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विदेश

पीएम का घर फूंका, सांसद को मार डाला, हिंसा से जलता श्रीलंका हंगर-हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत से आगे!

सवाल यह है कि श्रीलंका में हालात इतने खराब हैं तो फिर ग्लोबल हंगर इंडेक्स और ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत श्रीलंका से पीछे कैसे हो सकता है.

Hunger-Index
पीएम का घर फूंका, सांसद को मार डाला, हिंसा से जलता श्रीलंका हंगर-हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत से आगे! (PTI)

श्रीलंका के हालात काफी भयावह हो चले हैं. वहां के प्रधानमंत्री से लेकर सांसदों के घर फूंके जा रहे हैं. सड़कों पर लगातार हिंसा हो रही हैं. नेताओं की गाड़ियों को लोग नदियों में धकेलते देखे जा रहे हैं. ये सब हो रहा है क्योंकि श्रीलंका की माली हालत बहुत खस्ता हो गई है और खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं. क्या रसोई गैस, क्या बिजली और यहां तक कि दूध के दाम लोगों की औकात से ज्यादा हो गए हैं. दूसरी ओर, भारत अपने 80 करोड़ से अधिक जनता के लिए फ्री राशन बांट रहा है. फिर भी ग्लोबल हंगर इंडेक्स और ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत श्रीलंका से पीछे है. सवाल यह है कि श्रीलंका में हालात इतने खराब हैं तो फिर ग्लोबल हंगर इंडेक्स और ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत श्रीलंका से पीछे कैसे हो सकता है.

खास बात
  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत और श्रीलंका
  • ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत और श्रीलंका
  • इंडेक्स आने के बाद श्रीलंका में क्या से क्या हो गया
  • जनवरी 2022 के बाद श्रीलंका को 3.5 अरब डॉलर दे चुका भारत
  • ऐसे रेटिंग और इंडेक्स पर कौन विश्वास करेगा
  • अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों को भारत ने बोगस करार दिया
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत और श्रीलंका

वैश्विक भुखमरी सूचकांक यानी ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 में भारत 101वें स्थान पर लुढ़क गया. इंडेक्स के अनुसार, भारत अपने पड़ोसी देश श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश से भी पीछे है. 2020 में जो रैंकिंग जारी की गई थी, उसमें भारत 94वें स्थान पर था. इंडेक्स में बताया गया कि भारत में भूख का स्तर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है.

Global Hunger Index
Global Hunger Index

2020 में भारत को 107 देशों की लिस्ट में 94वें स्थान पर तो 2021 में 116 देशों में यह 101वें स्थान पर दिखाया गया. इंडेक्स में भारत के पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश संयुक्त रूप से 76वें, म्यांमार 71वें और पाकिस्तान 92वें स्थान पर दिखाए गए हैं. इंडेक्स में श्रीलंका को 65वां स्थान दिया गया है, जो भारत से कई स्थान आगे है. इंडेक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की तुलना में इन देशों ने अपने नागरिकों को भोजन उपलब्ध कराने को लेकर बेहतर प्रदर्शन किया है.

श्रीलंका में राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर पानी की बौछार कर रही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई. (AP/PTI)
ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत और श्रीलंका

ग्लोबल हंगर इंडेक्स के बाद बात करते हैं ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स की. इस लिस्ट में भी भारत श्रीलंका से पीछे दर्शाया गया है. इस लिस्ट में कुल 146 देशों को शामिल किया गया है, जिसमें भारत का स्थान 139 है, जबकि पड़ोसी देश श्रीलंका को 129वां रैंक हासिल हुआ था. इसका मतलब यह हुआ कि श्रीलंका भारत से ज्यादा खुशहाल देश है.

Happiness Index
Happiness Index

हैप्पीनेस इंडेक्स बनाने के समय संबंधित देश में सोशल सपोर्ट, जीवन में चुनाव करने की आजादी, उदारता, भ्रष्टाचार की धारणा को आधार बनाया गया था. इस लिस्ट में भारत को श्रीलंका से 10 अंक नीचे दिखाया गया. लिस्ट में सिएरा लियोन भी भारत से आगे बताया गया है.

कोलंबो में सरकार समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में एक कार जला दी गई. (AP/PTI)
इंडेक्स आने के बाद श्रीलंका में क्या से क्या हो गया

ग्लोबल हंगर और ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में श्रीलंका भारत से आगे रहा लेकिन अचानक श्रीलंका में गरीबी, भूखमरी और कंगाली घर कैसे कर गई. जाहिर सी बात है कि यह सब अचानक नहीं हुआ. श्रीलंका से जो दिल दहलाने वाली तस्वीरें आ रही हैं, वो बता रही हैं कि वहां के लोगों में आक्रोश कितना भरा होगा कि पीएम का घर जला देते हैं और सांसद को मार देते हैं. गाड़ियों को झीलों में पलट देते हैं. ये सब चीजें अचानक नहीं होती हैं. श्रीलंका में लोग काफी समय से अव्यवस्था, भुखमरी, कंगाली और महंगाई के बोझ तले दबे हुए थे और उनका गुबार निकल रहा है. इतना सब कुछ होने के बाद भी हंगर और हैप्पीनेस में श्रीलंका कैसे आगे जा सकता है. यह सोचने वाली बात है.

