Connect with us

Hi, what are you looking for?

[t4b-ticker]

राज्य

Eknath Shinde: ऑटो ड्राइवर से उद्धव ठाकरे की सत्ता को हिलाने तक की कहानी, जाने एकनाथ शिंदे का जीवन

सन 2000 में बेटा-बेटी की मौत से एकनाथ शिंदे ने राजनीति को छोड़ने का फैसला किया था, हालांकि आनंद दीघे ही उन्हें वापस राजनीति में लाए. दीघे की मौत के बाद ठाणे की राजनीतिक विरासत को एकनाथ शिंदे ने संभाला. शिंदे भी आनंद दीघे की तरह जनता के बीच सेवक का काम करते.

Eknath Shinde
एकनाथ शिंदे होंगे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, शाम 7 बजे CM पद की लेंगे शपथ (ANI)

नई दिल्ली. महाराष्ट्र में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की उद्धव ठाकरे से बगावत ने राज्य में सत्ता को हिला दिया है. एकनाथ शिंदे के साथ शिवसेना के करीब 34 विधायक बागी हो गए हैं. साथ ही कुछ निर्दलीय विधायक भी बागी एकनाथ शिंदे के साथ गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल में डेरा जमाए हुए हैं. एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा भूचाल लाने का काम किया कि एकदम से उद्धव ठाकरे की सत्ता हिल गई. सीएम ठाकरे फेसबुक लाइव में बागी विधायकों से भावनात्मक अपील के लिए मजबूर हो गए. यहां तक उन्होंने कहा कि अगर एक विधायक कह इस्तीफे के लिए कह दें, तो वह कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार हैं.

इस खबर में ये है खास-

  • एक घटना के बाद राजनीति छोड़ना का फैसला
  • शिंदे के सामने ही डूब गए उनके बेटा-बेटी
  • आनंद दीघे की राजनीति विरासत को शिंदे ने संभाला
  • 2004 से शिंदे लगातार चुने गए विधायक
  • बगावत के पीछे बेटे औऱ फडणवीस का हाथ

एक घटना के बाद राजनीति छोड़ना का फैसला

एकनाथ शिंदे की चाल में महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे इस कदर फंस गए, कि इस्तीफा देने से पहले ही उन्होंने आधिकारिक आवास वर्षा को बुधवार रात खाली कर दिया था. महाराष्ट्र की सत्ता को हिला देने वाले एकनाथ शिंदे ने कभी राजनीति को छोड़ने का फैसला कर लिया था. दरअसल में आज से करीब 22 साल पहले 2 जून 2000 को शिंदे के साथ ऐसा वाकया हुआ, जिससे वह पूरी तरह से टूट गए थे और सब कुछ छोड़ने का फैसला कर लिया था.

शिंदे के सामने ही डूब गए उनके बेटा-बेटी

सन 2000 में एकनाथ शिंदे अपने 11 साल के बेटे दीपेश और 7 साल की बेटी शुभदा के साथ सतारा गए थे. वहां पर बोटिंग करते हुए एक्सीडेंट हुआ और शिंदे के दोनों बच्चे उनकी आंखो के सामने डूब गए. शिंदे का हादसे के वक्त तीसरा बेटा श्री कांत सिर्फ 14 साल का था. उद्धव सरकार को हिलाने वाले एकनाथ शिंदे का जन्म 9 फरवरी 1964 को हुआ था. शुरू में एकनाथ शिंदे ऑटो चलाने का काम करते थे. उस समय शिवसेना के कद्दावर नेता आनंद दीघे से प्रभावित होने पर शिवसेना का दामन थामा.

Advertisement. Scroll to continue reading.

आनंद दीघे की राजनीति विरासत को शिंदे ने संभाला

पार्टी के लिए लगातार लगनशीलता से शिंदे काम करते रहे. पहले शिवसेना के शाखा प्रमुख और फिर ठाणे म्युनिसिपल के कॉर्पोरेटर गए. हालांकि सन 2000 में बेटा-बेटी की मौत से एकनाथ शिंदे ने राजनीति को छोड़ने का फैसला किया था, हालांकि आनंद दीघे ही उन्हें वापस राजनीति में लाए. दीघे की मौत के बाद ठाणे की राजनीतिक विरासत को एकनाथ शिंदे ने संभाला. शिंदे भी आनंद दीघे की तरह जनता के बीच सेवक का काम करते.

2004 से शिंदे लगातार चुने गए विधायक

पहली बार एकनाथ शिंदे 2004 में विधायक बने, इसके बाद लगातार 2009, 2014 और 2019 में विधायक चुने जाते रहे हैं. 2014 में फडणवीस सरकार में एकनाथ शिंदे के पास पीडब्लूडी मंत्रालय रहा. इसके बाद 2019 में महाविकास अघाड़ी गठबंधन सरकार में शिंदे को सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और नगर विकास मंत्रालय का जिम्मा मिला.

बगावत के पीछे बेटे औऱ फडणवीस का हाथ

Advertisement. Scroll to continue reading.

कहा जाता है कि एकनाथ शिंदे का उद्धव से बगावत के पीछे उनके बेटे श्रीकांत का हाथ है. शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे पेशे डॉक्टर इस समय कल्याण लोकसभा सीट से सांसद हैं. श्रीकांत का मानना है कि बीजेपी के साथ उनका भविष्य सही रहेगा. साथ पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी एकनाथ शिंदे को अंदर अंदर ताकतवार बनाने का काम करते हैं.

You May Also Like

देश

नई दिल्ली. अभी तक सीबीएसई (CBSE Result) बोर्ड परीक्षा का परिणाम नहीं हो सका है. लंबे समय से विद्यार्थी रिजल्ट का इंतजार कर रहे...

क्रिकेट

IND vs ENG Edgbaston 5th Test Day 4 Highlights: जो रूट (नाबाद 76) और जॉनी बेयरस्टो (नाबाद 72) के बीच 150 रन की साझेदारी...

विदेश

नई दिल्लीः संयुक्त राज्य अमेरिका (America) के शिकागो में इलिनोइस के हाईलैंड पार्क में 4 जुलाई की परेड के दौरान फायरिंग(Firing) की घटना में मौतों का...

कोरोनावायरस

नई दिल्ली: देश में Corona के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, नए मामलों का ग्राफ उठता जा रहा है ऐसे में देश के...

Advertisement