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शीना बोरा हत्याकांड: 7 साल बाद जेल से बाहर निकलीं इंद्राणी मुखर्जी, बोलीं- आज केवल घर जाना है

शीना बोरा हत्याकांड की मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी शुक्रवार को भायखला जेल से बाहर आ गईं. सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को इंद्राणी मुखर्जी को जमानत दी थी.

Indrani Mukherjee
शीना बोरा हत्याकांड: 7 साल बाद जेल से बाहर निकलीं इंद्राणी मुखर्जी (PTI)

शीना बोरा हत्याकांड की मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी शुक्रवार को भायखला जेल से बाहर आ गईं. सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को इंद्राणी मुखर्जी को जमानत दी थी. जेल से रिहा होने के बाद इंद्राणी ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं और अभी घर जा रही हूं. आगे की कोई योजना नहीं है. आज केवल घर जाना है.

इंद्राणी मुखर्जी 7 साल से मुंबई की जेल में बंद थीं. 10 साल पहले 2012 में शीना बोरा की हत्या की गई थी और 2015 में इंद्राणी मुखर्जी को पकड़ा गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने 6 साल से अधिक समय तक जेल में रहने के आधार पर इंद्राणी मुखर्जी को जमानत दे दी थी. जमानत के लिए इंद्राणी मुखर्जी ने दलील दी थी कि वह 6 साल से जेल में हैं और मुकदम के जल्द निपटने की कोई संभावना नहीं है.

इंद्राणी मुखर्जी और उनकी बेटी शीना बोरा (बाएं) की तस्वीर. (PTI)

इंद्राणी मुखर्जी अपने पहले पति शीना बोरा के मर्डर केस में पकड़ी गई थीं. सीबीआई ने भी इस मामले की जांच की, लेकिन केस अब भी अनसुलझा है. इसका रहस्य अब तक सामने नहीं आ पाया है. पहले पुलिस पूछताछ में इंद्राणी मुखर्जी ने शीना बोरा के शव को अपनी बहन बताया था लेकिन पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि वह उसकी बेटी थी. दरअसल इंद्राणी ने दो शादियां की थीं और शीला बोरा उसके प​हले पति की बेटी थी.

पिछले साल इंद्राणी मुखर्जी ने सीबीआई को लिखे पत्र में क्लेम किया था कि शीना बोरा जिंदा है और कश्मीर में है. इस दावे से सभी हैरत में पड़ गए थे. एक दशक पहले मुंबई के हाई प्रोफाइल सोसायटी में आनर किलिंग के इस मामले ने मां बेटी के संबंधों को तार तार कर दिया था.

बताया जाता है कि मां को अपनी बेटी का कत्ल इसलिए करना पड़ा, क्योंकि बेटी जिस लड़के से प्यार करती थी, वो रिश्ते में उसका सौतेला भाई लगता था. जांच में सामने आए नाटकीय घटनाक्रमों से पूरा मामला किसी थ्रिलर फिल्म जैसा हो गया.

महाराष्ट्र के रायगढ़ में 2012 में एक लड़की का अधजला शव मिला था. स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी तो शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त करने की कोशिश की गई, लेकिन शव की पहचान नहीं हो पाई. पुलिस शव का सैंपल लेकर फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए भेजा और अंतिम संस्कार कर दिया था. तीन साल तक मामले में कोई सुराग हाथ नहीं लगा. 2015 में पुलिस को एक ड्राइवर के खुलासे से बड़ी लीड मिली थी और उसके बाद इंद्राणी मुखर्जी को पकड़ा गया था.

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