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यूपी की सभी 80 सीटें जीतेगी BJP? ‘मिशन 2024’ के लिए यादव-जाटव और पसमांदा मुसलमानों पर फोकस

2024 के लिए बीजेपी ने ऐसा धांसू प्लान बनाया है कि जिससे विपक्ष का एक बार फिर से डिब्बा गोल हो जाएगा. मोदी-शाह की जोड़ी ने यूपी को लेकर कुछ ऐसी रणनीति तैयार की है जिससे ना सिर्फ पार्टी को अच्छी-खासी लीड मिलेगी, बल्कि आने वाले 10-20 सालों तक विपक्ष सिर नहीं उठा पाएगा.

BJP Mission 2024
यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटें जीतेगी BJP?

24 घंटे चुनावी मुद्रा में रहने वाली बीजेपी अभी से ‘मिशन-2024’ पर लग गई है. पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की कोशिश है कि तीसरी बार सत्ता हासिल की जाए. इसके लिए पार्टी ने ऐसा धांसू प्लान बनाया है कि जिससे विपक्ष का एक बार फिर से डिब्बा गोल हो जाएगा. मोदी-शाह की जोड़ी ने यूपी को लेकर कुछ ऐसी रणनीति तैयार की है जिससे ना सिर्फ पार्टी को अच्छी-खासी लीड मिलेगी, बल्कि आने वाले 10-20 सालों तक विपक्ष सिर नहीं उठा पाएगा.

इस खबर में ये है खास

  • यूपी की सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य
  • यादव, जाटव और पसमांदा मुस्लिमों पर नजर
  • 37 सीटों पर इस वोटबैंक का है प्रभाव
  • MPs-MLAs को मिली बड़ी जिम्मेदारी
  • यादवों को खुश करने की बड़ी कोशिश
  • परिवार ही नहीं संभाल पाए हैं अखिलेश
  • 'बीजेपी में मिल रहा यादवों को सम्मान'
  • जाटवों वोटबैंक पर भी पूरा फोकस
  • 'मोदी ने दलित को जीने का सहारा दिया'
  • 'पसमांदा मुसलमान भी बीजेपी से जुड़ रहा'
  • बिना भेदभाव मिला योजनाओं का लाभ

यूपी की सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य

भगवा दल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. इसके तहत पार्टी ने यादव, जाटव और पसमांदा मुसलमानों को साधने की कोशिश शुरू कर दिया है. ये तबका अभी दूसरे दलों का परंपरागत बड़ा वोटबैंक समझा जाता रहा है. हालांकि अब भगवा दल ने इस वोटबैंक को रिझाना शुरू कर दिया है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने हाल में ट्वीट किया था कि यदुवंशियों (यादव) रविदासवंशियों (जाटव) के साथ-साथ पसमांदा मुसलमानों को भी बीजेपी के साथ लाएंगे. 2024 में यूपी के हर बूथ पर कमल ही कमल खिलाएंगे.

यादव, जाटव और पसमांदा मुस्लिमों पर नजर

आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव जीतने के बाद पार्टी का हौंसला काफी बढ़ गया है. पार्टी अब सभी 80 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धानित करके तैयारी कर रही है. सीएम योगी ने भी दावा किया था कि 2024 में उत्तर प्रदेश की 80 में 80 लोकसभा सीट जीतेंगे. इसके पहले बीजेपी ने 80 में 75 सीट जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया था. सभी 80 सीट जीतने के लिए पार्टी अब यादव, जाटव (अनुसूचित जाति) और पसमांदा (पिछड़े) मुसलमानों को भी साधने में जुट गई है.

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37 सीटों पर इस वोटबैंक का है प्रभाव

हाल ही के उपचुनावों ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि सपा का परंपरागत वोटबैंक अब बिखर चुका है. विधानसभा चुनाव के आंकड़े कहते हैं बसपा से जुडे़ जाटव वोटर भी अब मायावती का साथ छोड़ चुके हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य की आबादी में यादवों की हिस्सेदारी 11 फीसदी, दलितों की 21 फीसदी और मुसलमानों की 18 फीसदी है. राज्‍य में 17 लोकसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. राज्य की 10-10 सीटों पर यादव और मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका मानी जाती है.

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MPs-MLAs को मिली बड़ी जिम्मेदारी

प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 1 लाख 70 हजार से ज्‍यादा बूथ हैं और बीजेपी ने अपने संगठनात्मक सर्वे में इनमें से 22 हजार बूथ को कमजोर माना हैं. सूत्रों के मुताबिक ये बूथ खासतौर से यादव, जाटव और मुस्लिम बहुल हैं. बीजेपी के प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल ने एक बैठक में इन बूथ को साधने के लिए सांसदों और विधायकों को जिम्मेदारी सौंपी थी और जनप्रतिनिधियों ने इस पर अमल किया था. बीजेपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तिरंगा यात्रा सप्ताह (11 अगस्त से 17 अगस्त) तथा आगे के जनसंपर्क अभियानों में बीजेपी ने यादवों, जाटवों और मुसलमानों के बीच भी व्यापक जनसंपर्क की योजना बनाई है.

