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IAS अफसर के लिए पीएम मोदी और CM ममता बनर्जी में जंग

IAS Alapan Bandopadhyay

नई दिल्ली : केंद्र की मोदी सरकार और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के बीच इस समय एक आईएएस अधिकारी को लेकर तनातनी चल रही है. इन दोनों सरकारों की खींचतान के केंद्र में हैं मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय. जहां केंद्र सरकार ने अलपन को पश्चिम बंगाल से दिल्ली बुलाया है वहीं ममता ने उन्हें 3 महीने का सेवा विस्तार दिया है.

अलपन को लेकर खींचतान की शुरुआत मानी जा रही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दौरे से जहां वो तूफान यास से हुए नुकसान की समीक्षा करने के लिए 28 मई को उड़ीसा और पश्चिम बंगाल पहुंचे थे. मोदी की तैयारी मुख्यमंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक करने की थी लेकिन ममता बनर्जी ने पहले तो मोदी को लगभग आधे घंटे का इंतजार कराया और उसके बाद ममता ने कलाइकुंडा हवाई पट्टी पर मोदी से मुलाकात की और तूफान से हुए नुकसान पर उन्हें एक रिपोर्ट सौंपकर अगली मीटिंग के लिए निकल गईं..

ममता ने कराया इंतजार
ममता ने तो इंतजार कराया ही लेकिन बंगाल के मुख्य सचिव अलपन भी ममता के साथ ही देरी से पहुंचे… और कहा जा रहा है कि यहीं से अलपन मोदी सरकार के निशाने पर आ गए. उसी 28 मई की रात अलपन को केंद्र ने वापस बुला लिया था.

3 महीने के लिए बढ़ा था कार्यकाल
केंद्र की ओर से कहा गया कि अलपन 31 मई को सुबह 10 बजे दिल्‍ली में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को रिपोर्ट करें. इसके अलावा केंद्र ने बंगाल सरकार से कहा है कि वह अलपन को जल्द रिलीव कर दे. जबकि ममता बनर्जी ने 24 मई को ही अलपन बंदोपाध्‍याय का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ाया था.

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विपक्ष ने की आलोचना
केंद्र के इस फैसले की टीएमसी के साथ ही कांग्रेस ने भी आलोचना की है…कांग्रेस ने जहां इसे राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उठाया गया कदम बताते हुए संघवाद पर ‘अक्षम्य हमला’ करार दिया है… वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को तत्काल वापस लिये जाने की मांग की.

हार को नहीं पचा पा रही बीजेपी
ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी बंगाल की हार को पचा नहीं पा रही है इसलिये ऐसी मुश्किल खड़ी कर रही है. आखिर इसमें मुख्य सचिव की क्या गलती है?कांग्रेस महासचिव और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक सवाल भी किया कि क्या प्रधानमंत्री और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग इसका खुलासा करेंगे कि मुख्य सचिव को सेवा विस्तार देने के चार दिनों के बाद ही उन्हें किस कारण से वापस बुलाया गया. सुरजेवाला ने दावा किया कि केंद्र सरकार के कदमों से ऐसा लग रहा है कि वह हाल ही में निर्वाचित तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाना चाहती है.

ममता ने पीएम मोदी को लिखा लेटर
ममता ने अलपन बंदोपाध्याय को दिल्ली बुलाने के केंद्र के आदेश को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए मोदी को 5 पन्नों का पत्र लिखकर यह आदेश वापस लेने का अनुरोध किया था. बनर्जी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार बंदोपाध्याय को कार्यमुक्त नहीं करेगी.

शुभेंद ने बिगाड़ा खेल
ममता ने यहा भी लिखा कि आमतौर पर जिस तरह से पीएम औऱ सीएम के बीच बैठक होती है, मैं उस तरह की बैठक चाहती थी लेकिन आपने अपने दल के एक स्थानीय विधायक को बैठक में बुला लिया जबकि पीएम और सीएम की बैठक में उनका कोई मतलब ही नहीं.

आपको बता दें कि यहां जिस विधायक की तरफ ममता ने इशारा किया वो शायद शुभेंद अधिकारी की ओर था.. क्योंकि सुभेंदु बंगाल चुनाव के पहले तक ममता के करीबी थे और टीएमसी में नंबर 2 की हैसियत वाले नेता थे. लेकिन चुनाव के ठीक पहले उन्होंने पाला बदलकर बीजेपी का हाथ थाम लिया और ममता के खिलाफ नंदीग्राम से चुनाव लड़े थे और ममता को हराकर जीत भी हासिल किया.

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कौन हैं अलपन?
अलपन 1987 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. अलपन 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद सोमवार को सेवानिवृत्त होने वाले थे लेकिन इस खींचतान के बाद अगर केंद्र सरकार उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है तो पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद की सुविधा उन्हें नहीं मिलती तो यह उनके लिए परेशानी भरा हो सकता है.

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