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SSLV: अंतरिक्ष में इतिहास रचेगा ‘इसरो’, SSLV मिशन की उल्टी गिनती शुरू, सुबह 9:18 बजे हुआ लॉन्च

अपने भरोसेमंद PSLV, GSLV के माध्यम से सफल अभियानों को अंजाम देने में एक खास जगह बनाने के बाद इसरो लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) से पहला प्रक्षेपण करेगा, जिसका उपयोग पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों को स्थापित करने के लिए किया जाएगा.

SSLV
अंतरिक्ष में भारत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक (File Photo: ANI)

अंतरिक्ष में भारत के लिए आज का दिन बड़ा अहम होने वाला है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज देश का नया रॉकेट लॉन्च किया है. अपने भरोसेमंद PSLV, GSLV के माध्यम से सफल अभियानों को अंजाम देने में एक खास जगह बनाने के बाद इसरो लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) से पहला प्रक्षेपण किया है. SSLV को श्रीहरिकोटा से रविवार सुबह 9.18 बजे लॉन्च किया गया. इसका उपयोग पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों को स्थापित करने के लिए किया जाएगा.

इस खबर में ये है खास

  • छोटे उपग्रह भेजने के काम आएगा
  • PSLV से छोटा और हल्का है SSLV
  • श्रीहरिकोटा से सुबह 9.18 बजे होगा प्रक्षेपित
  • SSLV के साथ दो उपग्रह भेजे जा रहे

छोटे उपग्रह भेजने के काम आएगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने पहले लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान मिशन के साथ रविवार को एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और एक छात्र उपग्रह का प्रक्षेपण किया गया है. इस ऐतिहासिक मिशन को यहां से लगभग 135 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से अंजाम दिया गया है. इसरो के वैज्ञानिक ऐसे छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए पिछले कुछ समय से लघु प्रक्षेपण यान विकसित करने में लगे हुए हैं, जिनका वजन 500 किलोग्राम तक है और जिन्हें पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जा सकता है.

PSLV से छोटा और हल्का है SSLV

SSLV 34 मीटर लंबा है जो PSLV से लगभग 10 मीटर कम है और PSLV के 2.8 मीटर की तुलना में इसका व्यास 2 मीटर है. एसएसएलवी का उत्थापन द्रव्यमान 120 टन है, जबकि पीएसएलवी का 320 टन है, जो 1,800 किलोग्राम तक के उपकरण ले जा सकता है. रविवार के मिशन में एसएसएलवी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (IOS)-02 और एक सह-यात्री उपग्रह ‘आजादीसैट’ को ले जाएगा – जिसे ‘स्पेस किड्ज इंडिया’ की छात्र टीम द्वारा विकसित किया गया है.

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श्रीहरिकोटा से सुबह 9.18 बजे होगा प्रक्षेपित

इसरो के सूत्रों के अनुसार अन्य अभियानों की तुलना में उलटी गिनती को 25 घंटे से घटाकर पांच घंटे कर दिया गया है और रविवार को इसे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से सुबह 9.18 बजे प्रक्षेपित किया गया, जिसके लिए उलटी गिनती रविवार को ही सुबह 4.18 बजे शुरू हुई थी. लगभग 13 मिनट की यात्रा के बाद, एसएसएलवी सबसे पहले ईओएस-02 को इच्छित कक्षा में स्थापित करेगा. इस उपग्रह को इसरो द्वारा डिजाइन किया गया है.

SSLV के साथ दो उपग्रह भेजे जा रहे

SSLV इसके बाद ‘आज़ादीसैट’ को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा. यह उपग्रह 8 किलोग्राम का क्यूबसैट है, जिसे देश भर के सरकारी स्कूलों की छात्राओं द्वारा स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में डिजाइन किया गया है. ‘आज़ादीसैट’ में 75 अलग-अलग उपकरण हैं, जिनमें से प्रत्येक का वजन लगभग 50 ग्राम है. देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को इन उपकरणों के निर्माण के लिए इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया गया था जो ‘स्पेस किड्स इंडिया’ की छात्र टीम द्वारा एकीकृत हैं. ‘स्पेस किड्ज इंडिया’ द्वारा विकसित जमीनी प्रणाली का उपयोग इस उपग्रह से डेटा प्राप्त करने के लिए किया जाएगा.

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