Connect with us

Hi, what are you looking for?

[t4b-ticker]

वीडियो

Har Ghar Tiranga: भारत का झंडा कैसा बना तिरंगा, जानें कौन है भारतीय ध्वज का डिजाइनर?

पिंगली वैंकेया, जी हां यही वो नाम है जिन्होंने अपने तिरंगे को डिजाइन किया था. इनका जन्म दो अगस्त 1876 को आंध्रप्रदेश के मछलीपट्टनम में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम हनुमंतरायुडु और मां का नाम वेंकटरमन्ना था. वेंकैया मद्रास से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और ग्रेजुएशन के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए थे.

har ghar tiranga
har ghar tiranga

ये जो अपना तिरंगा आप देख रहे हैं जिसके लहराने से दिलों दिमाग में जोश का ज्वार उमड़ पड़ता है. यह केवल झंडा नहीं है बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की आन बान और शान है. झंडा तो हम सब बचपन से फहराते आ रहे हैं लेकिन क्या आपको पता है कि इस झंडे की कहानी क्या है? कैसे देश का झंडा तिरंगा हुआ और इसमें अशोक चक्र स्थापित हुआ और ये जो झंडे का डिजाइन है वो किसकी देन है? दो अगस्त से राष्ट्रीय ध्वज को डिजाइन करने वाले का क्या नाता है? ये सब हम आपको इस वीडियो में बताएंगे. उससे पहले यह जान लेना जरूरी है कि इस बार आजादी के अमृत महोत्सव यानी स्वतंत्रता की 75वीं सालगिरह पर 20 करोड़ घरों में तीन दिनों तक झंडा फहराया जाएगा.

इसके लिए देश भर में तैयारियां की गई हैं. कहीं महिलाएं झंडा बनाती दिखाई दे रही हैं तो कहीं स्कूलों में छोटी बच्चियां हर घर तिरंगा के लिए नन्हें हाथों से योगदान दे रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशवासियों से 13 से 15 अगस्त के बीच अपने-अपने घरों पर तिरंगा फहराकर ‘हर घर तिरंगा’ मुहिम को मजबूत करने की अपील की है. तिरंगे की शान के लिए सरहद पर कितने ही सैनिक अपनी जान गंवा देते हैं वो तिरंगा जिसे देखकर सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, दिल में देशप्रेम जाग उठता है. भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है आइये नजर डालते है इसके अनकहे तथ्यों पर

किस दिन अपनाया गया राष्ट्र ध्वज तिरंगा

भारत का पहला झंडा 1906 में अस्तित्व में आया था. 7 अगस्त 1906 को इसे पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया था. लेकिन तब उस झंडे में तीन रंग लाल, पीला और हरे रंग की पट्टियां देखने को मिलती थी. इसमें बीच में वन्देमातरम लिखा हुआ था. इसके साथ ही इसमें 8 कमल के फूल, चांद और सूरज भी बने हुए होते थे.

लेकिन भारत का पहला झंडा काफी दिनों तक अस्तित्व में नहीं रहा क्योंकि अगले साल ही इसमें कुछ संशोधन हो गया. 1907 में मैडम कामा और उनके कुछ क्रांतिकारी साथियों, जिन्हें भारत से निर्वासित यानी देश निकाला कर दिया गया था, हालांकि, कई लोगों का कहना है कि यह घटना 1905 में हुई थी. अब दूसरा झंडा भी पहले ध्‍वज के जैसा ही था. हालांकि, इसमें सबसे ऊपरी की पट्टी पर केवल एक कमल था और सात तारे सप्‍तऋषि को दर्शाते हैं. यह झंडा बर्लिन में हुए समाजवादी सम्‍मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था.

Advertisement. Scroll to continue reading.

