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मुंबई फिल्मों के लिए जानी जाती है, उद्धव ठाकरे ने भी जाते जाते कुछ ऐसा ही कहा….

CM Uddhav Thackeray
Uddhav Thackeray

Maharashtra Political Crisis looks filmy: महाराष्ट्र मुंबई के लिए जाना जाता है और मुंबई फिल्मों के लिए. मुंबई पर फिल्मों का इतना असर है कि वहां की आम जिंदगी से लेकर राजनीति तक पर फिल्मों का अक्स दिखता है. और जब से महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी(MVA) की सरकार बनी है तब से वहां की राजनीति पर फिल्मों का असर कुछ ज्यादा हो गया है. महाराष्ट्र की राजनीति में एक्शन, इमोशन, थ्रील और सस्पेंस सबकुछ है. आखिर महाराष्ट्र की राजनीति में फिल्मों जैसी घटानाएं क्यों घटित हो रही हैं इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा.

2019 में शुरु हुई महाराष्ट्र की राजनीतिक फिल्म पर सिलसिलेवार एक नजर

महाराष्ट्र की राजनीति में अत्यधिक नाटकियता 2019 से आई. महाराष्ट्र में आखिरी विधानसभा चुनाव 2019 में हुआ था. यह चुनाव भाजपा और शिवसेना ने साथ लड़ा था और सरकार बनाने के लिए जरुरी सीटें जीती थी. लेकिन शिवसेना के ढ़ाई साल वाले फॉर्मूले पर अड़ जाने के कारण भाजपा और शिवसेना का दशकों पुराना गठबंधन टूट गया. यह नाटक की शुरुआत थी. गठबंधन टूटने के बाद भाजपा ने राकांपा के वरिय नेता और शरद पवार के भतीजे अजीत पवार के जुगाड़ किए हुए विधायकों के साथ सरकार बना ली. देवेंद्र फरणवीस मुख्यमंत्री और अजीत पवार उपमुख्यमंत्री बन गए. अजीत पवार ने बेशक राकांपा के विधायकों को बहला फुसलाकर और अपने चाचा तथा पार्टी अध्यक्ष शरद पवार को धोखा देकर भाजपा के साथ सरकार बनाई थी और चंद घंटो के अंदर अपने उपर दर्ज कई मामलों का निपटारा करना लिया था लेकिन विधायकों की चाबी राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार के पास ही थी. पवार ने उस वक्त दिखाया था कि महाराष्ट्र में उनकी इच्छा के बिना कोई पत्ता नहीं हिल सकता बेशक विपक्ष में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ताकतवर जोड़ी क्यों न हो. शरद पवार के विधायक अजीत पवार को छोड़ उनके पास लौट आए और आनन फानन में बनी भाजपा की सरकार चंद घंटो में ही गिर गई. इसके बाद शिवसेना नेता संजय राउत और राकांपा नेता शरद पवार ने जी तोड़ मेहनत कर कांग्रेस को अपने साथ मिलाया और राज्य में विपरीत विचारधारा रखने वाले दलों (शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस) की महा विकास अघाड़ी की सरकार बनी. और शिवसेना की मांग पूरी हुई तथा उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने. यह पहला मौका था जब ठाकरे परिवार का दो सदस्य महाराष्ट्र सरकार में शामिल हुआ. बता दें कि महा विकास अघाड़ी सरकार में उद्धव के बेटे आदित्य भी मंत्री थे. सरकार में सबसे ताकतवर राकांपा थी. महाराष्ट्र की सत्ता में आकर भी सत्ता से बेदखल रहना भाजपा को लंबे समय से कचोट रहा था. भाजपा इस ताक में थी कि किसी भी तरह महाविकास अघाड़ी सरकार को गिराया जाए. इस कार्य के लिए उसे एकनाथ शिंदे के रुप में एक योद्धा मिला जिसने बिल्कुल फिल्मी अंदाज में महाराष्ट्र में ऑपरेशन लोटस को अंजाम दिया. भाजपा बेशक न कहे लेकिन सरकार को गिराने में उसका हाथ है इससे इनकार नहीं किया जा सकता. उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं. उन्होंने सही कहा कि मैं अनापेक्षित रुप में आया था और अनापेक्षित रुप में जा रहा हूं. फिल्मों में भी ऐसा ही होता है सब कुछ अनापेक्षित. जैसा शिवसेना और उद्धव ठाकरे के साथ हुआ. भाजपा के साथ पहले हुआ था फिलहाल भाजपा के लिए हैप्पी इंडिंग है.

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