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तेजस्वी यादव जैसे आखिर क्यों नहीं बन पाए अखिलेश? देखिए दोनों की राजनीति में कितना है फर्क?

बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव का कद लगातार बढ़ रहा है, वहीं यूपी में अखिलेश यादव अपनी राजनीतिक विरासत को भी बचाने में फेल हो रहे हैं. भले ही दोनों नेताओं में कई सारी समानताएं हों, लेकिन दोनों की राजनीति और रणनीति में काफी अंतर है. यही तेजस्वी की सफलता और अखिलेश की नाकामयाबी का सबसे बड़ा कारण है.

Tejashwi Yadav-Akhilesh Yadav
तेजस्वी ने जो करके दिखाया आखिर वो अखिलेश यादव क्यों नहीं कर पाए? (File Photo: ANI)

यूपी और बिहार- दो प्रदेश, राजद और सपा- यादवों की दो पार्टियां, लालू और मुलायम- यादव साम्राज्य के दो पुरोधा, तेजस्वी और अखिलेश- यादव वंश के दो युवराज… यूं तो तेजस्वी से अखिलेश हर मायने में सीनियर हैं, लेकिन राजनीतिक मैदान में तेजस्वी कहीं ज्यादा बेहतर कर रहे हैं. बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव का कद लगातार बढ़ रहा है, वहीं यूपी में अखिलेश यादव अपनी राजनीतिक विरासत को भी बचाने में फेल हो रहे हैं. भले ही दोनों नेताओं में कई सारी समानताएं हों, लेकिन दोनों की राजनीति और रणनीति में काफी अंतर है. यही तेजस्वी की सफलता और अखिलेश की नाकामयाबी का सबसे बड़ा कारण है.

इस खबर में ये है खास

  • तेजस्वी से काफी सीनियर हैं अखिलेश
  • दोनों यादव वंश के युवराज हैं
  • अखिलेश से रेस में आगे निकले तेजस्वी
  • दोनों की राजनीति में क्या अंतर है?
  • सांप्रदायिक बयानों से बचते हैं तेजस्वी

तेजस्वी से काफी सीनियर हैं अखिलेश

अखिलेश यादव को उम्र और राजनीतिक तजुर्बे दोनों में ही तेजस्वी यादव से सीनियर हैं. अखिलेश 50 साल के करीब हैं, जबकि तेजस्वी अभी सिर्फ 32 साल के है. अखिलेश का राजनीतिक करियर 2000 के करीब शुरू हुआ था, जबकि तेजस्वी ने 2015 में राजनीति में कदम रखा था. डिप्टी सीएम के तौर पर तेजस्वी के पास सिर्फ ढाई साल का ही अनुभव है, जबकि अखिलेश यादव पूरे 5 साल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ चुके हैं.

दोनों यादव वंश के युवराज हैं

अखिलेश और तेजस्वी दोनों को ही राजनीति विरासत में मिली है. भारतीय राजनीति में अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव और तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद यादव का आज भी डंका बजता है. दोनों ही नेताओं ने आपातकाल के दौरान ही राजनीतिक जीवन की शरुआत की थी. यूपी में मुलायम यादव ने सपा तो बिहार में लालू यादव ने राजद का गठन किया. दोनों अपने-अपने प्रदेश के कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. दोनों का राजनीतिक कद इतना बड़ा है कि वे केंद्र सरकार तक में अपनी हैसियत रखते थे. अब सपा की कमान अखिलेश के हाथों में है, तो राजद की जिम्मेदारी तेजस्वी उठा रहे हैं.

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अखिलेश से रेस में आगे निकले तेजस्वी

यदि अखिलेश और तेजस्वी की राजनीतिक यात्रा को देखा जाए, तो अखिलेश से तेजस्वी काफी आगे निकल चुके हैं. यूपी में अखिलेश लगातार बीजेपी के हाथों शर्मनाक हार का सामना कर रहे हैं, वहीं बिहार में तेजस्वी उसी भगवा पार्टी के छक्के छुड़ाने में लगे हैं. तेजस्वी की रणनीति से बिहार में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन हो गया और राजद एक बार फिर से सत्ता में वापस आ गई है. तेजस्वी ने दूसरी बार डिप्टी सीएम बनकर साबित कर दिया कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं. वहीं अखिलेश यादव अभी भी एक जीत के लिए तरस रहे हैं.

दोनों की राजनीति में क्या अंतर है?

यदि अखिलेश और तेजस्वी की राजनीति को गौर से देखेंगे तो तेजस्वी की सफलता के राज भी समझ जाएंगे. अखिलेश की सबसे बड़ी कमी ये है कि वे अपने परिवार को भी एकजुट नहीं रख सके हैं. वहीं तेजस्वी अपने परिवार को डील करने में सफल रहे हैं. अखिलेश के सामने जैसे चाचा शिवपाल चुनौती हैं, ठीक उसी तरह से तेजस्वी के सामने उनके बड़े भाई तेज प्रताप चुनौती खड़ी करते रहते हैं. लेकिन वे कभी भी तेज प्रताप के विषय में कुछ भी गलत बयानबाजी नहीं करते हैं. जबकि अखिलेश में इस जीच की कमी है. वे अपने चाचा के अलावा अपने पिता मुलायम सिंह का भी सार्वजनिक मंच पर अपमान कर चुके हैं.

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सांप्रदायिक बयानों से बचते हैं तेजस्वी

अखिलेश और तेजस्वी दोनों का वोटबैंक ‘मुस्लिम-यादव’ ही है. अखिलेश अपने वोटबैंक को बचाकर रखने के लिए अक्सर सांप्रदायिक बयान दे देते हैं, वहीं तेजस्वी ऐसे बयानों से बचते रहते हैं. अखिलेश की तरह तेजस्वी ना तो मंदिर-मस्जिद के चक्कर काटते हैं. वे सिर्फ मुद्दों पर राजनीति करते हैं. बिहा विधानसभा चुनाव को देखें तो तेजस्वी ने अपने मुद्दे सेट किए थे और उन्हीं पर बात कर रहे थे. बीजेपी उन्हें मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वे नहीं भटके. अंत में बीजेपी को भी उन्हीं मुद्दों पर आना पड़ा. वहीं यूपी में अखिलेश यादव ऐसा करने में नाकाम रहे थे. वे बीजेपी के बुने जाल में फंसकर गलत बयानबाजी ही करते रहे थे.

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