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ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि: क्या यूपी में फिर से शुरू होगा मंदिर आंदोलन? कितनी बदलेगी सियासत?

वाराणसी (Varanasi) में काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) से सटी ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid Survey) के सर्वे का आदेश दिया है. वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद (Shri Krishna Janmabhoomi Dispute) में भी बड़ा फैसला दिया है.

Mathura-Gyanvapi
ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि: क्या यूपी में फिर से शुरू होगा मंदिर आंदोलन? कितनी बदलेगी सियासत?

यूपी में मंदिर आंदोलन (Mandir Andolan) की सुगबुगाहट एक बार फिर से सुनाई देने लगी है. जिस तरह से प्रदेश की दो बड़ी और विवादित मस्जिदों को लेकर कोर्ट का फैसला आया, उससे हिंदू पक्ष काफी खुश है. वहीं इन फैसलों को लेकर भविष्य की राजनीति को लेकर तमाम संभावनाएं लगाई जा रही हैं. वाराणसी (Varanasi) में काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) से सटी ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid Survey) के सर्वे का आदेश दिया है. वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद (Shri Krishna Janmabhoomi Dispute) में भी बड़ा फैसला दिया है.

इस खबर में ये है खास

  • कैसे शुरू हुआ था मंदिर आंदोलन
  • राम मंदिर के इर्द-गिर्द रही सियासत
  • अयोध्या-काशी जारी है, मथुरा की बारी है
  • ज्ञानवापी की सच्चाई आएगी सामने
  • कृष्ण जन्मभूमि विवाद में बड़ा फैसला
  • बस ताजमहल का राज अनसुलझा रहेगा

कैसे शुरू हुआ था मंदिर आंदोलन

हिंदूवादी संगठनों का दावा है कि मुगलों ने कई प्राचीन मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों का निर्माण किया था. देश की आजादी के बाद से ही कई मस्जिदों को लेकर विवाद चल रहा है. साल 1948 में देश के इतिहास में पहली बार चुनाव में राम मंदिर का इस्तेमाल हुआ था. कांग्रेस ने एक बागी को हराने के लिए हिंदुत्व के नाम पर वोट मांगे थे. तब से लेकर आजतक राम और मंदिर पर सियासत यूपी में समय-समय पर हलचल पैदा करती रही है.

राम मंदिर के इर्द-गिर्द रही सियासत

राम मंदिर आंदोलन मुख्य रूप से 1984 में सुर्खियों में आया. साल 1985 में राजीव गांधी ने विवादित स्थल का ताला खुलवा दिया. वीएचपी और बीजेपी ने अयोध्या, मथुरा और काशी के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया. इसकी शुरुआत अयोध्या से की गई. साल 1992 में अयोध्या की बाबरी का विध्वंस कर दिया गया, जिसके बाद यूपी, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी सरकारों को बर्खास्त कर दिया गया. तब से लगातार बीजेपी इस मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाता रहा है. साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया. राम मंदिर का निर्माण कार्य जारी है. वहीं अब काशी और मथुरा का मुद्दा गरमा चुका है.

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अयोध्या-काशी जारी है, मथुरा की बारी है

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका था. वहीं काशी की समस्या को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण करा दिया है. अब सिर्फ मथुरा की समस्या ही बाकी बची है. यूपी चुनाव के वक्त डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इसे उछालकर नया मुद्दा छेड़ दिया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कुछ इसी तरह का बयान दे रहे थे. सीएम ने अपनी जनसभाओं में वादा किया था कि अयोध्या में राम मंदिर का काम शुरू चुका है. अब काशी विश्वनाथ धाम भी बन रहा है. ऐसे में मथुरा-वृंदावन को कैसे छोड़ा जा सकता है? वहां भी काम शुरू होगा.

ज्ञानवापी की सच्चाई आएगी सामने

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद का मुकदमा अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच चुका है. मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में सर्वे को रोकने के लिए याचिका लगाई है. इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से मुस्लिम पक्षकारों को तगड़ा झटका लगा है. सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. मस्जिद के सर्वे का काम कल (शनिवार) से शुरू होगा. वाराणसी की अदालत ने सर्वे टीम को भी 17 मई तक का समय दिया है. कोर्ट ने 17 मई को सर्वे की अगली रिपोर्ट देने के लिए कहा है.

कृष्ण जन्मभूमि विवाद में बड़ा फैसला

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श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कल (गुरुवार को) बड़ा फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट ने मथुरा की अदालत को निर्देश दिया था कि मूल वाद से जुड़े सभी प्रार्थना पत्रों को जल्द से जल्द निपटाया जाए. अदालत ने अधिकतम 4 महीने में सभी अर्जियों का निपटारा करने के आदेश दिया है. जस्टिस सलिल कुमार राय की सिंगल बेंच ने सुन्नी वक्फ बोर्ड व अन्य पक्षकारों के सुनवाई में शामिल ना होने पर एकपक्षीय आदेश जारी करने का निर्देश दिया है.

बस ताजमहल का राज अनसुलझा रहेगा

वहीं ताजमहल को लेकर हिंदू पक्ष को झटका लगा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल के इतिहास के बारे में सच को सामने लाने के लिए तथ्यों की जानकारी करने वाली कमेटी के गठन और ताज परिसर में स्थित 22 कमरों को खोले जाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि PIL व्यवस्था का दुरुपयोग न करें, पहले MA में अपना नामांकन कराएं, फिर नेट, जेआरएफ के लिए जाएं और अगर कोई विश्वविद्यालय आपको ऐसे विषय पर शोध करने से मना करता है तो हमारे पास आएं. ताजमहल किसने बनवाया जाकर रिसर्च करो, यूनिवर्सिटी जाओ, PHD करो तब कोर्ट आना.

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