श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने सरकार के समर्थकों को दौड़ा लिया. (AP/PTI)
जनवरी 2022 के बाद श्रीलंका को 3.5 अरब डॉलर दे चुका भारत

एक तरफ भारत से हंगर इंडेक्स में आगे दर्ज श्रीलंका के लोग भूख और कंगाली से बेहाल हैं तो भारत सरकार ने अपने देश के 80 करोड़ लोगों के लिए इस साल दिवाली तक फ्री राशन देना तय किया है. फ्री राशन स्कीम कोराना महामारी के समय से चल रही है. पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद इस योजना को दिवाली तक आगे बढ़ाने का ऐलान किया है. यही नहीं भारत ने श्रीलंका को जनवरी 2022 के बाद अब तक 3.5 अरब डॉलर की मदद दी है और आगे भी मदद करने को तैयार है. हैप्पी श्रीलंका को जुलाई 2022 तक केवल ब्याज चुकाने के लिए 2 अरब डॉलर चाहिए, जबकि अभी उसके पास महज 50 लाख डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है.

श्रीलंकाई सरकार के समर्थकों ने कोलंबो में प्रदर्शनकारियों के साथ संघर्ष के दौरान पुलिस वाटर कैनन ट्रक को रोकने की कोशिश की. (AP/PTI)
ऐसे रेटिंग और इंडेक्स पर कौन विश्वास करेगा

श्रीलंका की असलियत तो सामने आ गई. इंडेक्स में भारत से आगे दिखाया जा रहा है और जमीन पर हालात कुछ और हैं. भारत सरकार लगातार कहती रही है कि इस तरह की रिपोर्ट से भारत को नीचा दिखाने की कोशिश की जाती है, जो एक साजिश है. हालांकि ऐसे रिपोर्ट पर राजनीति भी होती रही है. इस तरह की रिपोर्ट आने के बाद विपक्ष को मौका मिल जाता है और सरकार के अलावा सत्ताधारी पार्टी ​खुद और खुद की नीतियों को डिफेंड करने में जुट जाती हैं. कुछ समय के लिए एजेंसियों की रिपोर्ट सच लगती है, लेकिन जब श्रीलंका जैसे हालात सामने आते हैं तो रिपोर्ट जारी करने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है. फिर यह माहौल बन जाता है कि किसी न किसी के प्रभाव में आकर रिपोर्ट बनाई गई है. रेटिंग एजेंसियों, इंडेक्स एजेंसियों को इससे बचना चाहिए.

श्रीलंका में सरकार विरोधी प्रदर्शन और झड़प के दौरान अपने को सांत्वना देता व्यक्ति (AP/PTI)
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों को भारत ने बोगस करार दिया

हाल ही में मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्ट जारी करने वाली एजेंसियों को आड़े हाथों लिया है. इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन इकोनॉमिक इंटेलीजेंस रिपोर्ट, प्रेस फ्रीडम इंडेक्स, डेमोक्रेसी इंडेक्स आदि रिपोर्ट शामिल हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना से मौतों की एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दावा किया गया है कि 2020—21 के बीच कोविड से भारत में 47 लाख लोगों की मौत हुई थी, जबकि भारत सरकार का कहना है कि इस समय के बीच में 4.81 लाख लोगों की मौत कोरोना से हुई थी. भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी. भारत का कहना था कि जिस पद्धति से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रिपोर्ट दी है, वह बोगस है.

इकोनॉमिक इंटेलीजेंस रिपोर्ट: इकोनॉमिक इंटेलीजेंस रिपोर्ट ने 2020 में भारत को त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र की श्रेणी में रखा था. इसके पीछे तर्क दिया गया था कि भारत में नागरिकों को स्वतंत्रता नहीं है. भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह बिना स्वतंत्र अध्ययनों के आधार पर तैयार की गई है. यहां तक कि भारत सरकार ने संसद में भी इस रिपोर्ट के आधार पर पूछे गए प्रश्न को स्वीकार नहीं किया था.

State of Emergency in Sri Lanka
श्रीलंका में दूसरी बार आपातकाल लागू किया गया. (AP/PTI)

फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट: इसके अलावा अमेरिकी संगठन फ्रीडम हाउस की एक रिपोर्ट में 2021 में दावा किया गया था कि भारत में नागरिक स्वतंत्रता में लगातार गिरावट आ रही है और लोगों से उनकी आजादी छीनी जा रही है. संगठन ने भारत के दर्जे को स्वतंत्र से घटकार आंशिक स्वतंत्र कर दिया था. इस पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारत के पास स्थापित लोकतंत्र है और इसके लिए भारत को किसी के भी उपदेश की जरूरत नहीं है.

प्रेस फ्रीडम इंडेक्स: अभी कुछ ही दिन पहले प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी किया गया है, जिसमें भारत की स्थिति काफी चौंकाने वाली है. पत्रकारों की आजादी को लेकर जारी किए गए इस रिपोर्ट में भारत को 8 स्थान नीचे लुढ़कने का दावा किया गया है और भारत को इंडेक्स में 150वां स्थान दिया गया है. इस पर पूर्व सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मैं रिपोर्ट जारी करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन को चुनौती देता हूं कि वो उनकी सूची जारी करे जिनके राय के आधार पर यह रिपोर्ट बनाई गई है. इससे भारत के खिलाफ साजिश का पर्दाफाश हो जाएगा.

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