उसके बाद भारत में स्वतंत्रता संग्राम में तेजी के साथ ही भारत को अपना नया झंडा भी मिलता रहा. 1917 में डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने एक नया झंडा फहराया. इस झंडे में पांच लाल और 4 हरे रंग की पट्टियां थी. इसके साथ ही इसमें सप्तऋशि को दर्शाते सात तारे अर्द्ध चंद्र और सितारे थे. बाएं साइड कोने में यूनियन जैक भी था इस झंडे में.

1921 में ही भारत को अपना चौथा झंडा भी मिल गया. अखिल भारत कांग्रेस कमेटी के सेशन के दौरान आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति ने महात्मा गांधी को यह झंडा दिया था. गांधी ने इसमें कुछ संशोधन भी करवाया. जिसके बाद इसमें सफेद, हरे और लाल रंग की पट्टियां थीं. वहीं देश के विकास को दर्शाने के लिए बीच में चरखा भी था.

भारत का झंडा 1931 में एक बार फिर से बदला. इस झंडे को इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अपनाया था. इस झंडे में केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियां थीं. हालांकि चरखा इस बार भी केंद्र में था.

1931 में बना झंडा ही आज के वर्तमान भारतीय तिरंगे से काफी मिलता जुलता है. हालांकि 1947 में इसमें थोड़ा संशोधन करते हुए चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को रखा गया.

यह तो आपने जान लिया कि कैसे भारत का झंडा तिरंगा हुआ, अब आप ये भी जान लीजिए कि तिरंगे को डिजाइन किसने किया था?

Advertisement. Scroll to continue reading.

पिंगली वैंकेया, जी हां यही वो नाम है जिन्होंने अपने तिरंगे को डिजाइन किया था. इनका जन्म दो अगस्त 1876 को आंध्रप्रदेश के मछलीपट्टनम में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम हनुमंतरायुडु और मां का नाम वेंकटरमन्ना था. वेंकैया मद्रास से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और ग्रेजुएशन के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए थे. एक बात और उन्होंने रेलवे में गार्ड की नौकरी भी की थी. महज 19 साल की उम्र में ब्रिटिश आर्मी में सेनानायक बने थे. उसी दौरान दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी से उनकी मुलाकात हुई थी. उनका सपना था कि भारत का अपना राष्ट्रीय ध्वज हो.

उन्होंने 1916 से 1921 तक दुनिया भर के कई देशों के राष्ट्रीय झंडों का अध्ययन किया। उसके बाद विजयवाड़ा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी को लाल-हरे रंग के झंडे का डिजाइन दिखाया था. गांधी जी के सुझाव पर ही उन्होंने सफेद रंग को राष्ट्रीय ध्वज में शामिल किया, जो शांति का प्रतीक माना जाता है. 1931 में तिरंगे को अपनाने का प्रस्ताव पास किया गया, जिसके बाद देश को केसरिया, सफेद और हरा रंग के साथ सफेद पट्टी पर चरखे वाला तिरंगा मिला. उसके बाद जुलाई 1947 में तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया। एक बार अपनाने के कुछ समय बाद तिरंगे में संशोधन करते हुए चरखा को हटाकर अशोक चक्र को शामिल किया गया. पिंगली वेंकैया का 1963 में निधन हो गया था.

You May Also Like

टेक-ऑटो

नई दिल्ली : चाइना की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Xiaomi ने अपना नया स्मार्टफोन Civi 2 को लॉन्च कर दिया है. कंपनी द्वारा इस स्मार्टफोन...

बॉलीवुड

Bigg Boss: बिग बॉस एक ऐसा रियलिटी शो है, जो टीआरपी में सबसे आगे रहा है. आगामी 1 अक्टूबर से कलर्स टीवी पर बिग...

क्रिकेट

Australia Team Announced, AUS vs WI: अनुभवी सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर और तीन अन्य शीर्ष खिलाड़ी वेस्टइंडीज के खिलाफ दो मैच की सीरीज के...

देश

नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने एसएससी सीजीएल 2022 (SSC CGL) में खाली पदों का नोटिफिकेशन जारी किया है. इन पदों के लिए...

Advertisement