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China-Taiwan Conflict: क्या ताइवान बनेगा अगला यूक्रेन? अमेरिका ने रूस की तरह चीन को भड़का दिया?

अमेरिका लगातार यूक्रेन को रूस के खिलाफ भड़का रहा था. वो जंग के दौरान उसकी मदद करने का भी वादा कर रहा था, लेकिन जब जंग शुरू हुई तो वही अमेरिका दूर खड़ा होकर तमाशा देख रहा है. कुछ ऐसे ही हालात अब चीन और ताइवान के बीच पैदा हो गए हैं. अमेरिका के कारण ताइवान से चीन नाराज हो गया है और ताइवान पर जंग के बादल मंडराने लगे हैं.

China-Taiwan Conflict
अमेरिका के कारण क्या ताइवान बनेगा अगला यूक्रेन? (File Photo: Twitter)

पूरी दुनिया अभी रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच जारी जंग का दंश झेल रही है. यूक्रेन के चमचमाते शहर रूसी मिसाइलों से खंडहर में तब्दील हो चुके हैं. इस युद्ध को भड़काने में अमेरिका (America) का बड़ा योगदान है. युद्ध से पहले वो यूक्रेन की मदद करने का वादा करता रहा और जब युद्ध शुरू हुआ तो दूर खड़ा होकर तमाशा देख रहा है. कुछ ऐसे ही हालात अब चीन और ताइवान (China-Taiwan Conflict) के बीच पैदा हो गए हैं. अमेरिका के कारण ताइवान से चीन नाराज हो गया है और ताइवान पर जंग के बादल मंडराने लगे हैं.

इस खबर में ये है खास

  • ताइवान को सबक सिखाने की कसम
  • क्या चीन-ताइवान में होगा युद्ध?
  • ताइवान पर चीन का पहला हमला
  • यूक्रेन की तरह ताइवान को भी बढ़ावा
  • ताइवान को कैसे बचाएगा अमेरिका?
  • घट रही अमेरिका की चौधराहट
  • चीन-ताइवान युद्ध का दुनिया पर असर

ताइवान को सबक सिखाने की कसम

चीन के कड़े ऐतराज के बाद भी अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी मंगलवार रात को ताइवान पहुंच गईं. पेलोसी के ताइवान पहुंचते ही चीन के 21 सैन्य विमानों ने ताइवान की सीमाओं का उल्लंघन किया. चीनी आर्मी ने युद्धाभ्यास के बहाने ताइवान की सीमाओं के किनारे घेराबंदी शुरू कर दी है. इस बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि पेलोसी की ताइवान यात्रा लोकतांत्रिक नहीं है. यह चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के बारे में एक मुद्दा है. वांग यी ने कहा कि ताइवान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. चीन ने सबक सिखाने की कसम खाई है.

क्या चीन-ताइवान में होगा युद्ध?

दरअसल चीन, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश कहता है. पेलोसी के ताइवान दौरे से नाराज चीन ने अब ताइवान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है. चीन ने कहा है कि 1.4 अरब चीनी नागरिकों से शत्रुता मोल लेने का अंजाम अच्छा नहीं होगा. वहीं ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा कि चीन के सैन्य विमानों के जवाब में, ताइवान ने हवाई गश्ती अभियान शुरू किया है. रेडियो चेतावनी भेजी गई है और चीनी सैन्य विमानों को ट्रैक करने के लिए रक्षा मिसाइल प्रणालियों को तैनात किया गया है.

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ताइवान पर चीन का पहला हमला

चीन ने ताइवान पर अपना पहला बड़ा हमला कर दिया है. ड्रैगन ने ताइवान के साथ फल समेत कई चीजों के आयात पर रोक लगा दी है. चीन ने ताइवान से होने वाले आयात को भी सोमवार तक के लिए रोक दिया है. इस प्रतिबंध के तहत ताइवान के 35 निर्यातकों की ओर से चीन आने वाले सभी सामानों के आयात पर रोक लगा दी गई है.

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यूक्रेन की तरह ताइवान को भी बढ़ावा

वहीं पेलोसी ने ताइवान की सुरक्षा का वादा करते हुए कहा कि आज हम ये संदेश लेकर यहां आए हैं कि ताइवान के साथ अमेरिका की एकजुटता महत्वपूर्ण है. पेलोसी ने कहा कि दुनिया में स्वतंत्रता चाहने वाले हर व्यक्ति के लिए ताइवान की कहानी प्रेरणादायक है. यहां का लोकतंत्र महिला राष्ट्रपति के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका यह वादा करता है कि वह हमेशा ताइवान के साथ खड़ा रहेगा. अमेरिका कुछ इसी तरह से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलदोमीर जेलेंस्की को भी बढ़ावा दे रहा था. अमेरिका ने यूक्रेन से वादा किया था कि वो रूस से जंग की स्थिति में पूरा साथ देगा.

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ताइवान को कैसे बचाएगा अमेरिका?

रूस-यूक्रेन युद्ध से अमेरिका की साख को बड़ा धक्का लगा है. अब दुनिया में उसकी पहली जैसी ताकत नहीं बची है. जापान ने खुद कहा है कि अमेरिका बताए कि ताइवान पर हमले की​ स्थिति में वो किस तरह से उसे बचाएगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन पर वैसे ही चीन का दबदबा कायम हो चुका है और संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में तो रूस और चीन के बिना कोई पत्ता भी नहीं हिल सकता. दुनिया के देशों की समझ में आ गया है अमेरिका पर निर्भर रहे तो कभी भी कुछ भी वेपनाइज हो सकता है. एटीएम कार्ड से लेकर स्मार्टफोन तक हथियान बन सकते हैं.

घट रही अमेरिका की चौधराहट

रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया तो अमेरिका की प्रतिक्रिया बहुत तीखी रही और तमाम तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए. अमेरिका मान रहा था कि जैसा वो कह रहा है, वैसे ही पूरी दुनिया करेगी लेकिन यह मिथक टूट गया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चीन और भारत ने वोटिंग ही नहीं की. इन दोनों देशों के अलावा ब्रिक्स और एससीओ के ज्यादातर देशों ने रूस का समर्थन किया या फिर वोटिंग में शामिल नहीं हुए.

चीन-ताइवान युद्ध का दुनिया पर असर

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चीन और ताइवान के बीच कोई युद्ध शुरू होता है, तो दुनियाभर के टेक बाजार ठंडे पड़ सकते हैं. TSMC यानी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का घर ताइवना ही है. ऐपल, AMD, Nvidia, ARM जैसे बड़े ब्रांड्स इसके क्लाइंट हैं. कंपनी इन सभी के लिए एडवांस चिप तैयार करने का काम करती है. इन चिप्स से ही आपके स्मार्टफोन, कार, लैपटॉप और दूसरी इलेक्ट्रिक चीजें काम करती हैं. उधर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में चीन नंबर वन पर है. युद्ध होने से चीन के इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को भी इससे उसी पैमाने पर क्षति होगी.

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