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बीजेपी में बीएस येदियुरप्पा का क्यों बढ़ा कद? कर्नाटक चुनावों में कितना मिलेगा फायदा?

बीजेपी संसदीय बोर्ड (BJP Parliamentary Board) से इस बार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. तो वहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) को जगह मिली.

BS Yediyurappa
बीजेपी में बीएस येदियुरप्पा का कद बढ़ा (File Photo: ANI)

बीजेपी (BJP) ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है. ‘मिशन 2024’ के लिए सत्ता से लेकर संगठन तक सारे पेंच कसने में लगी है. बीजेपी ने 17 अगस्त को नए संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति का ऐलान किया है. संसदीय बोर्ड से इस बार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. तो वहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) को जगह मिली.

इस खबर में ये है खास

  • 2019 में CM की कुर्सी से उतारा
  • येदियुरप्पा को दोबारा क्यों मिली जगह?
  • कर्नाटक चुनावों में कितना मिलेगा फायदा?

2019 में CM की कुर्सी से उतारा

2019 में येदियुरप्पा सरकार में कथित ‘कुशासन’ के कारण बीजेपी ने कर्नाटक का मुख्यमंत्री बदल दिया था. पार्टी ने ना सिर्फ येदियुरप्पा को कुर्सी से उतारा, बल्कि उनके बेटे बीवाय विजयेंद्र को विधान परिषद की टिकट नहीं दिया. इसके बाद लगा कि कर्नाटक की राजनीति से अब येदियुरप्पा युग का अंत हो गया. हालांकि उस वक्त भी येदियुरप्पा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहा था कि विजयेंद्र को टिकट देने से इनकार को बढ़ा चढ़ाकर देखने की जरूरत नहीं है और उम्मीद है कि पार्टी निकट भविष्य में उन्हें बड़ा पद देगी. उनकी बात अब सही साबित हुई है, पार्टी ने एक बार फिर से उनका कद ऊंचा कर दिया.

येदियुरप्पा को दोबारा क्यों मिली जगह?

बीएस येदियुरप्पा का कद बढ़ाना बीजेपी की मजबूरी है. दरअसल येदियुरप्पा का संबंध लिंगायत समुदाय से हैं. प्रदेश की कुल आबादी में लिंगायत समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है. येदियुरप्पा के चलते ही ये समुदाय बीजेपी से जुड़ा है. 2013 में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे येदियुरप्पा को पार्टी ने बर्खास्त कर दिया था. जिसके बाद येदियुरप्पा ने अपनी अलग पार्टी (कर्नाटक जनता पार्टी) बनाई थी. इससे लिंगायत वोटबैंक दो हिस्सों में बंट गया. अगले चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर और सीटें दोनों में काफी गिरावट आई. 2014 में येदियुरप्पा की फिर से वापसी हुई और पार्टी ने 28 लोकसभा सीटों में से 17 पर जीत हासिल की थी.

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BJP: नितिन गडकरी नहीं लड़ेंगे 2024 का चुनाव? CM शिवराज के भविष्य पर भी सस्पेंस

कर्नाटक चुनावों में कितना मिलेगा फायदा?

कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. विधानसभा चुनावों के चलते ही येदियुरप्पा को खुश करने का प्रयास किया गया है. येदियुरप्पा के नाराज होने से लिंगायत समाज भी नाराज हो सकता था. हालांकि मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी लिंगायत समाज से ही हैं. लेकिन लिंगायत मठों का समर्थन सीएम बसवराज की जगह येदियुरप्पा पर ज्यादा है. यही वजह है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे रहने के बाद भी येदियुरप्पा का कद छोटा नहीं होता. दरअसल राज्य में 500 से अधिक मठ हैं. इनमें से अधिकांश लिंगायत मठ हैं. राज्य में लिंगायत मठ बहुत शक्तिशाली हैं और सीधे राजनीति में शामिल हैं. चुनावों के दौरान इन मठों का प्रभाव काफी बढ़ जाता है.

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