगी.

शनिवार को विधायकों की बैठक, क्या करेंगे आजम

आजम खान के जेल से बाहर आने के बाद लखनऊ से लेकर रामपुर समेत पूरे प्रदेश में एक ही कयासबाजी चल रही है कि अब आजम क्या करेंगे. शनिवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के विधानमंडल दल की बैठक है तो सभी की नजरें अब कल की बैठक पर टिक गई हैं. अखिलेश यादव ने पार्टी के सभी विधायकों और एमएलसी को बैठक में बुलाया है. बैठक में बजट सत्र में सरकार को घेरने के लिए रणनीति बनाई जानी है. यह देखना दिलचस्प होगा कि आजम खान और अब्दुल्ला आजम सपा विधानमंडल दल की बैठक में जाते हैं या नहीं. और अगर जाते भी हैं तो वहां इनका क्या रुख होगा. उसके बाद सारी तस्वीर क्लीयर हो जाएगी.

अखिलेश यादव से नाराज हैं आजम खान

आजम खान सपा और अखिलेश यादव से बहुत नाराज हैं. इस बात का अंदाजा तभी चल गया था, जब उनके मीडिया प्रभारी ने सीधे अखिलेश यादव को निशाने पर ले लिया था और मुसलमानों को लेकर अखिलेश यादव के बर्ताव के बारे में सार्वजनिक रूप से बयान दिया था. इसके बाद आजम खान के मीडिया प्रभारी या फिर अब्दुल्ला आजम ने बयान को खंडन तक करने की कोशिश नहीं की. आजम कैंप का आरोप है कि आजम खान को जेल से छुड़ाने के लिए कोई कोशिश नहीं की. यहां तक कि अखिलेश यादव 27 महीने में केवल एक बार जेल में मिलने गए थे. आजम खान के कई समर्थकों ने सपा छोड़ दी है. ऐसे में आजम खान का अगला सियासी कदम काफी मायने रखने वाला होगा और उत्तर प्रदेश की सियासत में मील का पत्थर साबित होगा.

अखिलेश के लिए आजम को जोड़े रखने की चुनौती

आजम खान की रिहाई के समय जिस तरह शिवपाल सिंह यादव साथ खड़े नजर आए हैं, उससे तो संकेत यही मिल रहा है कि दोनों नेताओं के बीच कोई न कोई खिंचड़ी जरूर पक रही है. शिवपाल ने आजम खान को आजम भाई कहकर संबोधित किया, जिससे लग रहा है कि दोनों मिलकर एक नया मोर्चा बना सकते हैं. इतना तो तय है कि अखिलेश यादव के सामने आजम खान को पार्टी से जोड़े रखने की कड़ी चुनौती है और यह देखना होगा कि वे कैसे इस चुनौती का सामना कर पाते हैं. आजम खान यूपी में मुसलमानों के बड़े नेता हैं और अगर वे सपा का साथ छोड़ते हैं तो फिर समाजवादी पार्टी का आधार वोट बैंक खिसक जाएगा, यह तय है. फिर केवल यादव वोट बैंक के साथ राजनीति करना अखिलेश यादव के लिए मुश्किल हो जाएगा.

आजम के लिए हाथ-पांव मार रहे कांग्रेस-बसपा

आजम खान के मुसलमानों में पैठ के चलते और सपा से उनकी नाराजगी को देखते हुए ही कांग्रेस से लेकर मायावती तक हाथ पांव मार रही हैं. यहां तक कि जयंत चौधरी भी रामपुर जाकर आजम खान के परिवार से मिल चुके हैं. वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा के दूत के रूप में प्रमोद कृष्णम भी सीतापुर जेल का दौरा कर चुके हैं. वहीं बीएसपी प्रमुख मायावती ने आजम खान के साथ अन्याय की बात को हवा दे चुकी हैं. ये सभी दलों की चाहत यही होगी कि आजम खान उनके कैंप में आ जाएं, ताकि मुसलमानों का एकमुश्त वोट उनके पाले में आ जाए.

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