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Mainpuri Byelection 2022: विरासत संभालने में नाकाम रही हैं डिंपल! अखिलेश के लिए नाक की लड़ाई

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए सीट जीतना नाक की लड़ाई बन चुकी है. यही कारण है कि अखिलेश ने इस सीट पर अपनी पत्नी डिंपल यादव को ही उतारा है. हालांकि डिंपल का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद ही खराब है.

Dimple Yadav
मैनपुरी सीट पर अखिलेश यादव ने पत्नी डिंपल यादव को उतारा

समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट के लिए सपा ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है. मैनपुरी सीट को मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि कहा जाता है. इसीलिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए सीट जीतना नाक की लड़ाई बन चुकी है. यही कारण है कि अखिलेश ने इस सीट पर अपनी पत्नी डिंपल यादव को ही उतारा है. हालांकि डिंपल का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद ही खराब है.

डिंपल का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं

मुलायम सिंह के सियासी उत्तराधिकारी तौर पर डिंपल को उतारना अखिलेश का निर्णय आसान नहीं है. इतिहास देखें तो विरासत बचाने के मामले में वो बहुत सफल नहीं रहीं हैं. अखिलेश यादव पहले ही डिंपल के चलते फिरोजाबाद और कन्नौज के रूप में परिवार की पारंपरिक सीटों को गंवा चुके हैं. डिंपल यादव अपने जीवन में अभी तक 4 चुनाव लड़ चुकी हैं और उनमें से उन्हें सिर्फ दो बार ही जीत हासिल हुई है. डिंपल तभी चुनाव जीते हैं, जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे.

सियासी विरासत संभालने में नाकाम

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी एवं पूर्व सांसद डिंपल यादव के राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 2009 में हुई थी. 2009 में अखिलेश ने फिरोजाबाद और कन्नौज से लोकसभा चुनाव जीता था. अखिलेश द्वारा छोड़ी गई फिरोजाबाद सीट से डिंपल का राजनीतिक डेब्यू कराया गया. लेकिन कांग्रेस के राज बब्बर से उन्हें हार का सामना करना पड़ा. डिंपल पहली बार 2012 में कन्नौज सीट से लोकसभा उपचुनाव जीतकर संसद पहुंची थी. मुख्यमंत्री बनने पर अखिलेश ने इस सीट को भी छोड़ा था.

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मोदी लहर में कन्नौज सीट गंवा दी

साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने कन्नौज से डिंपल को मैदान में उतारा था. सपा-बसपा के गठबंधन के बाद भी डिंपल इस सीट से बीजेपी प्रत्याशी से हार गईं. इस तरह से सपा परिवार की इस पारिवारिक सीट पर कमल खिल गया. हालांकि 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में डिंपल कन्नौज से ही सांसद चुनी गई थी. लेकिन उस वक्त भी डिंपल को कन्नौज को जिताने के लिए अखिलेश को बहुत पसीना बहाना पड़ा था.

अखिलेश पर गढ़ बंचाने का दवाब

अखिलेश यादव के सामने अब सपा के अभेद्य गढ़ों को बचाने का दबाव है. वे पहले ही बंदायू, आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीटों को गंवा चुके हैं. मुलायम सिंह के जमाने में इन सभी सीटों को सपा का गढ़ कहा जाता था. मैनपुरी सीट पर भी 26 सालों से मुलायम सिंह यादव का दबदबा था. अब पहली बार मैनपुरी में मुलायम सिंह के बिना कोई चुनाव होने वाला है. मुलायम परिवार के कई सदस्यों को यहां की जनता ने अपना पूरा आशीर्वाद दिया है. अब देखना होगा कि मुलायम की अनुपस्थिति में डिंपल को कितना प्यार मिलता है?

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