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कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को राहत, कोर्ट ने गैर जमानती वारंट किया निरस्त

Sanjay Nishad
डॉ. संजय निषाद (ANI)

गोरखपुरः कैबिनेट मंत्री डॉक्टर संजय निषाद (Sanjay Nishad) को कसरवल कांड में सीजेएम और एमपीएमएलए कोर्ट ने राहत दे दी है. उनके खिलाफ जारी वारंट को निरस्‍त करते हुए कोर्ट ने अगली तारीखों पर उपस्थित रहने का आदेश दिया है. कोर्ट में पेश होने के बाद डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि चार्जशीट लगने के बाद कोर्ट में केस दाखिल हुआ, तो उन्‍हें तारीखों के बारे में जानकारी नहीं हो सकी. जब उन्‍हें वारंट जारी होने के बारे में जानकारी हुई, तो वे न्‍यायालय के समक्ष उपस्थित हुए हैं. ऐसे में उन्‍हें राहत दी जाए. उनके पक्ष को सुनने के बाद सीजेएम और एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्‍हें राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी वारंट को निरस्‍त कर‍ दिया.

खबर में खास

  • CJM-MPMLA कोर्ट ने गैर जमानती वारंट किया निरस्त
  • कोर्ट ने तीन दिन के अंदर पेश होने का दिया था आदेश
  • 17 अगस्‍त को केस की अगली सुनवाई होगी
  • क्या है पूरा मामला इस तरह से जानिए

CJM-MPMLA कोर्ट ने गैर जमानती वारंट किया निरस्त

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉक्टर संजय निषाद (Sanjay Nishad) आज गोरखपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में पेश हुए. जहां पर उनके अधिवक्‍ता ज्ञान प्रकाश निषाद और कमलेश निषाद ने अपना पक्ष रखा. कोर्ट ने उनका पक्ष रखते हुए गैर जमानती वारंट को निरस्‍त कर दिया. डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) के अधिक्‍ता ने कोर्ट को बताया कि चार्जशीट लगने के बाद उन्‍हें तारीख की जानकारी नहीं होने की वजह से वे कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हो सके. जब उन्‍हें गैर जमानती वारंट के बारे में जानकारी हुई, तो वे तत्‍काल कोर्ट के सामने पेश हुए हैं. उनका पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने उनका वारंट निस्‍त कर दिया.

कोर्ट ने तीन दिन के अंदर पेश होने का दिया था आदेश

कैबिनेट मंत्री डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) का इसी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे केस में भी कोर्ट ने राहत दी है. अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट नंबर 2 ने आरपीएफ की ओर से किए गए केस में डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) को समन भेजकर तीन दिन के भीतर पेश होने का आदेश दिया था. इसमें कोर्ट ने राहत देते हुए वारंट को निरस्‍त कर दिया है. इसमें 17 अगस्‍त को अगली तारीख लगी है. इसी मामले में स्‍पेशल जज पास्‍को-3/एमपी-एमएलए कोर्ट में भी स्‍टेट-बनाम चंद्रिका का केस चल रहा है. सीजेएम से इसी कोर्ट में केस को ट्रांसफर करने की अपील की गई है. हालांकि इस मामले में अभी कोर्ट ने कोई निर्णय और तारीख नहीं दी है.

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17 अगस्‍त को केस की अगली सुनवाई होगी

कैबिनेट मंत्री डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने बताया कि वे मुख्य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट कोर्ट (सीजेएम) में पेश हुए. उन्‍होंने अपना पक्ष रखा. जिसे सुनते हुए कोर्ट ने उनके वारंट को निरस्‍त कर दिया है. उन्‍होंने कोर्ट से कहा कि उन्‍हें जैसे ही वारंट के बारे में जानकारी हुई है, वे कोर्ट में हाजिर हुए हैं. इस मामले में कोर्ट ने वारंट को निरस्‍त करने की मांग को स्‍वीकार कर अगली तारीख पर पेश होने के लिए कहा है. अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट नंबर 2 में आरपीएफ की ओर से दर्ज किए गए केस में भी तीन दिन के भीतर हाजिर होने के आदेश के बाद संजय निषाद (Sanjay Nishad) वहां पर हाजिर हुए. कोर्ट ने उन्‍हें यहां भी राहत देते हुए 17 अगस्‍त की तारीख सुनिश्चित की है.

क्या है पूरा मामला इस तरह से जानिए

दरअसल, 7 जून 2015 को कसरवल कांड में फर्जी तरीके से डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) और उनके सहयोगियों को आरोपी बनाया गया. इसमें 37 आरोपियों की चार्जशीट पहले आ गई थी. 13 जनवरी 2016 को डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) को जमानत हुई. इनकी चार्जशीट 2019 में कोर्ट में द‍ाखिल हुई. इस मामले में कोर्ट की ओर से कोई भी समन सूचना प्राप्‍त नहीं हुई. इसमें गलत तरीके से वारंट कर दिया गया. आज अर्जी पड़ी. कोर्ट ने इसे स्‍वीकार कर वारंट को रिकाल कर दिया. ये केस भी एमपी-एमएलए कोर्ट में चलेगा. क्‍योंकि दो बार चार्जशीट आई थी. इसलिए फाइल अलग-अलग कोर्ट में जाने से दो कोर्ट में मामला चल रहा है. ये फाइल भी एमपी-एमएलए कोर्ट में चला जाएगा, जिससे एक ही जगह पर केस चल सके.

गोरखपुर के कसरवल में 7 जून 2015 को डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) के नेतृत्‍व आंदोलन हुआ. निषाद समाज के लोगों को सरकारी नौकरी में पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर पूरे प्रदेश से निषाद समाज के लोग जुट गए. कसरवल में ट्रेन की पटरियों पर आंदोलनकारियों ने कब्‍जा जमा लिया. आंदोलनकारी रेलवे ट्रैक पर चारपाई लगाकर बैठ गए. पुलिस के हटाने पर उन्‍होंने रेलवे ट्रैक को बाधित करने के साथ ही पटरी को क्षतिग्रस्‍त कर दिया. रेलवे ट्रैक से लेकर सड़क पर भी आंदोलनकारी आक्रोशित हुए और पुलिस बल और आरपीएफ पर पत्‍थरबाजी करने लगे. इसी दौरान चली गोली में यूपी के इटावा के रहने वाले 20 वर्षीय अखिलेश निषाद नाम के युवक की मौत हो गई और कई आंदोलनकारी घायल हो गए थे.

इस मामले में सहजनवां के तत्‍कालीन थानेदार श्‍यामलाल यादव ने 37 लोगों को आरोपी बनाया. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 504, 506, 147, 148, 149, 336, 332, 353, 436, 7 सीएलए एक्‍ट, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धारा 3/4 संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम और आरपीएफ ने रेलवे अधिनियम की धारा 150/151 के अंतर्गत केस दर्ज किया. सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. इनमें तीन लोगों की मौत हो चुकी है.

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इस मामले में डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने कोर्ट में सरेंडर किया था. उसके बाद उन्‍हें जेल भेज दिया गया. जेल में एक माह से अधिक समय गुजारने के बाद उन्‍हें जमानत मिली. चार्जशीट लगने के बाद जब सीजेएम कोर्ट में मामला पहुंचा, तो कई तारीखों पर डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) के हाजिर नहीं होने की वजह से कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया और शाहपुर पुलिस को 10 अगस्त को डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया. इस मामले में 156/3 के तहत डा. संजय निषाद (Sanjay Nishad) की ओर से पुलिसवालों के खिलाफ भी केस न्‍यायालय में दाखिल है.

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