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उत्तर प्रदेश विधानसभा की बदलेगी तस्वीर, जानें कैसे बसपा की राह हो सकती है और मुश्किल…

चुनाव परिणाम के बाद सभी दलों के सदस्यों की संख्या में वृद्धि और कमी हुई है इसलिए उत्तर प्रदेश विधानसभा का नजारा इस बार थोड़ा अलग दिखेगा.

Yogi Adityanath
Yogi Adityanath

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब राज्य में सरकार गठन की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं. उत्तर प्रदेश में एकबार फिर योगी आदित्यनाथ( Yogi Adityanath) के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बनने जा रही है जबकि मुख्य विपक्षी दल होगी समाजवादी पार्टी (सपा). चुकि चुनाव परिणाम के बाद सभी दलों के सदस्यों की संख्या में वृद्धि और कमी हुई है इसलिए उत्तर प्रदेश विधानसभा का नजारा इस बार थोड़ा अलग दिखेगा. दलों की मौजूदगी के अनुपात में अब विधानभवन में उन्हें आवंटित होने वाले कक्षों में भी बदलाव हो सकता है.

खबर में खास

  • किस दल की कितनी सीटें
  • विधानभवन में कार्यालय कक्ष आवंटन का नियम
  • बसपा के लिए मुश्किल
  • भगवा टोपी पहने दिख सकते हैं भाजपा विधायक

किस दल की कितनी सीटें

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा सबसे बड़े दल के रुप में उभरी. 403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा ने 255, मुख्य विपक्षी दल सपा ने 111, भाजपा की सहयोगी अपना दल (लो.) ने 12, निषाद पार्टी ने 6, सपा की सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल ने 8, सुभासपा ने 6, कांग्रेस ने 2, जनसत्ता दल ने 2 और बसपा ने 1 सीटें जीती हैं.

विधानभवन में कार्यालय कक्ष आवंटन का नियम

नियम के अनुसार कम से कम एक प्रतिशत यानी चार सीटें जीतने वाले दल को विधानभवन में कार्यालय के लिए कक्ष आवंटित होता है. इस हिसाब से कांग्रेस, बसपा और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) को कक्ष आवंटित होने में मुश्किल आ सकती है. विधानसभा के विशेष सचिव ब्रजभूषण दुबे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, छोटे दलों को कक्ष आवंटित करना विधानसभा अध्यक्ष के विवेक और कक्ष की उपलब्धता पर निर्भर करता है. छोटे दलों से आशय चार से कम सीटें पाने वाले दलों से है.’ दुबे ने कहा, पिछली बार राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) को एक सीट मिली थी और उन्हें कक्ष आवंटित नहीं किया गया था, लेकिन इस बार आठ सीटें मिली हैं, तो इस दल का विधानभवन में कार्यालय होगा. विशेष सचिव ने बताया कि बड़े दलों को कक्ष के साथ ही कर्मचारी भी उपलब्ध कराए जाते हैं.

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बसपा के लिए मुश्किल
चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही मायावती के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 बेहद निराशाजनक रहा है. उनके दल बसपा के लिए इस बार विधानभवन में कार्यालय मिलना भी मुश्किल है.

भगवा टोपी पहने दिख सकते हैं भाजपा विधायक

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इस बार पार्टी के विधायक भगवा टोपी पहने नजर आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए पार्टी ने कोई निर्देश नहीं दिया है, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में रोड शो के दौरान भगवा टोपी पहनी थी तो विधायक भी सदन में ऐसी ही टोपी पहनकर आ सकते हैं.

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