Connect with us

Hi, what are you looking for?

[t4b-ticker]

विदेश

अफगान में तालिबान का कब्जा, ट्रंप ने कहा- अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी हार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप: ANI

तालिबान ने जिस तेजी के साथ अफगानिस्तान पर कब्जा किया है उसके बाद से अमेरिकी नेताओं और रणनीतिकारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के लिए अमेरिकी नेता ही एक दूसरे के शासनकाल और नेतृत्व को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

ट्रंप ने बताया अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी हार
इस बीच, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि तालिबान का विरोध किए बिना काबुल का पतन होना अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी हार के रूप में दर्ज होगा।

तालिबान के काबुल में राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लेने और इसके निर्वाचित नेता अशरफ गनी के अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देश छोड़कर ताजिकिस्तान चले जाने के बाद ट्रंप ने एक बयान में कहा, “जो बाइडन ने अफगानिस्तान में जो किया उसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी हार के रूप में याद रखा जाएगा।”

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उत्तराधिकारी बाइडन की आलोचना करते हुए उन पर असंगत फैसलों से अफगान नीति पर पूरी तरह से विफल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘तालिबान अब अमेरिका या अमेरिका की शक्ति से नहीं डरता है या उसका सम्मान नहीं करता। कितनी शर्म की बात होगी, जब तालिबान काबुल में अमेरिकी दूतावास पर झंडा फहराएगा। यह कमजोरी, अक्षमता और रणनीतिक रूप से असंगत फैसलों के कारण मिली एक पूर्ण विफलता है।’’

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने इसे बाइडन प्रशासन की विफलता करार दिया है।

Advertisement. Scroll to continue reading.

काबुल में तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिकी अधिकारियों को दूतावास खाली कर अमेरिका वापस बुलाने और अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाए जाने पर ट्रंप औऱ उनके सहयोगियों ने बाइडन को कमजोर और संकोची कहा। कई जानकारों ने इस अमेरिका की सबसे बड़ी खुफिया विफलता भी कहा।

अफगान सरकार का तेजी से पतन और वहां फैली अराजकता कमांडर इन चीफ के रूप में बाइडन के लिए एक गंभीर परीक्षा की तरह है। रविवार तक प्रशासन की प्रमुख हस्तियों ने माना कि अफगान सुरक्षा बलों के तेजी से हारने से वे अचंभे में हैं क्योंकि उन्होंने ऐसा अनुमान नहीं लगाया था। काबुल हवाई अड्डे पर छिटपुट गोलीबारी की खबरों ने अमेरिकियों को शरण लेने पर मजबूर किया जो उड़ानों की प्रतीक्षा कर रहे थे।

बाइडन ने एक बयान में कहा था ‘‘हमारे राजनयिक, सैन्य और खुफिया दलों की सिफारिशों के आधार पर, मैंने लगभग 5,000 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती को मंजूरी दी है ताकि हम अफगानिस्तान से अमेरिकी कर्मियों और अन्य संबद्ध कर्मियों की व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से वापसी सुनिश्चित कर सकें। साथ ही हम अपने अभियान के दौरान अपने बलों की मदद करने वाले अफगान नागरिकों और तालिबान के आगे बढ़ने के कारण जिन लोगों को विशेष रूप से खतरा है, उनकी व्यवस्थित एवं सुरक्षित निकासी सुनिश्चित कर सकें।’’

बाइडन ने जुलाई मे की थी अमेरिकी सैनिकों की वापसी की घोषणा
बाइडन ने जुलाई में औपचारिक घोषणा की थी कि अमेरिकी सैनिक 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से वापस आ जाएंगे। वह बलों की वापसी संबंधी अपने फैसले पर दृढ़ हैं। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में संवाददाताओं से कहा कि उन्हें इस पर खेद नहीं है और अब समय आ गया है कि अफगानिस्तान के लोग ‘‘अपने लिए लड़ें’’।

मैं नहीं चाहता कि 5वें राष्ट्रपति को भी युद्ध संभालना पड़े
राष्ट्रपति ने 11 सितंबर से पहले अफगानिस्तान से अपने सभी बलों की वापसी संबंधी अपनी योजनाओं में किसी भी बदलाव से इनकार किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अफगानिस्तान में अमेरिकी बलों की मौजूदगी का नेतृत्व करने वाला चौथा राष्ट्रपति हूं।’’ उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके बाद पांचवें राष्ट्रपति को भी युद्ध की कमान संभालनी पड़े।

Advertisement. Scroll to continue reading.

उन्होंने अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी की प्रक्रिया तेज करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि वह ‘‘दूसरे देश के असैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका की कभी समाप्त न होने वाली उपस्थिति’’ को उचित नहीं ठहरा सकते।

20 सालों से अफगानिस्तान में थी अमेरिकी सेना
बाइडन ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान में हमारे देश के 20 वर्षों के युद्ध में, अमेरिका ने अपने बेहतरीन युवा पुरुषों और महिलाओं को वहां भेजा है, लगभग एक हजार अरब डॉलर का निवेश किया है, 3,00,000 से अधिक अफगान सैनिकों और पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया है, उन्हें अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों से लैस किया है और अमेरिकी इतिहास के सबसे लंबे युद्ध के तहत उनकी वायु सेना का रखरखाव किया है।’’

बाइडन ने अपने बयान में कहा, ‘‘यदि अफगान सेना अपने देश पर नियंत्रण बनाए नहीं रख सकती या नहीं रखती है, तो भले ही एक और साल हो या पांच और साल, अमेरिकी सेना की उपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ता।’’

बाइडन ने कहा कि उन्होंने सशस्त्र बलों और खुफिया समुदाय को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि अमेरिका अफगानिस्तान से भविष्य में होने वाले आतंकवादी खतरों से निपटने की क्षमता और सतर्कता बनाए रखे।

Advertisement. Scroll to continue reading.
Advertisement

Trending

You May Also Like

Advertisement