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बिहार में राजनीतिक संकट के बीच बनती ये संभावनाएं, कभी भी बदल सकती हैं राज्य का सियासी रुख

बिहार में जेडीयू औऱ बीजेपी गठबंधन के बीच दरार एक-दो दिन में नहीं पैदा हुई है. कई बार बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल नीतीश कुमार सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं. इसका जवाब भी जेडीयू की ओर से समय-समय पर दिया गया. यहीं नहीं अग्निपथ स्कीम को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच घमासान देखने को मिला था.

बिहार में राजनीतिक संकट के बीच बनती ये संभावनाएं

नई दिल्ली. बिहार की राजनीति में बड़ा खेला होने की संभावना है. बीजेपी-जेडीयू गठबंधन टूटने के आसार दिखते नजर आ रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि बीजेपी-जदयू गठबंधन जल्द ही टूट सकता है. बदलते सियासी घटनाक्रम के बीच विपक्ष खेमे में तैयारियां शुरू हो गई है. कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़कर राजद, कांग्रेस औऱ लेफ्ट के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नई संभावनाओं के लिए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया से बात की है. बिहार में बीजेपी गठबंधन में दरार की संभावना के बीच कांग्रेस, राजद, जेडीयू समेत कई पार्टियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं. जेडीयू ने अपने सभी विधायकों को पटना में रहने का निर्देश दिया है. वहीं अपने सांसदों को भी पटना बुलाया है. राज्य में बदलते सियासी घटनाक्रम के बीच कांग्रेस और आरजेडी भी सक्रिय हो गई है.

इस खबर में ये है खास-

  • आरसीपी सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप से शुरू हुआ घमासान
  • नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ मिलकर बना सकते सरकार
  • केंद्रीय नेतृत्व के दखल से दूर हो सकती जेडीयू की नाराजगी
  • केंद्र में जेडीयू को 2 मंत्री पद के ऑफर से बन सकती बात
  • नीतीश कुमार-अमित शाह की मुलाकात से निकल सकता समाधान

आरसीपी सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप से शुरू हुआ घमासान

राज्य में सियासी उठापटक की शुरूआत उस समय हुई, जब बिहार में आरसीपी सिंह पर उनकी पार्टी जेडीयू ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. इसके बाद आरसीपी सिंह जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था. साथ ही आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. रविवार को आरसीपी सिंह के आरोप जवाब देने के लिए जेडीयू अध्यक्ष लल्लन सिंह सामने आए. उन्होंने ये भी कहा कि हमें पता है कि ये षडयंत्र कहां से हुआ, आने वाले दिनों में खुलासा करेंगे कि षडयंत्र कहां-कैसे हुआ. जेडीयू के इस रूख के बाद साफ हो गया है कि बिहार एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.

नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ मिलकर बना सकते सरकार

बिहार में जारी सियासी संकट के बीच हम आपको उन संभावनाओं के बारे में बताएंगे, राज्य में सियासी हालात को बदल सकते हैं. बिहार में जेडीयू औऱ बीजेपी गठबंधन के बीच दरार एक-दो दिन में नहीं पैदा हुई है. कई बार बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल नीतीश कुमार सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं. इसका जवाब भी जेडीयू की ओर से समय-समय पर दिया गया. यहीं नहीं अग्निपथ स्कीम को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच घमासान देखने को मिला था. बताया यह भी जा रहा है कि खुद सीएम नीतीश कुमार भी बीजेपी आलाकमान से नाराज हैं. इसी कारण रविवार को नीति आयोग की बैठक में नीतीश कुमार ने हिस्सा नहीं लिया था. अब राजनीतिक संकट के बीच संभावना है कि बीजेपी से अलगकर नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं.

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केंद्रीय नेतृत्व के दखल से दूर हो सकती जेडीयू की नाराजगी

राज्य में जिस तरह से सियासी संकट पैदा हुआ, ऐसे में बीजेपी के लिए मुश्किल वक्त सामने आ गया है. बिहार में यह सब ऐसे समय में हो रहा है. जब बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है. अलग-अलग राज्यों में बीजेपी अपनी मजबूत जमीन तलाशने में लगी है. अब जेडीयू की नाराजगी के बीच संभावना है बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व बिहार में सियासी संकट पर दखल दे सकता है. अगर बीजेपी नेतृत्व में राज्य के संकट में दखल देता है तो संभावना है कि नीतीश कुमार मान जाए और फिर से राज्य में यथास्थिति बन सकती है. कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार यह सब खेल पॉलिटिकल प्रेशर क्रिएट करने के लिए कर रहे हैं. बीजेपी नेतृत्व से जरा सा सकारात्मक रिस्पांस मिलता है, तो संभावना है कि जेडीयू की नाराजगी दूर हो सकती है.

केंद्र में जेडीयू को 2 मंत्री पद के ऑफर से बन सकती बात

इधर बिहार में राजनीतिक संकट के बीच जेडीयू अध्यक्ष लल्लन सिंह ने साफ किया कि जेडीयू केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होने का कोई प्लान नहीं है. हालांकि बीजेपी की ओर से जेडीयू को केंद्र में 2 मंत्री पद का ऑफर दिया जा सकता है. अगर बीजेपी की ओर इस दिशा में कदम बढ़ाया जाता है तो बिहार में राजनीतिक संकट की स्थिति बदलने की पूरी संभावन है. संभावना है कि केंद्र में जेडीयू को 2 मंत्री पद का ऑफर से नीतीश कुमार की नाराजगी दूर हो सकती है. वहीं यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार में लोकसभा चुनाव को देखते हुए नीतीश कुमार ये सारा खेल पॉलिटिकल प्रेशर बनाने के लिए कर रहे हैं.

नीतीश कुमार-अमित शाह की मुलाकात से निकल सकता समाधान

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राज्य के सियासी घटनाक्रम पर फिलहाल बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है. कोई भी नेता राजनीतिक संकट पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. लेकिन इन सबके बावजूद बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व की नजरें बिहार की राजनीति पर जरूर होंगी. इनके सबके बीच बीजेपी नेतृत्व नीतीश कुमार को मनाने के लिए आगे आ सकता है. संकट के बीच अगर अमित शाह-नीतीश कुमार मुलाकात करते हैं तो सकारात्मक रूख जरूर सामने आयेगा. अगर दोनों नेताओं के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर कोई फाइनल रणनीति बने, जिसमें 50-50 का सीट शेयरिंग फॉर्मूला फाइनल हो तो गठबंधन टिका रह सकता है. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई पक्की खबर नहीं है. पर यह सब बिहार में जारी राजनीतिक संकट के बीच संभावना जरूर हो सकती है.

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