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गुजरात के इस गांव में प्रत्याशी की एंट्री और चुनाव प्रचार पर बैन, जानें क्यों मतदान न करने पर देना पड़ता जुर्माना

एक तरफ जहां पूरे गुजरात में चुनावी कैंपन तेजी के साथ चल रहा है, तो वहीं राज्य में एक गांव ऐसा भी है, जो चुनाव प्रचार से बिल्कुल दूर है. राजकोट जिले के राज समाधियाला गांव के लोग चुनाव के ड्रामे से खुद को एकदम से दूर रखे हुए हैं. गांव वालों ने अपने गांव में राजनीतिक दलों के प्रवेश और प्रचार पर रोक लगा दी है.

गुजरात के राज समाधियाला गांव में प्रत्याशी की एंट्री और चुनाव प्रचार पर बैन
गुजरात के इस गांव में प्रत्याशी की एंट्री और चुनाव प्रचार पर बैन (Photo-ANI)

गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए इस समय चुनाव प्रचार तेजी पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विपक्षी पार्टियों के भी नेता पूरी ताकत के साथ गुजरात में चुनाव प्रचार कर रहे हैं. गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान होगा. पहले चरण के लिए 1 दिसंबर को 89 सीटों पर मतदान होंगें, तो दूसरे चरण के लिए 93 सीटों पर 5 दिसंबर को वोटिंग हैं. वहीं हिमाचल प्रदेश के साथ 8 दिसंबर को गुजरात चुनाव के परिणाम घोषित किए जाएंगे.

इस खबर में ये है खास-

  • राजनीतिक ड्रामे से दूर है गांव
  • 100 फीसदी तक होता मतदान
  • 1983 से गांव में यह नियम लागू
  • मतदान न करने पर देना पड़ता जुर्माना

राजनीतिक ड्रामे से दूर है गांव

एक तरफ जहां पूरे गुजरात में चुनावी कैंपन तेजी के साथ चल रहा है, तो वहीं राज्य में एक गांव ऐसा भी है, जो चुनाव प्रचार से बिल्कुल दूर है. राजकोट जिले के राज समाधियाला गांव (Raj Samadhiyala village) के लोग चुनाव के ड्रामे से खुद को एकदम से दूर रखे हुए हैं. गांव वालों ने अपने गांव में राजनीतिक दलों के प्रवेश और प्रचार पर रोक लगा दी है. इस गांव के लोगों लगता है कि उम्मीदवारों को प्रचार करने की अनुमति देना क्षेत्र के लिए हानिकारक होगा.

100 फीसदी तक होता मतदान

गाँव में लगभग 100 प्रतिशत मतदान हो रहा है और जो भी जानबूझकर मतदान नहीं करता है, उस पर 51 रुपये का जुर्माना लगता है. गाँव का सरपंच भी आम सहमति से चुना जाता है. गांव के सरपंच का कहना है कि इस फैसले से यहां करीब शत प्रतिशत मतदान हो जाता है. 1700 की आबादी वाले एक छोटे से गांव ने एक कमेटी बनाई है. मतदान से कुछ दिन पहले समिति के सदस्य ग्रामीणों की एक बैठक बुलाते हैं और यदि कोई मतदान करने में असमर्थ होता है तो समिति को इसका कारण बताना होता है.

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1983 से गांव में यह नियम लागू

गांव के सरपंच कहते हैं कि राजनीतिक दलों को गांव में प्रचार करने की अनुमति नहीं देने का नियम 1983 से मौजूद है. यहां किसी भी पार्टी को प्रचार करने की अनुमति नहीं है. राजनीतिक दलों को भी इस विश्वास का एहसास है कि अगर वे राज समाधियाला गांव में प्रचार करेंगे तो वे उनकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाएंगे. सरपंच आगे कहते हैं कि हमारे गांव के सभी लोगों को मतदान करना अनिवार्य है अन्यथा उन पर 51 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है.

मतदान न करने पर देना पड़ता जुर्माना

गाँव में वाई-फाई के माध्यम से इंटरनेट कनेक्शन, सीसीटीवी कैमरे, पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए आरओ प्लांट जैसी लगभग हर आधुनिक सुविधा है. एक स्थानीय ने बताया कि गांव में करीब 995 मतदाता हैं और यहां के लोग अपनी मर्जी से मतदान करते हैं. एक स्थानीय ने कहा, “पिछले 20 सालों से मैं यहां मतदान कर रहा हूं, लेकिन यहां चुनाव प्रचार प्रतिबंधित है और यहां मतदान अनिवार्य है.” अगर कोई जानबूझकर मतदान करने नहीं जाता है, तो उस जुर्माना लगाया जाता है.

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