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टेक-ऑटो

डर से कांपेंगे चीन-पाकिस्तान, भारत के ‘घातक’ ड्रोन की सफल उड़ान

DRDO flight Autonomous Flying Wing Technology Demonstrator
DRDO ने ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर की पहली सफल उड़ान (फोटो DRDO)

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर की (Autonomous Flying Wing Technology Demonstrator- AFWTD) पहली उड़ान का टेस्ट किया. इसे पूरी तरह से स्वायत्त मोड में संचालन करते हुए, विमान ने एक आदर्श उड़ान का प्रदर्शन किया. इसने खुद ही टेकऑफ लिया, वे प्वाइंट नेविगेशन और आसानी से लैंडिंग की. इस परीक्षण कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में की गई.

खबर में खास

  • एवियोनिक्स सिस्टम स्वदेशी
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी
  • ये ड्रोन भारत का भविष्य
  • भारत से आगे हैं पड़ोसी देश

एवियोनिक्स सिस्टम स्वदेशी

टेक-ऑफ, वे पॉइंट नेविगेशन और एक आसान टचडाउन समेत ये उड़ान भविष्य के मानव रहित विमानों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को साबित करने के मामले में एक प्रमुख मील का पत्थर है और ऐसी सामरिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इसे बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (ADE) ने बनाया है. ये एक छोटे टर्बोफैन इंजन से उड़ता है. विमान के लिए उपयोग किए जाने वाले एयरफ्रेम, अंडर कैरिज और संपूर्ण उड़ान नियंत्रण और एवियोनिक्स सिस्टम स्वदेशी हैं.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ को बधाई दी है. साथ ही कहा, यह स्वायत्त विमानों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है और महत्वपूर्ण सैन्य प्रणालियों के संदर्भ में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मार्ग प्रशस्त करेगा. रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने प्रणाली के डिजाइन, विकास और परीक्षण से जुड़ी टीमों के प्रयासों की सराहना की.

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ये ड्रोन भारत का भविष्य

मानव रहित विमान यानी यूएवी (UAV) एक 21सदीं की लड़ाई में अहम हिस्सा हैं. पिछले 10 सालों में इनका इस्तेमाल बढ़ गया है. यूएवी यानी ड्रोन तकनीक तक अब आतंकियों की भी पहुंच बनती जा रही है. ये इनसे हमला करते हैं. लोगों को मारते हैं. नुकसान पहुंचाते हैं. अक्सर आप खबरों में सुनते हैं कि हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का तरफ से ड्रोन भेजा गया. जिसे सेना पकड़कर नष्ट कर देती है.

भारत से आगे हैं पड़ोसी देश

पाकिस्तान और चीन से भारत ड्रोन और यूएवी के मामले में एक दशक पीछे है. पाकिस्तान और चीन लड़ाकू ड्रोन समेत कई हथियारों को विकसित करने और पाने के लिए एकदूसरे की मदद कर रहे हैं. पिछले साल ही इसकी तस्वीर सामने आई थी. कुछ टेस्ट भी हुए थे. इसकी जानकारियों को पूरी तरह से गुप्त रखा गया था.

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