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4 साल पहले भी PFI पर इस राज्य में BJP सरकार ने लगाया था बैन, तब कोर्ट से मिली थी राहत

4 साल पहले भी झारखंड में पीएफआई पर प्रतिबंध लग चुका है. हालांकि कोर्ट से उस समय पीएफआई को राहत मिल गई थी. पीएफआई 2006 में बना था. यह पहला मौका है, जब PFI पर राष्ट्रीय स्तर पर बैन बना लगा है.

PFI Supporters
4 साल पहले भी PFI पर इस राज्य में BJP सरकार ने लगाया था बैन (File Photo: ANI)

नई दिल्ली. टेरर फंडिंग और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते मोदी सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उसके 8 सहयोगी संगठनों पर 5 साल के प्रतिबंध लगा दिया गया. कुछ दिन पहले पीएएफआई से जुड़े ठिकानों पर एनआईए समेत कई एजेंसियों ने छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान पीएफआई से जुड़े 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इसी के कुछ दिन बाद ही मोदी सरकार ने यह कदम उठाया था.

इस खबर में ये है खास-

  • 4 साल पहले झारखंड में लगा बैन
  • 2018 में रघुवर दास ने लिया था एक्शन
  • PFI ने बैन के खिलाफ दी था याचिका
  • अगस्त 2018 में हाईकोर्ट से हटा प्रतिबंध

4 साल पहले झारखंड में लगा बैन

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने PFI और उससे जुड़े संगठनों को देश के खतरा करार दिया और UAPA के तहत 5 साल के लिए पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों पर बैन लगा दिया गया है. ऐसा नहीं है कि पीएफआई पर पहली बार बैन लगा है. 4 साल पहले भी झारखंड में पीएफआई पर प्रतिबंध लग चुका है. हालांकि कोर्ट से उस समय पीएफआई को राहत मिल गई थी. पीएफआई 2006 में बना था. यह पहला मौका है, जब PFI पर राष्ट्रीय स्तर पर बैन बना लगा है.

2018 में रघुवर दास ने लिया था एक्शन

अगर पीएफआई पर पहले बैन की बात करें तो 4 साल पहले झारखंड में पीएफआई पर बैन लगा था. 2018 में राज्य में बीजेपी की रघुवर दास सरकार ने फरवरी में पीएफआई को प्रतिबंधित कर दिया था. अपने आदेश में सरकार ने कहा था कि खूफिया सूचना के अनुसार पीएफआई के सदस्यों का संबंध आईएसआईएस से है. आदेश में कहा गया था कि झारखंड के पाकुड़ और साहिबागंज में पीएफआई सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहा है.

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PFI ने बैन के खिलाफ दी था याचिका

इसके बाद पीएफआई झारखंड चैप्टर के महासचिव अब्दुल बदूद ने प्रतिबंध हटाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिका में कहा गया था कि सरकार ने आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1908 के तहत पीएफआई को बैन किया है. जबकि यह धारा 1932 से ही अस्तित्व में नहीं है. याचिका में कहा गया कि सरकार ने कारण बताओ नोटिस दिए बिना सीधे बैन लगा दिया था.

अगस्त 2018 में हाईकोर्ट से हटा प्रतिबंध

मामले पर रांची हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की बेंच सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार द्वारा लगाए गए पीएफआई बैन को 28 अगस्त को 2018 को हटा दिया था. साथ ही कोर्ट ने यह कहते हुए सरकारी अधिसूचना को रद्द कर दिया कि इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित नहीं किया गया. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि सरकार गलतियों का दूर करके दोबारा पीएफआई को बैन कर सकती है.

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