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जम्मू-कश्मीर में बसे बाहरी लोग भी कर सकेंगे वोट, EC के फैसले से भड़के उमर-महबूबा

जम्मू-कश्मीर में इस साल विधानसभा चुनाव होने की संभावना है. चुनाव कराने को लेकर चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इसी बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) हृदेश कुमार ने राज्य में रह रहे बाहरी लोगों को भी वोट डालने का अधिकार देने की बात कही है.

Jammu-Kashmir Election
तदाता सूची विवाद पर अगले महीने गुपकार गठबंधन फिर करेगा सर्वदलीय बैठक (File Photo: ANI)

जम्मू-कश्मीर में इस साल विधानसभा चुनाव होने की संभावना है. चुनाव कराने को लेकर चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. बता दें कि प्रदेश से आर्टिकल-370 हटने के बाद से पहली बार विधानसभा चुनाव होंगे. इसको लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा ऐलान किया है. जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) हृदेश कुमार ने राज्य में रह रहे बाहरी लोगों को भी वोट डालने का अधिकार देने की बात कही है.

इस खबर में ये है खास

  • अब गैर कश्मीरी भी कर सकेंगे वोट
  • किरायेदारों को भी वोटिंग का अधिकार
  • 25 लाख नए वोटर जुड़ने की उम्मीद
  • मतदाता सूची तैयार करने का काम जारी
  • पिछली वोटर लिस्ट में 76 लाख मतदाता
  • रोहिंग्या मुसलमानों को वोटिंग का अधिकार नहीं

अब गैर कश्मीरी भी कर सकेंगे वोट

हृदेश कुमार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद बहुत से लोग जो मतदाता के रूप में सूचीबद्ध नहीं थे, वे अब मतदान करने के पात्र हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि जो कोई भी सामान्य रूप से रह रहा है, वह भी जन अधिनियम के प्रतिनिधित्व के प्रावधानों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में मतदाता के रूप में सूचीबद्ध होने के अवसर का लाभ उठा सकता है. उन्होंने यह भी कहा है कि अन्य राज्यों के सशस्त्र बल के जवान जो जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं, वे भी अपना नाम मतदाता सूची में जोड़ सकते हैं.

किरायेदारों को भी वोटिंग का अधिकार

चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि गैर-स्थानीय लोगों के लिए मतदान के लिए कोई रोक नहीं है. उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई जम्मू कश्मीर में कितने समय से रह रहा है. गैर स्थानीय जम्मू कश्मीर में रह रहा है या नहीं इस पर अंतिम फैसला ईआरओ करेगा. यहां किराए पर रहने वाले भी मतदान कर सकते हैं. वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए उन्हें निवास प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है.

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25 लाख नए वोटर जुड़ने की उम्मीद

जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार ने बुधवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद पहली बार मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में करीब 25 लाख नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने की उम्मीद है. उन्होंने 25 नवंबर तक मतदाता सूची के विशेष सारांश संशोधन को पूरा करने के लिए चल रही कवायद को एक चुनौतीपूर्ण कार्य बताया.

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मतदाता सूची तैयार करने का काम जारी

चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करने का यह व्यापक अभियान यह सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है कि 1 अक्टूबर 2022 या उससे पहले 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले सभी पात्र मतदाताओं का पंजीकरण कर उन्हें “त्रुटि-मुक्त” अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाए. EC द्वारा हाल ही में जारी पुनर्निर्धारित समय-सीमा के अनुसार एक एकीकृत मतदाता सूची का मसौदा 15 सितंबर को प्रकाशित किया जाएगा. जबकि सूची को लेकर दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अवधि 15 सितंबर से 25 अक्टूबर के बीच निर्धारित की गई है. इसके बाद 10 नवंबर तक दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा.

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पिछली वोटर लिस्ट में 76 लाख मतदाता

जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा 1 जनवरी 2019 के बाद पहली बार मतदाता सूची में संशोधन हो रहा है. पिछले तीन वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में युवा 18 साल की उम्र पार कर चुके होंगे और वोट डालने का अधिकारी हो गए होंगे. इसलिए हम मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 18 वर्ष से अधिक आयु के करीब 98 लाख लोग हैं, जबकि अंतिम मतदाता सूची के अनुसार सूचीबद्ध मतदाताओं की कुल संख्या 76 लाख है.

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रोहिंग्या मुसलमानों को वोटिंग का अधिकार नहीं

घाटी के बाहर रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसी विस्थापित आबादी के लिए पहले से ही एक विशेष प्रावधान है ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें. उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित प्रवासी अपने गृह निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं. नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए दिल्ली, जम्मू और उधमपुर सहित विभिन्न स्थानों पर उनके लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं और उन सभी को मतदाता पहचान पत्र दिए जाएंगे. जम्मू-कश्मीर में बसे रोहिंग्या मुसलमानों को वोटिंग का अधिकार नहीं मिलेगा.

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कुल मतदान केंद्रों की संख्या 11,370 हुई

चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस बार 600 मतदान केंद्र जोड़े गए हैं और अब जम्मू-कश्मीर में कुल मतदान केंद्रों की संख्या 11,370 हो गई है. उन्होंने कहा कि आयोग घर-घर जाकर प्रचार करने की योजना बना रहा है और योग्य मतदाताओं की जागरूकता के लिए शैक्षणिक संस्थानों में विशेष शिविर भी आयोजित करने की योजना बना रहा है. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग नए मतदाता पहचान पत्र जारी करेगा जिसमें नई सुरक्षा विशेषताएं होंगी.

उमर-महबूबा को नए नियम से आपत्ति

वहीं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को नए नियम से सख्त ऐतराज है. दोनों ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने प्रदेश में अपनी सरकार बनाने के लिए बाहरी लोगों को वोटिंग का अधिकार दिया है. चुनाव के दौरान कश्मीरियों से ज्यादा बाहरी लोग वोट करने आएंगे. उन्होंने इसे प्रदेश की जनता के अधिकारों का हनन बताया. उन्होंने मोदी सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया.

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