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Rajasthan: पायलट की ताजपोशी नहीं होने देगा गहलोत गुट, सचिन के पास अब कितने रास्ते बचे?

मामला इतना जटिल है कि खुद सोनिया गांधी के पसीने छूट रहे हैं. गांधी परिवार की ओर से एक समझाया जा रहा है, तो दूसरा खफा हो रहा है. फिलहाल गहलोत और पायलट दोनों दिल्ली में डटे हुए हैं. इस सियासी ड्रामे में अब कौन का नया मोड आएगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं.

Sachin Pilot
सचिन पायलट का क्या होगा भविष्य?

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी देश जोड़ने निकली है, हालांकि राजस्थान में पार्टी के अंदर ही तोड़-फोड़ मची हुई है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट की बीच की दूरी एक बार फिर सबके सामने आ गई है. दोनों की लड़ाई दिल्ली पहुंच गई है. मामला इतना जटिल है कि खुद सोनिया गांधी के पसीने छूट रहे हैं. गांधी परिवार की ओर से एक समझाया जा रहा है, तो दूसरा खफा हो रहा है. फिलहाल गहलोत और पायलट दोनों दिल्ली में डटे हुए हैं. इस सियासी ड्रामे में अब कौन का नया मोड आएगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं.

इस खबर में ये है खास

  • केंद्रीय नेतृत्व को दी धमकी
  • पायलट की नहीं होने देंगे ताजपोशी
  • CM नहीं बने पायलट तो फिर क्या…?
  • पायलट के पास कितने विकल्प बचे?

केंद्रीय नेतृत्व को दी धमकी

राजस्थान में संकट पैदा होने के बाद मुख्यमंत्री गहलोत पहली बार दिल्ली पहुंचे, यहां उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की. वहीं जयपुर में ही हलचल देखने को मिली. अशोक गहलोत गुट के विधायक गोविंद राम मेघवाल ने सीधे पार्टी आलाकमान को ही धमकी दे दी. मेघवाल ने खुली धमकी देते हुए कहा कि यदि दूसरे गुट के नेता को सीएम बनाया गया तो हम सभी विधायक इस्तीफा दे देंगे. मेघवाल के बयान को हाईकमान पर दबाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

पायलट की नहीं होने देंगे ताजपोशी

गहलोत सरकार के चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा ने भी सचिन पायलट पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि हम लोग मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार हैं, लेकिन हम उसे सीएम नहीं बर्दाश्त कर सकते. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति बीजेपी और अमित शाह के ऑफिस एवं घर में जाकर बैठा हो, जिसके पास हरियाणा पुलिस का पहरा रहा हो. वो विश्वासघाती हमारा नेता नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि उसे (पायलट) को समर्थन करने पर जनता हमको छोड़ेगी नहीं और हम अगला चुनाव नहीं जीत सकेंगे.

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CM नहीं बने पायलट तो फिर क्या…?

ऐसी परिस्थितियों में सवाल ये है कि यदि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो वे क्या करेंगे? सूत्रों के मुताबिक सचिन पायलट अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं. वे अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं और बस पार्टी आलाकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. वैसे भी संख्याबल के हिसाब से सचिन पायलट पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भारी रहे हैं. जानकारी के मुताबिक 80-90 विधायकों ने सीएम गहलोत का समर्थन किया है.

पायलट के पास कितने विकल्प बचे?

इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को क्लीनचिट मिलने का ये मतलब नहीं है कि उनका इसमें बिल्कुल हाथ नहीं है. क्लीनचिट मिलने से गहलोत के सामने अभी सारे विकल्प खुले हैं. वे चाहें तो पार्टी अध्यक्ष बन सकते हैं और चाहें तो मुख्यमंत्री. सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी के साथ मुलाकात में गहलोत ने सीएम पद को स्वीकार किया है. यही नहीं अध्यक्ष पद के लिए नामित करने पर सोनिया को धन्यवाद दिया है. मतलब साफ है कि गहलोत ने सीएम की कुर्सी चुन ली है. अब पायलट के सामने दिल्ली आने का रास्ता खुला है.

Rajasthan: अशोक गहलोत का क्या होगा भविष्य? 3 प्वाइंट में समझे सारे समीकरण

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  1. राजस्थान में पार्टी को जैसे हालातों का सामना करना पड़ रहा है, पंजाब में भी कुछ ऐसा ही हुआ था. पंजाब चुनाव के नतीजों को देखते हुए गहलोत और पायलट में सुलह कराना बहुत जरूरी है. पार्टी आलाकमान दोनों नेताओं को समझाए और दोनों नेता अपनी-अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं का त्याग करके पार्टी हित में सोचें. गहलोत गुट से 2 डिप्टी सीएम बनाकर पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इससे दोनों गुट खुश हो सकते हैं.
  2. मुमकिन है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री गहलोत और सचिन पायलट, दोनों को दिल्ली बुला ले और प्रदेश की जिम्मेदारी किसी तीसरे शख्स को सौंप दें. इससे गुटबाजी पर काफी हद तक लगाम लग सकती है. दोनों के समर्थक भी शांत हो जाएंगे. इसके अलावा प्रदेश में दोनों नेताओं के अलावा भी एक नया लीडर पैदा हो जाएगा.
  3. ताजा हालातों को देखते हुए एक बात तो साफ है कि गहलोत कभी भी पायलट की तरक्की बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. पायलट को हमेशा ऐसे हालातों का सामना ना करना पड़े, इसके लिए अच्छा होगा कि वे कांग्रेस पार्टी छोड़ दें. कांग्रेस को अलविदा कहकर वे बीजेपी भी ज्वाइन कर सकते हैं. उनके दोस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी यही किया था.
  4. इसके अलावा वे गुलाम नबी आजाद की तरह अपनी नई पार्टी भी बना सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो वे आने वाले समय में कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं. पंजाब चुनाव से ठीक पहले कैप्टन अमरिंदर ने भी कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बना ली थी. नतीजतन पंजाब में कांग्रेस की लुटिया डूब गई.

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