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यादवों को खुश करने की बड़ी कोशिश

पीएम मोदी ने 25 जुलाई को राष्ट्रपति मुर्मू के शपथ ग्रहण के बिजी शेड्यूल के बावजूद हरमोहन सिंह यादव की 10वीं पुण्यतिथि पर कानपुर में आयोजित गोष्ठी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया. दिवंगत नेता का यादव समाज में अच्छा प्रभाव रहा है. वे ‘अखिल भारतीय यादव महासभा’ के अध्यक्ष रहे. इसके अलावा सपा से राज्यसभा भी पहुंचे थे. मुलायम यादव की सरकार में वे सीएम जितनी पॉवर रखते थे. अखिलेश की उपेक्षा से नाराज होकर उनके बेटे सुखराम यादव और नाती मोहित यादव अब बीजेपी से जुड़ गए हैं.

परिवार ही नहीं संभाल पाए हैं अखिलेश

इससे पहले मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी के पाले में साफ नजर आए. शिवपाल का अपने भतीजे सपा प्रमुख अखिलेश यादव से तनावपूर्ण संबंध जगजाहिर हैं. मुलायम की पुत्रवधू अपर्णा यादव विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं. प्रदेश सरकार में इस बार जौनपुर के विधायक गिरीश यादव को स्‍वतंत्र प्रभार का राज्य मंत्री बनाया गया है.

‘बीजेपी में मिल रहा यादवों को सम्मान’

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता संतराज यादव ने दावा किया कि यादव समाज अब सपा के साथ रहना नहीं चाहता है, कांग्रेस में उसे कोई अवसर नहीं दिखाई देता और बसपा में यह समुदाय जा नहीं पाएगा. ऐसे में कुल मिलाकर बीजेपी ही एक विकल्प बचती है और बीजेपी पलक-पांवड़े बिछाकर उनका इंतजार कर रही है. बीजेपी में यादव नेताओं को उचित सम्मान दिया जा रहा है. संतराज यादव ने हाल में हुए चुनावों में यादवों को मिले महत्‍व की ओर इशारा किया, जिसमें गोरखपुर की संगीता यादव को राज्यसभा, संतकबीरनगर के सुभाष यादव को विधान परिषद और दिनेश लाल यादव को आजमगढ़ से लोकसभा में जाने का मौका दिया.

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जाटवों वोटबैंक पर भी पूरा फोकस

बीजेपी यादवों के साथ ही जाटवों को भी महत्व देने लगी है. इसके पहले भी पार्टी ने 2014 और 2019 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में गैर-जाटव अनुसूचित जातियों मसलन कोरी, धोबी, पासी, खटीक, धानुक आदि समाज के लोगों को विशेष वरीयता दी थी. 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को इस्तीफा दिलाकर बीजेपी ने उन्‍हें राजनीति की मुख्यधारा में शामिल किया. चुनाव जीतने के बाद उन्‍हें योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया.

‘मोदी ने दलित को जीने का सहारा दिया’

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बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के एक नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि हम सबका हित बीजेपी में ही सुरक्षित है और कोरोना जैसी महामारी के बीच दोगुना राशन और जन औषधि जैसी योजनाओं ने हर गरीब दलित को जीने का सहारा दिया और मोदी-योगी के शासन में कोई भूखों नहीं सोया. उन्‍होंने कहा कि यह सिर्फ बीजेपी ही कर सकती है, इसलिए बीजेपी की डबल इंजन सरकार का तब तक बने रहना जरूरी है जब तक समाज में अमीर-गरीब की खाई पट नहीं जाती. उन्होंने कहा कि बीजेपी जाटव बहुल बूथों पर तिरंगा यात्रा के दौरान विशेष संपर्क अभियान भी चलाएगी.

‘पसमांदा मुसलमान भी बीजेपी से जुड़ रहा’

जहां तक पसमांदा मुसलमानों का सवाल है तो बीजेपी ने बलिया के अति पिछड़े मुस्लिम परिवार से आने वाले दानिश आजाद अंसारी को योगी के मंत्रिमंडल में शामिल किया. उन्‍हें अल्पसंख्यक मामलों का राज्यमंत्री बनाया गया. अंसारी को जब मंत्री पद दिया गया तब वह विधानमंडल के किसी सदन के सदस्‍य भी नहीं थे, जिन्हें बाद में बीजेपी ने विधान परिषद में भेजा. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा कि हर बूथ पर 100 लाभार्थी बीजेपी की सरकार ने तय किए हैं, जिन्हें हर योजनाओं का लाभ मिल रहा है. इसका लाभ गरीब मुसलमानों को भी मिल रहा है.

बिना भेदभाव मिला योजनाओं का लाभ

उन्‍होंने कहा कि बीजेपी संगठन इन लाभार्थियों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है. अली ने दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों में 60 फीसदी लाभार्थी मुसलमान हैं, जिन्हें नि:शुल्क शौचालय, आवास, खाद्यान्न समेत सभी लाभार्थी योजनाओं का लाभ मिल रहा है. उन्होंने कहा कि इससे उनके पूरे परिवार को लाभ मिल रहा है और हम उन्‍हें लगातार बता रहे हैं कि यह मोदी जी और योगी जी की बदौलत संभव हो सका है. अली ने बताया कि संगठनात्मक स्तर पर लाभार्थी सम्मेलन की भी योजना है.

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